इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का शंखनाद: 6 लाख रोजगार, 48 औद्योगिक पार्कों के साथ इंदौर बनेगा सेंट्रल इंडिया का ग्रोथ हब- CM डॉ यादव 

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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का शंखनाद: 6 लाख रोजगार, 48 औद्योगिक पार्कों के साथ इंदौर बनेगा सेंट्रल इंडिया का ग्रोथ हब- CM डॉ यादव 

 

वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट 

इंदौर। मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर ने रविवार को विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्राम नैनोद में बहुप्रतीक्षित इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया।

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करीब ₹2,360 करोड़ की लागत से विकसित होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल इंदौर और पीथमपुर के बीच औद्योगिक संपर्क को नई गति देगी, बल्कि इंदौर को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे आर्थिक और औद्योगिक महानगरों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करेगी।

इस अवसर पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भूमि देने वाले किसानों और भू-स्वामियों को विकसित भूखंडों के आवंटन पत्र भी वितरित किए।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि “इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा और इंदौर को सेंट्रल इंडिया का ग्रोथ हब बनाएगा।”

उन्होंने कहा कि इस परियोजना में किसानों की भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसानों को चार गुना मुआवजा और 60 प्रतिशत विकसित भूमि लौटाई जाएगी। इससे लगभग 17 गांवों के किसानों के जीवन में आर्थिक परिवर्तन आएगा।

*20.28 किलोमीटर का कॉरिडोर, 1316 हेक्टेयर में विकास* 

इंदौर एयरपोर्ट के समीप स्थित सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से जोड़ने वाला यह कॉरिडोर प्रथम चरण में 20.28 किलोमीटर लंबा होगा और लगभग 1,316 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा भविष्य के विस्तार के लिए पर्याप्त बफर जोन विकसित किए जाएंगे।

यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे-47 और नेशनल हाईवे-52 को सीधे जोड़ेगा, जिससे औद्योगिक परिवहन की गति बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

*6 लाख रोजगार, 48 नए औद्योगिक पार्क* 

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह परियोजना इंदौर-पीथमपुर मेट्रोपॉलिटन रीजन की आधारशिला है।

उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर के आसपास लगभग 48 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इनमें आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन इंडस्ट्री, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और नॉलेज-बेस्ड सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकारी अनुमान के अनुसार इस परियोजना से करीब 6 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

*DMIC और सुपर कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव* 

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसका दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC), एबी रोड, सुपर कॉरिडोर, इंदौर एयरपोर्ट और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से रणनीतिक जुड़ाव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कनेक्टिविटी इंदौर को पश्चिम भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करेगी।

*इंदौर की विकास रफ्तार को मिलेगा नया इंजन* 

पहले से ही स्वच्छता, स्टार्टअप संस्कृति, आईटी निवेश और शहरी अधोसंरचना के क्षेत्र में देशभर में पहचान बना चुका इंदौर अब औद्योगिक विस्तार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

वर्तमान में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में 1500 से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ संचालित हैं और इसे मध्यप्रदेश का “डेट्रॉइट” कहा जाता है। इंदौर महानगर क्षेत्र की आबादी 40 लाख के करीब पहुंच चुकी है और शहर लगातार राष्ट्रीय निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। ऐसे में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को राज्य की औद्योगिक क्रांति का अगला अध्याय माना जा रहा है।

*इंदौर के भविष्य का ब्लूप्रिंट* 

विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल एक सड़क या औद्योगिक मार्ग नहीं, बल्कि इंदौर के भविष्य का ब्लूप्रिंट है।

यह कॉरिडोर इंदौर को सिर्फ मध्यप्रदेश का आर्थिक केंद्र नहीं, बल्कि आने वाले दशक में भारत के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले स्मार्ट इंडस्ट्रियल महानगरों में शामिल करने की क्षमता रखता है।