
परिवहन उद्योग पर बढ़ते बोझ पर मंथन, राष्ट्रीय नीति लागू करने की मांग, मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की बैठक में देशभर के ट्रांसपोर्टर हुए शामिल
इंदौर : आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) की इंदौर में आयोजित 219वीं मैनेजिंग कमेटी बैठक में देशभर के ट्रांसपोर्टर , ट्रक एवं बस आपरेटरों तथा मोटर परिवहन उद्यमियों ने परिवहन उद्योग के समक्ष उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया। उन्होंने परिवहन उद्योग पर बढ़ते आर्थिक बोझ पर मंथन किया और व्यापक राष्ट्रीय परिवहन समुदाय नीति को तत्काल लागू करने की मांग की।
बैठक में परिवहन उद्योग पर बढ़ते आर्थिक बोझ, सरकार की अव्यावहारिक नीतियों को लेकर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया गया। मोटर परिवहन उद्यमियों ने परिवहन उद्योग के समक्ष उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया।
AIMTC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बढ़ती परिचालन लागत, प्रशिक्षित चालकों की गंभीर कमी, मनमानी प्रवर्तन व्यवस्था, व्यापक राष्ट्रीय परिवहन नीति के अभाव तथा लगातार बढ़ते नियामकीय बोझ को लेकर परिवहन उद्योग की गहरी पीड़ा और असंतोष व्यक्त किया गया।
*सबसे गंभीर चिंता का विषय*
दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक डीजल वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क में हाल ही में की गई वृद्धि तथा 1 नवंबर, 2026 से बीएस- डीजल वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध, बढ़ते डीजल व टोल का परिवहन व्यवसाय पर बोझ, इ-चालान प्रणाली का दुरुपयोग, आर.टी.ओ. द्वारा उत्पीड़न, ट्रकों पर की अव्यावहारिक अनिवार्यता और इसके चलते ट्रांसपोर्टरों से हो रही लूट, ट्रांजिट इंश्योरेंस की अनिवार्यता को लेकर चर्चा की गई । देशभर से आए प्रतिनिधियों ने कहा कि इन निर्णयों से लाखों ट्रांसपोर्ट आपरेटरों, विशेषकर छोटे और मध्यम स्तर के वाहन स्वामियों पर गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ेगा, जो पहले से ही बढ़ती ईंधन लागत, टोल शुल्क, अनुपालन व्यय तथा घटते भाड़े की दरों से जूझ रहे हैं।
एआईएमटीसी के अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने देश में शीघ्र राष्ट्रीय परिवहन नीति लागू की जाए, चालक कल्याण की व्यापक व्यवस्था बनाई जाए, परिचालन लागत आधारित वैज्ञानिक भाड़ा निर्धारण प्रणाली लागू की जाए तथा प्रवर्तन और ई-चेकिंग व्यवस्था को पूर्णत: पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
बैठक में ई-चालान प्रणाली के व्यापक दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के कारण परिवहन संचालकों को मनमाने जुमार्नों एवं उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ई-चालान प्रणाली को पूर्णत: तकनीक आधारित, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।
बैठक में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस के नाम पर मालवाहक वाहन स्वामियों के साथ हो रहे व्यापक शोषण पर भी कड़ा विरोध और गहरा रोष व्यक्त किया गया।
मैनेजिंग कमेटी ने कहा कि इसे मालवाहक वाहनों पर भी अव्यावहारिक रूप से लागू किया जा रहा है। कई राज्यों में मालवाहक वाहनों के परमिट नवीनीकरण, परमिट समर्पण, परमिट हस्तांतरण तथा अन्य आनलाइन परिवहन सेवाओं को भी स्थापना से जोड़ दिया गया है, जिससे हजारों ट्रांसपोर्टरों और वाहन स्वामियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ, तकनीकी बाधाओं तथा प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन सी.एल. मुकाती ने कहा कि केवल जुमार्ने बढ़ाने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी नहीं लाई जा सकती। सरकारों को चालकों के प्रशिक्षण, आधुनिक परिवहन अवसंरचना, सुरक्षित पार्किंग, विश्राम गृहों, सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं पर निवेश करना होगा।





