
कुएं में फंसा तेंदुआ, साथ में ‘मेहमान’ बछड़ा … और फिर हुआ दोस्ती वाला रेस्क्यू! वन विभाग की सूझबूझ से दोनों की सुरक्षित जान बची
तेंदुए को गांव से दूर जंगल की राह दिखाकर टाला गया संभावित खतरा
वरिष्ठ पत्रकार गणेश पांडे की रिपोर्ट
भोपाल। जंगल महकमे में वन्य प्राणी और पालतू जानवर के बीच अनोखी दोस्ती की झलक दिखलाई दिया। कुएं में गिरे एक तेंदुए और बछड़े के बीच दोस्ती नजर आई। यह नजारा वन विभाग की टीम को रेस्क्यू के दौरान दिखाई दिया।
दक्षिण पन्ना वनमण्डल के अंतर्गत रैपुरा रेंज की अलौनी बीट के पास ग्राम मक्केपाला में एक तेंदुए के रेस्क्यू का कार्य वन विभाग द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
इस रेस्क्यू की एक विशेष बात यह भी रही कि तेंदुए के साथ एक बछड़ा भी कुएं में गिर गया था। वन विभाग ने न केवल तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकलने में सहायता की, बल्कि बछड़े को भी सकुशल बचा लिया। इस प्रकार दोनों ही जीवों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित किया गया, जो वन्यजीव प्रबंधन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रेस्क्यू के दौरान एक रोचक व्यवहार भी देखने को मिला, जिसमें बछड़ा समय-समय पर तेंदुए के पास जाकर उसे चाटता एवं उसके साथ सहज रूप से रहता देखा गया। आश्चर्यजनक रूप से तेंदुए ने भी बछड़े को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और पूरी अवधि में आक्रामक व्यवहार नहीं दिखाया। यह घटना वन्यजीवों के व्यवहार के एक अनोखे पक्ष को दर्शाती है, जहां तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी शिकारी एवं शिकार के बीच असामान्य सह-अस्तित्व देखने को मिला।
रेस्क्यू में सूझबूझ एवं तकनीकी का उपयोग
रेस्क्यू के दौरान वन विभाग ने अत्यंत सूझबूझ एवं तकनीकी समझ का परिचय देते हुए लकड़ी के लट्ठों को आपस में बांधकर तथा उन पर रस्सी लपेटकर एक मजबूत अस्थायी “सीढ़ी” तैयार की। इसे इस प्रकार स्थापित किया गया कि तेंदुआ सुरक्षित रूप से बाहर निकल सके। साथ ही, पूरे ऑपरेशन के दौरान ऐसी रणनीति अपनाई गई कि तेंदुआ बाहर निकलने के बाद गांव की ओर न जाकर सीधे नजदीकी वन क्षेत्र की ओर अग्रसर हो। विभाग की इस रणनीति के परिणामस्वरूप तेंदुआ सुरक्षित रूप से बाहर निकलकर जंगल की दिशा में चला गया, जिससे किसी भी प्रकार के मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
इनका रेस्क्यू में रहा योगदान
इस अभियान में नवागत उपवनमण्डल अधिकारी सुश्री रचना शर्मा, प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक, अंकुर गुप्ता, रैपुरा रेंज अधिकारी विवेक जैन एवं रैपुरा वन परिक्षेत्र के समस्त वन अमले की सराहनीय भूमिका रही। वनपाल श्रीमती रंजना नागर, रामप्रताप गौतम तथा वनरक्षक बद्री प्रसाद यादव, अरविंद विश्वकर्मा, श्री धीरेन्द्र सिंह, रजनीश चौरसिया, सतीश द्विवेदी, अरविंद सिंह, प्रकाश प्रजापति, कमल प्यासी, सुमंत सिंह, लक्ष्मीकांत तिवारी एवं सरपंच ग्राम पंचायत फतेहपुर नित्यपाल सिंह एवं सहायक सचिव जगदीश सिंह का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।





