Illegal Appointment Scandal Exposed : RTI कार्यकर्ता ने उठाई आवाज!

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Illegal Appointment Scandal Exposed : RTI कार्यकर्ता ने उठाई आवाज!

Indore : महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान जबलपुर के अधीन संचालित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण केंद्र, में एक गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का मामला सामने आने पर सक्रिय RTI कार्यकर्ता लोकेश कुमार परिहार ने इस मामले को उजागर करते हुए संस्थान के संचालक को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा, जिसमें नियमों के विरुद्ध एक संकाय सदस्य को लेखापाल का प्रभार सौंपे जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लोकेश कुमार परिहार को यह ज्ञात हुआ था कि इंदौर प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य द्वारा संस्थान के उच्च कार्यालय से जारी आदेश की अनदेखी करते हुए एक संकाय सदस्य राजेंद्र जोशी को अवैधानिक रूप से लेखापाल का प्रभार सौंपा गया है।

 

राजेंद्र जोशी की मूल जिम्मेदारी प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण कार्य सम्पादित करना हैं न कि लेखा विभाग का कार्यभार संभालना। यह नियुक्ति स्पष्ट रूप से संस्थागत नियमों एवं प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन है। RTI कार्यकर्ता लोकेश कुमार परिहार ने इस गुप्त सूचना की पुष्टि के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण केंद्र इंदौर से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए। RTI के माध्यम से मिलें दस्तावेजों ने इस अनियमितता की पुष्टि कर दी और यह स्पष्ट हो गया कि प्राचार्य द्वारा नियमों को तांक में रखकर अनदेखी करते हुए संकाय सदस्य को लेखा संबंधी कार्य सौंपा गया है।

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उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान द्वारा आदेश क्रमांक 2791, 13 फरवरी 2020 को जारी किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि संकाय सदस्यों को स्थापना, लेखा एवं भंडार संबंधी कार्यों से पूर्णतः मुक्त रखा जाएगा। इसके बावजूद इंदौर प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य द्वारा इस आदेश की खुलेआम अवहेलना की गई। जो एक गंभीर प्रशासनिक चूक को दर्शाती है। RTI कार्यकर्ता परिहार ने महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान के संचालक से मांग की है कि इंदौर प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य से इस अनियमितता पर स्पष्टीकरण मांगा जाए और जांच के उपरांत दोषियों के विरुद्ध उचित एवं कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

यह शिकायत पत्र प्रतिलिपि के रूप में विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल, कमिश्नर इंदौर संभाग तथा कलेक्टर इंदौर को भी सूचनार्थ प्रेषित किया गया है, ताकि उच्च स्तर पर भी इस मामले की जानकारी हो सके। यह मामला सरकारी संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इससे न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी, बल्कि लोक प्रशासन में जनता का विश्वास भी डगमगाएगा। अब देखना यह हैं कि संस्थान के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाता हैं या नही?

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