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‘वायरल पत्र’ से मचा सियासी भूचाल: कैलाश विजयवर्गीय ने किया इनकार, इंदौर की विकास राजनीति पर उठे सवाल

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‘वायरल पत्र’ से मचा सियासी भूचाल: कैलाश विजयवर्गीय ने किया इनकार, इंदौर की विकास राजनीति पर उठे सवाल

वरिष्ठ पत्रकार के. के. झा की रिपोर्ट

इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक कथित पत्र ने नई हलचल पैदा कर दी है। नगरीय प्रशासन मंत्री और इंदौर के वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के नाम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि स्वयं विजयवर्गीय ने ऐसे किसी पत्र के अस्तित्व से इनकार करते हुए इसे अपनी जानकारी से बाहर बताया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 20 जून दिनांकित इस कथित पत्र में इंदौर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर नाराजगी व्यक्त की गई है। इनमें इंदौर मास्टर प्लान में विलंब, उज्जैन–इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में इंदौर की भूमिका, एयरपोर्ट विस्तार, पीथमपुर की औद्योगिक सुविधाएं तथा सिंहस्थ से संबंधित परियोजनाओं में शहर की कथित अनदेखी जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख होने की बात कही जा रही है कि पिछले ढाई वर्षों में इंदौर को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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बुधवार को मीडिया से चर्चा के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है और जिन माध्यमों में यह खबर प्रकाशित हुई है, उनसे ही इसके स्रोत के बारे में पूछा जाना चाहिए।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय के संबंधों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे भाजपा की आंतरिक खींचतान का संकेत बताया है, जबकि भाजपा के कई नेता इसे अनावश्यक राजनीतिक व्याख्या करार दे रहे हैं।

उधर, इंदौर के नागरिकों के लिए मूल प्रश्न अभी भी वही है—शहर के लंबित विकास कार्यों को गति कब मिलेगी? मास्टर प्लान, एयरपोर्ट विस्तार, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और महानगरीय विकास की योजनाएं इंदौर की भविष्य की दिशा तय करेंगी। ऐसे में यह विवाद केवल एक पत्र तक सीमित रहेगा या विकास की राजनीति का नया अध्याय बनेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।