
Film Review: राजा शिवाजी- मराठी गौरव को दर्शाती ऐतिहासिक ड्रामा और एक्शन फिल्म
-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
महाराष्ट्र दिवस हो, शुक्रवार हो और शिवाजी पर हिन्दी तथा मराठी फिल्म लगे तो यह परफेक्ट टाइमिंग ही कहलाएगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे शिवाजीराव देशमुख के बेटे रितेश देशमुख ने राजा शिवाजी बनाई है। खुद राजा शिवाजी बने हैं, अपनी बीवी जिनिलिया को शिवाजी की पत्नी साईबाई का रोल दिया है और ‘मैंने प्यार किया’ फेम भाग्यश्री जीजाऊ माता बनी हैं।
इस फिल्म को पर्दे पर उतारने में रितेश देशमुख को पूरे 12 साल लगे। इसे हिन्दी और मराठी दोनों भाषाओं में बनाया गया है। मराठी संस्करण 3 घंटे 15 मिनट का है, हिन्दी फिल्म उससे आठ मिनट छोटी है। इस को बनाने में सबसे बड़ी चुनौती यही रही होगी कि शिवाजी की कहानी तो लगभग सभी जानते हैं, ऐसे में इसमें ऐसा क्या रखा जाए कि दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आएं! वैसे तो बीते 75 वर्षों में शिवाजी पर कई फिल्में बन चुकी हैं। हिन्दी और मराठी दोनों में शिवाजी पर पहली चर्चित फिल्म भालजी पेंढारकर ने 1952 में बनाई थी।
इस फिल्म में शिवाजी के जन्म से लेकर अफजल खान के वध तक की कहानी दिखाई गई है, लेकिन लगता है कि कई महत्वपूर्ण पहलू छूट गए हैं। जैसे शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली की विशेषज्ञता वाले दृश्य, सैनिकों की वेतन व्यवस्था में बदलाव, आदि। पहले सैनिकों को कोई तय वेतन नहीं मिलता था, बल्कि लूट का हिस्सा दिया जाता था। शिवाजी ने पहली बार सैनिकों का नियमित वेतन तय किया और लूटपाट को हतोत्साहित किया। शिवाजी ने ही भारत में संगठित नौसेना की नींव रखी। सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग और कोलाबा में नौसेना के अड्डे बनाए। उनकी नौसेना में गुराब, गल्बत और तरांडे जैसी तेज और छोटी नावें इस्तेमाल होती थीं, जो समुद्री छापामार युद्ध के लिए आदर्श थीं। 1660-1670 के बीच उन्होंने पुर्तगालियों को कई समुद्री युद्धों में पराजित किया।
फिल्म की कहानी नौ अध्यायों में फैली है और शुरुआत शिवाजी के जन्म से पहले की घटनाओं से होती है। छत्रपति शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई के गर्भकाल में ही सुल्तान बुरहान निजाम शाह के आदेश पर उनके नाना लखुजी राजे जाधव और परिवार की दरबार में हत्या कर दी जाती है। दूसरी ओर, शहाजी भोसले राजनीतिक उठापटक के बीच बीजापुर के सुल्तान मोहम्मद आदिल शाह के बंदी बन जाते हैं।
‘राजा शिवाजी’ रितेश देशमुख के सपने और मेहनत की फिल्म है। यह फिल्म महाराष्ट्र की अस्मिता, बहादुरी और हिंदवी स्वराज्य की भावना को प्रस्तुत करती है। विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ ने हाई स्टैंडर्ड स्थापित कर दिया है, जिसका प्रभाव इस पर भी है। रितेश देशमुख और जिनिलिया को हमने अधिकतर हल्के-फुल्के किरदारों में देखा है, इसलिए उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में स्वीकार करने में थोड़ा समय लगता है। फिर भी, इसे उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कहा जा सकता है। उन्होंने न सिर्फ फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि मुख्य भूमिका भी निभाई है।
संजय दत्त और विद्या बालन दोनों ही एंटागोनिस्ट रोल में यानी नेगेटिव रोल में प्रतिपक्षी भूमिकाओं में प्रभावशाली हैं। संजय दत्त का अफजल खान का किरदार खूंखार और क्रूर है, जबकि विद्या बालन ने खदीजा सुल्ताना (मोहम्मद आदिल शाह की बेगम) के रूप में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। खदीजा बीजापुर की शासक रही थीं। विद्या बालन ने धूर्त, लालची, कपटी बेगम के रोल में जान डाली है।
सलमान खान शिवाजी के अंगरक्षक जीव महाला की भूमिका में हैं। अभिषेक बच्चन शिवाजी के बड़े भाई संभाजी शहाजी भोसले के किरदार में दिखाई देते हैं। बोमन ईरानी पीर बाबा के रोल में हैं। महेश मांजरेकर, फरदीन खान, अमोल गुप्ते आदि भी हैं।
संतोष शिवन की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। सह्याद्री की पहाड़ियां, किले और युद्ध दृश्य भव्य लगते हैं। अजय-अतुल का संगीत अच्छा है। खासकर टाइटल सॉन्ग “छत्रपति” और “जय शिवराय” गर्व की भावना जगाते हैं। स्वराज्य की चाह और धर्म-रक्षा का संदेश स्पष्ट रूप से उभरता है।
3 घंटे से ज्यादा लंबी फिल्म कई जगहों पर धीमी और दोहरावपूर्ण लगती है। कुछ दृश्य अनावश्यक रूप से खिंचे हुए हैं। बड़े सितारों की मौजूदगी फिल्म को पैन-इंडियन अपील देती है, लेकिन कुछ जगहों पर संवाद और अभिनय बनावटी लगते हैं। वीएफएक्स भी कुछ स्थानों पर बेहतर हो सकते थे।
फिल्म एक्शन और भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहलुओं को सतही तौर पर छुआ गया है। कुछ संवाद प्रभावशाली हैं जैसे :
– मराठे मिट्टी में गाड़े नहीं जाते, बोए जाते हैं।
– दुश्मन ताकतवर हो तो शक्ति नहीं, युक्ति से काम लो।
– नाम में राजा होने से कोई राजा नहीं होता।
– चंद गुंडों को इकट्ठा करने से कोई राजा नहीं बन जाता।
– हमारे अंगारों पर राख मत डालो।
– बादलों से बिजली को नहीं रोका जा सकता।
– सूरज की तरफ दौड़ने वाले की परछाईं पीछे रहती है।के
अगर आपको ऐतिहासिक ड्रामा, एक्शन और मराठी गौरव पसंद है, तो यह फिल्म थिएटर में देखने लायक है। यह परफेक्ट नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म है।
देखनीय फिल्म है राजा शिवाजी !





