WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home मीडियावाला ख़ास

1980 में स्कूली छात्र थे मोहन यादव, तब से सिंहस्थ में सेवा कार्य कर रहे, IAS-IPS की नजर में सिंहस्थ का हमसे ज्यादा अनुभव तो सीएम को है!

WhatsApp Image 2026 07 01 At 21.19.03

1980 में स्कूली छात्र थे मोहन यादव, तब से सिंहस्थ में सेवा कार्य कर रहे, IAS-IPS की नजर में सिंहस्थ का हमसे ज्यादा अनुभव तो सीएम को है!

कीर्ति राणा

Ujjain: हर 12 साल में होने वाले सिंहस्थ और डॉ मोहन यादव के साथ आधी सदी से सुखद संयोग भी जुड़ा हुआ है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ की एक माह की अवधि में आने वाले 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, संतों-महंतों के साथ ही विश्व के 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री के रूप में वे सजग हैं। 1965 में जन्मे मोहन यादव ने भी कहां कल्पना की थी कि 1980 के सिंहस्थ में स्काउट गाइड के एक साधारण से स्काउट के रूप में लाखों श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहे थे और बाबा महाकाल की ऐसी कृपा हो जाएगी कि वे राज्य के मुखिया के रूप में सिंहस्थ-28 की तैयारियों को अंजाम देने का आशीर्वाद मिल जाएगा।

शायद ही कोई महीना ऐसा जाता हो जिसमें पूर्व में सम्पन्न हुए सिंहस्थ के अधिकारियों के साथ नॉलेज शेयरिंग के लिहाज से सिंहस्थ मेला अधिकारी, कमिश्नर, वर्तमान कलेक्टर, एसपी, आयजी सहित अन्य विभागीय अधिकारियों की संयुक्त बैठक ना होती हो। ‘सिंहस्थ 2016 के अनुभव और 2028 के संकल्प’ को लेकर हाल ही में सम्पन्न हुई कार्यशाला में पुराने और वर्तमान अधिकारी जुटे थे। इस कार्यशाला में एडीजी राकेश गुप्ता सहित पूर्व कमिश्नर, कलेक्टर ने भी स्वीकारा कि सिंहस्थ मेला को लेकर जितना अनुभव डॉ मोहन यादव को है उतना तो हमें भी नहीं है। सतत तीन बार (2013, 2018 और 2023) विधायक रहे मोहन यादव के हाथ में अब प्रदेश की कमान है।

सिंहस्थ 1980 में स्काउट गाइड द्वारा किए गए सेवा कार्यों में स्काउट के रूप में उज्जैन शहर के स्कूली छात्र के रूप में मोहन यादव ने सेवाकार्य किए थे। तब मप्र में भाजपा की सरकार थी और मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सखलेचा के नेतृत्व में सिंहस्थ सम्पन्न हुआ था। तब यादव स्काउट के रूप में मेला क्षेत्र में सेवा दे रहे थे।

सिंहस्थ 1992 में मोहन यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और सिंहस्थ समिति के सदस्य थे। तब विद्यार्थी परिषद ने सिंहस्थ में आए श्रद्धालुओं की सेवा की थी।
सिंहस्थ 2004 में उमा भारती मुख्यमंत्री थीं। मेला प्रभारी मंत्री का दायित्व कैलाश विजयवर्गीय को दिया था लेकिन उज्जैन निवासी और संतों से लेकर सामाजिक-स्वयंसेवी संगठनों से जीवंत संपर्क के चलते केंद्रीय सिंहस्थ समिति के सदस्य यादव उनके लिए मुख्य सहयोगी रहे थे। 2004 से 2010 तक वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और 2010 से 13 तक मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम अध्यक्ष रहे।

2016 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और मेला प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह थे। सिंहस्थ समिति सदस्य-विधायक के रूप में के सुझावों को सरकार ने गंभीरता से लिया था, बाद में यादव उच्च शिक्षा मंत्री (2023-26) रहे।

सन 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्ड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह एवं 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह बने। सन 1997 में भाजयुमो की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य, सन 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य, पर्यटन विकास निगम, यूडीए अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री रहते जो अनुभव मिला वह सीएम के रूप में सिंहस्थ-28 की चुनौतियों को आसान बना रहा है।

🔹46 साल पहले बैठक में जाने से रोका था!

1980 के सिंहस्थ से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी सुनाया मुख्यमंत्री यादव ने। तत्कालीन निगमायुक्त रामेश्वर गुप्ता के कार्यालय में सिंहस्थ संबंधी बैठक में शामिल होने के लिये यादव भी पहुंचे थे किंतु गेट पर खड़ा निगमकर्मी उन्हें चेहरे से पहचानता नहीं था, हाथ पकड़ कर रोक दिया। बैठक में शामिल होने आए हैं यह जानकारी दी और नाम बताया तो एक जैसे दो नाम होने से रोक दिया कि तुम वो नहीं हो वो तो ऊंचे-पूरे हैं। बाद में निगमायुक्त ने हस्तक्षेप किया तब बैठक में शामिल हो सके।