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Jail Mornings Changed Through Yoga : रतलाम सर्किल जेल में योग से बदली सुबह, 605 बंदियों ने लिया 7 दिवसीय शिविर में हिस्सा!

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समापन, आर्ट ऑफ लिविंग और नेचुरोपैथी प्रशिक्षकों ने कराया योगाभ्यास!

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Jail Mornings Changed Through Yoga : रतलाम सर्किल जेल में योग से बदली सुबह, 605 बंदियों ने लिया 7 दिवसीय शिविर में हिस्सा!

Ratlam : 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर रतलाम की सर्किल जेल में आज एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जेल मुख्यालय भोपाल, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रतलाम के संयुक्त सहयोग से चल रहें सात दिवसीय योग शिविर का समापन शनिवार को हुआ।इस साल योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखी गई है, जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आरोग्य के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है। केंद्र का मुख्य आयोजन इस बार कोलकाता में हो रहा है, और उसी भावना के साथ रतलाम जेल में भी बंदियों को स्वस्थ जीवन की राह दिखाई गई। बता दें कि 15 से 21 जून तक, सर्किल जेल परिसर में योग शिविर आयोजित किया गया था। 21 जून को न्यायाधीश श्रीमती रवीना चौधरी, JMFC रतलाम और सुश्री वैशाली चौहान, JMFC रतलाम, आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से अशोक कुमार साल्वी, इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन से डॉ. रामेन्द्र गुप्ता और अनिल गोयल के सानिध्य में 605 बंदियों ने पूरे सप्ताह योगाभ्यास किया। साथ में जेल अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल रहें।

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शिविर में हर दिन सुबह प्राणायाम, सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार और ध्यान के सत्र आयोजित हुए। अंतिम दिन सामूहिक योग प्रदर्शन के बाद सभी प्रतिभागियों को योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदोरिया ने कहा कि “योग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का संपूर्ण संगम है। यह शरीर में लचीलापन और ताकत बढ़ाता है, तनाव व चिंता को दूर कर मानसिक शांति देता है, और श्वसन तथा हृदय प्रणाली को मजबूत बनाता है।”उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ सजा नहीं, सुधार है। योगाभ्यास से बंदियों में सकारात्मक सोच, अनुशासन और तनावमुक्त जीवन की समझ विकसित हो रही है।

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कौन-कौन रहा मौजूद!

समारोह में उप जेल अधीक्षक ब्रजेश मकवाने, जेल चिकित्सक डॉ. मोहित राठौर, सहायक जेल अधीक्षक सुरेन्द्र सिंह राणावत सहित पूरा जेल स्टाफ मौजूद रहा। सभी ने बंदियों के साथ मैट पर बैठकर योग किया, जिससे माहौल में बराबरी और अपनापन दिखा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की और से बताया गया कि इस तरह के शिविर बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन और सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। जेल में 7 दिनों तक चले इस शिविर को अधिकारियों ने “अनुशासन के साथ उत्साह” का उदाहरण बताया। बंदियों ने बताया कि नींद बेहतर हुई है, गुस्सा कम हुआ है और दिन की शुरुआत में ऊर्जा महसूस होती है।

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क्या कहते हैं जेल अधीक्षक!

आगे भी हर महीने एक योग सत्र और प्राणायाम क्लास नियमित रूप से चलाई जाएगी ताकि योग केवल एक दिन का आयोजन न रहकर जीवनशैली बने!

लक्ष्मण सिंह भदोरिया!