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Fourth Agency in Gold Seizure Case : सौरभ शर्मा मामले में चौथी एजेंसी ED क्यों शामिल!  

Fourth Agency in Gold Seizure Case : सौरभ शर्मा मामले में चौथी एजेंसी ED क्यों शामिल!  

 

लोकायुक्त के बाद इनकम टैक्स फिर डीआरआई और अब ईडी की छापेमारी!

 

Bhopal : शुक्रवार को पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के चार ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की। इसमें उसके पड़ौसी शरद जायसवाल भी शामिल है। ईडी को यहां से कैश और निवेश के दस्तावेज मिले। लोकायुक्त छापे के 8 दिन बाद ईडी ने अपनी कार्रवाई शुरू की। अब इस केस में चार एजेंसियां शामिल हो गई। सभी अलग-अलग कार्रवाई कर रही हैं। किसी भी एजेंसी की कार्रवाई दूसरी एजेंसी में बाधक नहीं बन रही।

इस बारे में ईडी के सूत्रों का कहना है कि इस एजेंसी के काम करने का तौर-तरीका अलग होता है। ईडी का फोकस मनी ट्रेल को ट्रैक करना होता है। पैसा कहां से आया और कहां-कहां निवेश हुआ और उसमें कौन लोग शामिल हैं? ईडी ने सर्चिंग की तो उसकी वजह कुछ अलग है। सर्विलांस से भी कुछ इनपुट मिलते हैं, उस आधार पर ईडी की कार्रवाई होती है।

एक अन्य वजह यह भी होती है कि एक एजेंसी की रेड के बाद कई बार आरोपी रिलैक्स हो जाते हैं। ऐसे में अहम दस्तावेज फिर उसी ठिकाने पर मिलते हैं। इस मामले में चार जांच एजेंसियां लोकायुक्त, इनकम टैक्स, डीआरआई और ईडी शामिल है। ये चारों अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। पर, ऐसा पहली बार नहीं है। ईडी उन्हीं मामलों में एक्शन लेती है, जहां मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी आशंका होती है।

डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) उस 54 किलो सोने की जांच करेगी जो सौरभ के दोस्त चेतन गौर के नाम से रजिस्टर्ड गाड़ी में मिला है। इस बात की जांच होगी कि सोने में फॉरेन मार्क हैं या नहीं। ये भी देखा जाएगा कि ये लीगल तरीके से लिया गया है या नहीं। ऐसा नहीं हुआ तो वो इस बात की जांच करेगा कि ये कहां तैयार हुआ?

इनकम टैक्स ये पता करेगा कि 54 किलो सोने का भुगतान कैसे हुआ! 2 लाख से ज्यादा का पेमेंट कैश में नहीं हो सकता। इससे ज्यादा नकद भुगतान होता है, तो ये ब्लैकमनी माना जाता है। आज की तारीख में 10 ग्राम सोने की कीमत 78 हजार रुपए से ज्यादा है। ऐसे में एक किलो सोने की कीमत 78 लाख से ज्यादा और 54 किलो सोने की कीमत 42 करोड़ से ज्यादा है। जबकि, ईडी इस बात की जांच करेगी कि अपराध से कमाए गए पैसे का ट्रेल क्या है? इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और किस-किस के नाम बेनामी संपत्ति है। लोकायुक्त वह एजेंसी है जो आय से ज्यादा संपत्ति के केस की जांच करेगा। ये देखेगा कि 7 साल की नौकरी के दौरान सौरभ की कितनी तनख्वाह थी और इस दौरान उसने कितनी प्रॉपर्टी बनाई।

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लोकायुक्त को 7 करोड़ देने के सबूत मिले

यह भी पता चला कि सौरभ शर्मा और चेतन गौर के मोबाइल से राजेश को 7 करोड़ देने के सबूत लोकायुक्त को मिले हैं। छापे में जब्त सामान से सौरभ शर्मा और चेतन गौर के बीच करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ। यह रकम अर्निवल बिल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड, रजौधा (देवास) के जरिए दी गई। देवास के राजेश पांडे को नकद राशि दी गई। कंपनी का पता तिरुमाला पैलेस के पास का है। फरवरी से नवंबर 2023 तक कुल 6 ट्रांजेक्शन में करीब 7.25 करोड़ रुपए भेजे गए।

मोबाइल डेटा से पता चला कि राजेश पांडे को रकम देवास और इंदौर में भेजी गई। जांच एजेंसी बाकी सामानों की जांच कर रही है। इसमें और जानकारी सामने आ सकती है। कॉलोनी निर्माण में खपाई जा रही नकदी की जानकारी जिस मोबाइल से वॉट्सऐप चैटिंग से मिली वो सौरभ और चेतन के नाम पर है। इन नंबरों के संपर्कों को खंगाला जा रहा है। उपरोक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से यह नकदी कॉलोनी निर्माण में खपाई जा रही थी।