ट्रंप की ये जिद पड़ रही अमेरिका पर भारी, कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 50 हजार के पार

ट्रंप की ये जिद पड़ रही अमेरिका पर भारी, कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 50 हजार के पार

मीडियावाला.इन।

अब दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका पर कोरोना कहर बनकर टूट रहा है.

नई दिल्ली: पिछले महीने तक चीन का वुहान कोरोना का सबसे बड़ा केंद्र था. इस महीने यूरोपीय देश इटली  कोरोना का सेंटर बन गया. अब दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका पर कोरोना कहर बनकर टूट रहा है. अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 50 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है. एक दिन के अंदर ही वहां 10 हजार से ज्यादा मरीज सामने आए हैं. एक ओर भारत ने जहां 500 कोरोना संक्रमित मरीजों पर ही पूरे देश में 21 दिन के लिए लॉकडाउन कर दिया है, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप  55 हजार मरीजों के बाद भी अपने देश को बंद करने को तैयार नहीं है. ट्रंप की गलती से न्यूयॉर्क कहीं इटली तो न बन जाएगा.

500 कोरोना संक्रमित मरीजों पर भारत 21 दिनों के लिए लॉकडाउन
मंगलवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान कर रहे थे, उसी दिन अमेरिका में अचानक से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 10 हजार बढ़ गई. अमेरिका में एक दिन के अंदर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में ये सबसे बड़ा इजाफा है.

55 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या के साथ अमेरिका दुनिया में तीसरे नंबर पर आ चुका है. मंगलवार को अमेरिका में 10 हजार नए कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ गए. एक दिन में अमेरिका में कोरोना वायरस से डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई. कोरोना वायरस का अमेरिका पर ये सबसे बड़ा अटैक है. दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क गंभीर खतरे में है. कोरोना से खतरे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अमेरिका को आगाह किया है.

WHO ने कहा है कि अमेरिका कोरोना वायरस का नया केंद्र बन रहा है. WHO के खतरे के बावजूद अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप को उम्मीद है कि वो इस गंभीर खतरे से बेहद आसानी से निपट लेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने ऐलान किया है कि वो पूरे अमेरिका को लॉकडाउन नहीं करेंगे.

55 हजार मरीजों के बाद भी अमेरिका में नो लॉकडाउन
दरअसल डोनाल्ड ट्रंप को अपने देश की अर्थव्यवस्था की फ्रिक है. ट्रंप ने माना है कि अगर लॉकडाउन करेंगे तो कई छोटे व्यापारी और रोजगार तबाह जो जाएंगे, लेकिन डोनाल्डट्रंप को अमेरिका में कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार देखनी चाहिए, जिससे कोरोना के गंभीर खतरे को ट्रंप समझ सकें. 20 जनवरी को अमेरिका में कोरोना वायरस का पहला केस सामने आया था. 45 जिन बाद 4 मार्च को अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 100 पहुंच गए. 10 दिन बाद 13 मार्च को अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1000 पहुंच गई. 7 दिन बाद 19 मार्च को अमेरिका में मरीजों की संख्या 10 गुना बढ़कर 10 हजार पहुंच गई. 6 दिन बाद 24 मार्च तक अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या ने 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया.

न्यूयॉर्क न बन जाए दूसरा वुहान?
अमेरिका के सबसे बड़े शहरों में से एक न्यूयॉर्क है. न्यूयॉर्क अमेरिका की आर्थिक राजधानी भी है, लेकिन अमेरिका में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा केंद्र न्यूयॉर्क ही बनता जा रहा है. अकेले न्यूयॉर्क में 25 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हैं, जबकि 210 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. न्यूयॉर्क में अगर कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा और बढ़ा तो अमेरिका की इकोनॉमी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. ट्रंप की जिद है कि वो अमेरिका में लॉकडाउन नहीं करेंगे लेकिन सवाल है कि क्या अमेरिका की 33 करोड़ आबादी की जान खतरे में डालकर देश की इकोनॉमी बचाई जा सकती है.

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