भोजशाला में हनुमान चालीसा की गूंज, श्रद्धालुओं ने आज मंगलवार को मनाया महाउत्सव

23

भोजशाला में हनुमान चालीसा की गूंज, श्रद्धालुओं ने आज मंगलवार को मनाया महाउत्सव

धार से छोटू शास्त्री की रिपोर्ट

 

धार: हाई कोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को भोजशाला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दर्शन-पूजन, आरती और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ यज्ञ में आहुति दी गई। श्रद्धालुओं ने इसे हिंदू समाज की बड़ी जीत बताते हुए आतिशबाजी कर खुशी मनाई। इस बार का मंगलवार सत्याग्रह “महा विजय और महा उत्सव” के रूप में मनाया गया। साथ ही श्रद्धालुओं ने कहा कि आंदोलन अपने अंतिम पड़ाव पर है और माँ वाग्देवी की प्रतिमा की पुनर्स्थापना की उम्मीद है

बाइट 1 – मनीष गुप्ता, अधिवक्ता

तो यहाँ पिछले 70 वर्षों से एक नियमित सत्याग्रह चल रहा है और धार की ये धर्मपरायण जनता प्रति मंगलवार यहाँ पिछले 70 वर्षों से आ रही और सत्याग्रह कर रही है। इन्हीं सत्याग्रह का और धार की इस धर्मपरायण जनता के त्यागता ये परिणाम है कि न्यायालय द्वारा इस परिसर को मंदिर घोषित किया गया और आज पूरी जनता में हर्षोल्लास है। आज भी इस सत्याग्रह का 1 दिन है। ये सत्याग्रह इसीलिए खत्म नहीं हुआ है क्योंकि अभी भी हमारी कुछ मांगे जो है वो अधूरी रह गई है। माननीय न्यायालय ने केंद्र सरकार कोई निर्देश दिया था कि लंदन में रखी माँ

की मूर्ति को वापस बुलाया जाए। हमने कल ही अपनी एक तीन सूत्रीय मांग का प्रत्यावेदन केंद्र सरकार को भेजा है जिसमें हमने मांग करी है कि माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार यदि केंद्र सरकार ने मा वागदेवी की प्रतिमा को वापस बुलवाने के लिए कोई भी ठोस कदम उठाए तो हमको उन कदमों से अवगत कराया जाए। यदि कोई कदम नहीं उठाएं तो तत्काल प्रभाव से इसके लिए ठोस और प्रभावी कदम मूर्ति वापस लाने के लिए उठाए जाएं। दूसरी हमारी ये मांग है कि ये परिसर जो है ये एक मंदिर परिसर माननीय न्यायालय द्वारा घोषित किया जा चुका है। लेकिन अभी भी इस परिसर में और

तौर से गर्भगृह में कुछ इस्लामिक आयाते लिखी हुई है, जिनका यदि हम अनुवाद करें तो ये समझ में आता है कि उनका मतलब है कि अल्लाह के अलावा कोई भी पूजनीय योग्य नहीं है और ये आयते कहीं ना कहीं माँ वागदेवी का और धार की धर्मपरायण जनता की भावनाओं का अपमान करती है। इसलिए इन आयतों को मंदिर से हटा के और किसी भी दूसरे सुरक्षित स्थान पर लगाया जाए। और तीसरी हमारी मांग है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जब ASI ने यहाँ सर्वे करा तो उस समय उस सर्वे में इस मंदिर में खुदाई नहीं की जा सकी और कई ऐसी मूर्तियां हैं जो आज भी मंदिर में दबी है। भाई और जो एक छोटा गुंबद है उसके नीचे बजरंगबली की एक मूर्ति है और जो सीढ़ियां है उन सीढ़ियों के नीचे भी कुछ मूर्तियां होने का दावा वर्षों से जनता करती आ रही है तो अब किसी तरीके की कोई रोक नहीं है। किसी तरीके का कोई प्रतिबंध नहीं है तो एएसआई को तत्काल प्रभाव से वो सारी मूर्तियां जो यहाँ पे अभी भी दबी है, उनको बाहर निकाल के, भक्तों की और भगवान की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। तीन सूत्रीय मांगनें रखी है।

IMG 20260519 WA0057

बाइट 2 – गायत्री पुरोहित, श्रद्धालु,

सनातनी के लिए अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना शायद आज जो उनके मन में आनंद है जो खुशी है उसको बया कर पाना शब्दों में मुमकिन नहीं है और क्योंकि मैं तो एक युवा हूँ और मुझे लगता है कि आने वाला भारत जो है वो हमारा है भविष्य जो है वो युवाओं का है तो मैं सिर्फ अपनी तौर पे नहीं बल्कि भारत के हर युवा के तौर पर जो आज यहाँ पर नहीं भी आ पाए जैसे दूर रह रहे हैं मेरे बहुत सारे फ्रेन्डस है जो आउट ऑफ इंडिया भी है उनसे भी जब मैं टच में रहती हूँ तो वो ये चीजें डिस्कस करते हैं तो मैं उन सब के तौर पर आज इस सत्याग्रह में मौजूद हूँ और हम सभी को उस दिन का इंतजार है जब हमारी माँ वागदेवी साक्षात यहाँ पर विराजमान होगी और दूर दूर से लोग जो है दर्शन करने आ पाएंगे.

बाइट 3 – विश्वास पांडे, सरक्षक भोज उत्सव समिति

हम प्रति मंगलवार इस भोजशाला की मुक्ति और इसे गौरव की पुनर्स्थापना के लिए सत्याग्रह करते आए हैं और इस उसी कड़ी में आज यह महा सत्याग्रह है क्योंकि अब हम बहुत करीब है हमारे सत्याग्रह को समाप्ति की ओर क्योंकि शीघ्र ही अब बस सिर्फ माँ का इंतजार है और माँ के उस स्थान का आज आप देख रहे हैं। भारी संख्या में समाज जलाकर यहाँ पूजन कर रहे हैं और शीघ्र ही माँ लंदन के उस ब्रिटिश म्यूजियम से आकर यहाँ विराजित होगी।