
बारिश के पहले अमृत सरोवर बनाने में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर को पछाड़ खंडवा-खरगौन अव्वल
भोपाल ; मध्यप्रदेश में बारिश से पहले अमृत सरोवर बनाने का काम जोरो पर है। राजधानी भोपाल और इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे महानगरों को पछाड़ कर अमृत सरोवर बनाने के मामले में खंडवा जिला पूरे प्रदेश में अव्वल है। दूसरे स्थान पर खरगौन जिला है। खंडवा जिला 9 हजार 131 अमृत सरोवरों का काम शुरु कर 7.50 स्कोर के साथ पूरे प्रदेश में अमृत सरोवर बनाने के मामले में अव्वल है। खरगौन जिला 7 हजार 161 अमृत सरोवर बनाने शुरु कर 7.38 के स्कोर के साथ प्रदूश में दूसरे नंबर पर है।
प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अमृत सरोवरों के निर्माण में तेईसवे स्थान पर है। इंदौर में 1615 अमृत सरोवर बनाने शुरु किए गए है और इंदौर का स्कोर 5.93 है। भोपाल जिला इस मामले मे पैतीसवे स्थान पर है। यहां 2 हजार 157 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। भोपाल को का स्कोर 5.60 है।ग्वालियर 2 हजार 174 अमृत सरोवर बनाना शुरु कर 5.64 के स्कोर के साथ तैतीसवे स्थान पर है। संस्कारधानी जबलपुर अमृत सरोवर बनाने के मामले में 27 वे स्थान पर है। यहां 1 हजार 961 अमृत सरोवर बनाने शुरु किए गए है और जबलपुर को 5झ्.79 स्कोर मिले है। अमृत सरोवर बनाने के मामले में टीकमगढ़ जिला सबसे पीछे है यहां 4 हजार 643 अमृत सरोवर बनाने शुरु किए गए है और इसका स्कोर 5.16 है। जो जिले सबसे पीछे है उनमें सीहोर, शाजापुर, नरसिंहपुर और अनूपपुर जिले शामिल है।
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पूरे प्रदेश में अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश की जल संरचनाओं के पुनरुद्धार और नवीन जल स्रोतों के निर्माण का काम किया जा रहा है। इस अभियान में न केवल लुप्त हो रही जल संरचनाओं को जीवनदान मिल रहा है, बल्कि वैज्ञानिक पद्धतियों से वर्षा जल के संग्रहण की क्षमता में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 77 हजार 121 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के समन्वय से संचालित इस अभियान के लिए पूरे प्रदेश में कुल 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए 6,201.81 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में अब तक 4,443.85 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ‘खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में’ रोकने की अवधारणा पर है, ताकि आगामी मानसून में वर्षा की हर बूंद का संचयन सुनिश्चित किया जा सके।
अभियान के की सूक्ष्म स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। सूखे कुओं का पुनर्भरण में प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है, जहाँ 88,123 से अधिक कुओं को रिचार्ज करने का कार्य पूर्ण हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पशुपालन की सुविधा के लिए 53,568 खेत तालाबों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। जल संरक्षण और पुनर्भरण की अन्य विधियों के तहत 27,332 कार्य संपन्न हुए हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण को मजबूती देने के लिए वृक्षारोपण और स्कूलों में जल टैंकों की सफाई जैसे रचनात्मक कार्यों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है।




