उत्तराखंड में धारचूला के पास गरबाधार में लैंडस्लाइड

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उत्तराखंड में धारचूला के पास गरबाधार में लैंडस्लाइड

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारत चीन बॉर्डर पर दरका पहाड़, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के भारत चीन सीमा से खौफनाक वीडियो सामने आया है. यहां तवाघाट-लिपुलेख राष्ट्रीय राजमार्ग पर गरबाधार में भयानक भूस्खलन हो गया. भूस्खलन होने से चट्टान नीचे खिसक गई और पत्थरों की बरसात होने लगी. जिससे धूल का गुबार उठ गया. धूल का गुबार उठने से चारों ओर अंधेरा छा गया. वहीं, चट्टान के दरकते ही मौके पर मौजूद कर्मचारियों और श्रमिकों में अफरा तफरी मच गई. सभी लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागे. हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया. वीडियो में घटनास्थल के पास पॉकलैंड मशीन भी नजर आ रही है. धारचूला के एसडीएम के मुताबिक, आदि कैलाश यात्रा के मद्देनजर सड़क पर काम चल रहा है. ऐसे में तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए सड़क को 18 मई तक खोल दिया जाएगा. बता दें कि तवाघाट-लिपुलेख हाईवे भारत चीन सीमा समेत सीमांत गांवों को जोड़ता है.

thumbnail 4 2Pithoragarh DharchulaTawaghat Lipulekh National Highway on the mountain crack : पिथौरागढ़ के धारचूला- तवाघाट- लिपुलेख नेशनल हाईवे पर पहाड़ दरका

घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। गरबाधार पिथौरागढ़ जिले में धारचूला को चीन सीमा से जोड़ने वाली सड़क पर है। खबर है कि इस सड़क के बंद होने के कारण आदि कैलाश यात्रा पर गया एक यात्री दल फंस गया है। स्थानीय प्रशासन लैंडस्लाइड के कारण अलर्ट मोड पर है।

पिछले चार दिनों से गरबाधार में सड़क पर लैंडस्लाइड होने के कारण बंद थी, सीमा सड़क संगठन इसे खोलने की कोशिश कर रहा था। सोमवार को सड़क खोल दी गई थी, लेकिन थोड़ी देर बाद ही यहां पर भयंकर लैंडस्लाइड हो गया।

सोमवार को कुछ समय के लिए सड़क खुलने पर आदि कैलाश के तीसरे और चौथे दल के यात्री और अन्य वाहनों की आवाजाही शुरू होने वाली थी। लेकिन अचानक पहाड़ी दरक गई। लैंडस्लाइड में पहाड़ के साथ-साथ वहां बनी सड़क भी गिर गई। बड़ी मात्रा में मलबा आने से तवाघाट-लिपुलेख मोटर मार्ग बंद हो गया। राज्य में हर साल भारी बारिश होती है और ऐसी घटनाएं एक आम घटना है।

सभी यात्रियों को रोका
जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित के हवाले से बताया गया है कि कि हाईवे पार करने वाले सभी यात्रियों को रोक दिया गया और सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। अधिकारी ने कहा कि सड़कों से मलबा साफ होने के बाद राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो जाएगी।

42 यात्रियों को बचाया था
राज्य आपदा एजेंसी ने पहले 42 आदि कैलाश तीर्थयात्रियों को बचाया था, जो भारी वर्षा के कारण सड़क बंद होने के बाद तीर्थयात्रा से वापस लौटते समय तवाघाट के पास फंसे हुए थे। एक अधिकारी ने कहा कि तीर्थयात्री मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली के थे।

व्यास घाटी के 50 ग्रामीणों को भी भारी वर्षा के कारण गुंजी में चार दिनों तक फंसे रहने के बाद हेलिकॉप्टर्स की मदद से बचाया गया।