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Illegal Mining Scam Exposed : ₹200 करोड़ के अवैध खनन घोटाले का खुलासा, IT ने बेनामी फ्लैट्स और जमीन जब्त की!

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Illegal Mining Scam Exposed : ₹200 करोड़ के अवैध खनन घोटाले का खुलासा, IT ने बेनामी फ्लैट्स और जमीन जब्त की!

फर्जी बिलिंग के जरिए अपनी बेनामी संपत्तियों को सफेद धन में बदलने की साजिश!

‘मीडियावाला’ के स्टेट हेड विक्रम सेन की रिपोर्ट

Jajpur (Odisha) : आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि तपस रंजन पांडा ने जाजपुर जिले के धर्मशाला तहसील में डंकारी पहाड़ी पर अवैध रूप से पत्थरों का खनन किया। राज्य सरकार ने 2014 के बाद से इस जगह पर किसी भी खनन की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन, इसके बावजूद पांडा ने वहां से निकाले गए पत्थरों को 200 करोड़ रुपये में कई खरीदारों को बेचा।

आईटी अधिकारियों के मुताबिक, पांडा ने अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए दो बेनामी कंपनियों के नाम पर जमीन और फ्लैट खरीदे। इन कंपनियों का नियंत्रण पांडा के रिश्तेदारों और कर्मचारियों के हाथों में था, लेकिन असली मालिक वही था। इस पैसे से पांडा ने भुवनेश्वर, गुरुग्राम और गाजियाबाद में कई फ्लैट्स और कटक और भद्रक में जमीन खरीदी। बाद में, पैचीदा लेनदेन के जरिए इन संपत्तियों को अपनी और अपनी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर कर लिया।

अधिकारियों के मुताबिक, पांडा ने फर्जी इनकम टैक्स और जीएसटी रिटर्न दाखिल करके अपने अवैध कारोबार को वैध दिखाने की कोशिश की। उसने फर्जी बिलिंग के जरिए अपनी बेनामी संपत्तियों को सफेद धन में बदलने की साजिश रची।

आईटी विभाग का शिकंजा

बेनामी ट्रांजैक्शंस (प्रोहिबिशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2016 के तहत इनकम टैक्स विभाग ने इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से 90 दिनों के लिए जब्त कर लिया है। अगर जांच में इन्हें पूरी तरह बेनामी संपत्ति साबित कर दिया जाता है, तो ये सरकारी संपत्ति में बदल दी जाएंगी। इस कानून के तहत दोषियों को 1 से 7 साल तक की सख्त कैद और संपत्ति के बाजार मूल्य का 25% तक का जुर्माना लग सकता है।

ओडिशा देश का सबसे बड़ा खनिज उत्पादक राज्य है, लेकिन यहां अवैध खनन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया था, जिसमें 360 लोग गिरफ्तार हुए और 524 वाहन जब्त किए गए। इस अभियान के तहत ड्रोन कैमरों से भी तलाशी हुई थी इस जॉच से कई खनन माफियाओं पर शिकंजा कसा गया और अवैध खनन के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ हैं।