मां से बिछड़ी तेंदुआ शावक की मौत, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि के बाद वन विभाग सतर्क

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मां से बिछड़ी तेंदुआ शावक की मौत, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि के बाद वन विभाग सतर्क

बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से संक्रमित दो माह की मादा तेंदुआ शावक की मंगलवार को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। घटना के बाद वन विभाग ने वन्यजीवों में संक्रमण की रोकथाम, निगरानी और शीघ्र पहचान को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

बड़वानी के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) आशीष बंसोड़ ने बताया कि शावक की मौत महू स्थित वेटरिनरी कॉलेज में उपचार के दौरान हुई। पोस्टमार्टम के बाद निर्धारित वन्यजीव प्रोटोकॉल के अनुसार मंगलवार शाम उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि 8 जून को राजपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोलाटा के एक खेत से इस मादा शावक का रेस्क्यू किया गया था। शावक को उसकी मां से मिलाने के उद्देश्य से लगातार तीन रात तक उसी क्षेत्र में रखा गया, लेकिन मादा तेंदुआ वापस नहीं लौटी।

इस दौरान शावक में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसके बाद पुनर्मिलन की प्रक्रिया रोककर उसका उपचार शुरू किया गया। हालत बिगड़ने पर रविवार रात उसे महू स्थित वेटरिनरी कॉलेज भेजा गया, जहां मंगलवार को उसकी मृत्यु हो गई।

डीएफओ ने बताया कि वन विभाग की टीमें थर्मल ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से शावक की मां तथा उसके दो अन्य शावकों की तलाश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी की पट्टी और आसपास के कृषि क्षेत्र ऐसा इलाका नहीं है जहां तेंदुओं का पता लगाना अत्यधिक कठिन हो, लेकिन न तो उनके शिकार करने की कोई सूचना मिली है और न ही ग्रामीणों ने उन्हें देखा है। इससे प्रतीत होता है कि मादा तेंदुआ अपने अन्य शावकों के साथ काफी दूर निकल गई है।

बंसोड़ ने कहा कि मादा तेंदुआ व अन्य दोनों शावकों के सीडीवी से संक्रमित होने की संभावना कम दिखाई देती है क्योंकि वे क्षेत्र में नजर नहीं आए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि मृत शावक किसी संक्रमित जानवर के संपर्क में आ गया होगा, जिससे उसमें संक्रमण फैल गया। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है बीमारी के लक्षण दिखने के बाद मादा तेंदुआ ने उसे छोड़ दिया हो अथवा वह परिवार से बिछड़ गया हो।

शावक की मौत के बाद वन विभाग ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा मध्यप्रदेश वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एडवाइजरी जारी की है। इसमें पशु चिकित्सा विभाग को सीडीवी एवं अन्य संक्रामक रोगों की निगरानी बढ़ाने, शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने तथा आवश्यक उपचारात्मक एवं रोकथाम संबंधी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों में पाई जाती है, लेकिन तेंदुए, बाघ और अन्य मांसाहारी वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। वन विभाग ने संभावित संक्रमण को रोकने के लिए वन एवं पशु चिकित्सा विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया है।