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लघुकथा: स्कूल चलो अभियान

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” स्कूल चलो अभियान “

    – डॉ.सुनीता फडनिस

रधिया की माँ रोज की तरह रोटले पका रही थी। उसे मजदूरी के लिए जाना था।
आठ वर्षीय रधिया भी माँ के साथ अपने छोटे भाई को लेकर जाती। वहाँ दो पेड़ों के बीच साड़ी का झूला बनाकर वह भाई की देखभाल करती और खेलती रहती। लेकिन स्कूल नहीं जा पाती, स्कूल के लिए वह बहुत तरसती थी।
रधिया का बाप कुछ नहीं कमाता था। शराब पी कर पड़ा रहता था। माँ को काम करना जरूरी था।
आज जब वे सब वहाँ पहुँचे तो उसने देखा – पड़ोस के स्कूल में भाषण हो रहा है , और सभी शिक्षक वहीं हैं , पूछने पर पता चला -‘ स्कूल चलो अभियान’ चल रहा है। जुलूस भी निकला। अचानक उनमें से एक शिक्षिका का ध्यान रधिया पर गया डबडबाई आँखों से वह देख रही थी, वे शिक्षिका उसके पास आईं और प्यार से पूछने लगीं -” स्कूल चलोगी बेटा ? रधिया की आँखें चमकने लगी , लेकिन फिर से बुझ गई , शिक्षिका सब समझ गई और बोली-” तुम्हारे भाई की स्कूल में ही व्यवस्था करवा देंगे , तुम भी उसे बीच बीच में देख लेना ,रधिया खुशी खुशी माँ के पास दौड़ गई ।

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डॉ. सुनीता फडनिस, इंदौर 

1 एमएससी पीएचडी। (CSIR फ़ेलोशिप के साथ
2.शासकीयकन्यामहाविद्यालयसे
स्वेच्छिक सेवानिवृतप्राध्यापक
3.09 छात्रों को पीएचडी करवाई
4. 30 शोध पत्र विभिन्न वर्कशॉप्स तथा सेमिनार्स में प्रस्तुत
5. रसायन शास्त्र में 4 पुस्तके प्रकाशित
6. विषय विशेषज्ञ के रूप में मेडीकैप्स में आमंत्रित
7. विभिन्न कॉलेजेस तथा स्कूल्स में प्रतियोगिताओं में निर्णायक
8. चित्रकला में रुचि : प्रदर्शनियों में सहभागिता
9.अहिलयोत्सव चित्रकला प्रतियोगिता में निर्णायक
10 . दैनिक भास्कर , चौथा संसार पत्रिका , अहा जिंदगी में पत्र एवं लेख प्रकाशित
11. पर्यावरण के विभिन्न विषयों पर पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित

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