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MP Assembly Election: सिंधिया सहित कई दिग्गजों को मैदान में उतार सकती है भाजपा, तीसरी लिस्ट का इंतज़ार 

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MP Assembly Election: सिंधिया सहित कई दिग्गजों को मैदान में उतार सकती है भाजपा, तीसरी लिस्ट का इंतज़ार 

भोपाल: भाजपा उम्मीदवारों के ऐलान की दूसरी सूची के बाद सबसे ज्यादा पार्टी की राजनीति ग्वालियर-चंबल संभाग में ही खदबदा रही है। इस क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा टिकट दिए जाने के बाद अब यह अटकलें तेज हो चली है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को विधानसभा का चुनाव में उतार सकता है। इसके साथ चर्चाएं यह भी हैं कि वे अपनी बुआ की पारंपरिक और जीत के लिए आसान मानी जाने वाली सीट शिवपुरी से उतरेंगे या ग्वालियर में चुनौती बनी शहर की पूर्व सीट से उतरेंगे। वहीं इस क्षेत्र में पार्टी को क्षत्रिय और ब्राह्मणों को भी साधने के लिए उनके नेताओं को उम्मीदवार बनाना होगा।

ग्वालियर पूर्व की सीट से सतीश सिकरवार विधायक हैं। वर्ष 2018 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के टिकट पर मुन्नालाल गोयल चुनाव जीते थे, लेकिन गोयल ने कांग्रेस छोड़ दी और इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें सतीश सिकरवार को कांग्रेस ने टिकट दिया और सिकरवार यहां से चुनाव जीत गए। वे यहां से विधायक बने इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी शोभा सिकरवार को ग्वालियर महापौर का चुनाव भी जीताया। ग्वालियर महापौर पर 57 साल बाद कांग्रेस का कोई महापौर काबिज हुआ था। कभी भाजपा नेता रहे सतीश सिकरवार कांग्रेस में शामिल होने के बाद इस जिले में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती के रूप में उभरे हैं।

वहीं शिवपुरी की विधायक एवं मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया अपने संगठन को पत्र लिखकर चुनाव नहीं लड़ने का कह चुकी है। ऐसे में अब उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। इस सीट पर यशोधरा राजे सिंधिया चार चुनाव लड़ी और चारों चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। हालांकि वे बीच में लोकसभा में भी गई थी, उस वक्त हुए उपचुनाव में यहां से कांग्रेस जीती थी, लेकिन बाद में भाजपा ने इस सीट पर फिर कब्जा कर लिया था। यशोधरा राजे यहां से 1998, 2003, 2013 और 2018 में विधायक चुनी गई थी। इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए यह सीट आसान मानी जा रही है।

पवैया को भी मिल सकता है टिकट

पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को भी इस बार टिकट मिल सकता है। हालांकि वे चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं , लेकिन जिस तरह से पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व निर्णय ले रहा है, उसे देखकर यही लगता है कि पार्टी इस बार पवैया को मैदान में उतार सकती है। पवैया को टिकट दिए जाने के लेकर भी अटकलें तेज हैं, साथ ही यहां का एक चुनावी समीकरण भी उनकी उम्मीदवारी के साथ चल रहा है। जिसमें यह माना जा रहा है कि ग्वालियर जिले में दो ही क्षत्रियों को टिकट दिया जाएगा। जबकि उम्मीदवारों की दूसरी सूची में पार्टी ने भीतरवार से मोहन सिंह राठौर को टिकट दिया है। इसलिए अब एक ही क्षत्रियों को इस जिले से टिकट मिल सकता है। ऐसे में यह अटकलें तेज हैं कि सिंधिया के करीबी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का यदि टिकट कटा तो ग्वालियर सीट से ही जयभान सिंह पवैया को टिकट मिलेगा।

*अनूप मिश्रा भी हो सकते हैं उम्मीदवार*

ग्वालियर क्षेत्र में ब्राह्मणों को साधाने के लिए भाजपा यहां से एक ब्राह्मण को भी टिकट दे सकती है। पिछला चुनाव अनूप मिश्रा जिले की भितरवार सीट से लड़े थे, लेकिन चुनाव हार गए थे। जबकि ग्वालियर दक्षिण सीट से कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को टिकट देकर ब्राह्मण कार्ड खेला था। इस बार यह माना जा रहा है कि अनूप मिश्रा को फिर से टिकट दिया जा सकता है और इस बार टिकट ग्वालियर दक्षिण सीट से उन्हें मिल सकता है।

*ये सांसद भी लड़ सकते हैं विधानसभा चुनाव*

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते सहित रीति पाठक, गणेश सिंह, राकेश सिंह, और राव उदय प्रताप सिंह सात सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने के बाद यह अटकलें तेज हैं कि भाजपा अपने और सांसदों को भी विधानसभा के चुनाव में उतार सकती है। जिसमें गुना-शिवपुरी लोकसभा के सांसद केपी यादव का नाम भी शामिल हैं। यादव विधानसभा का पिछला चुनाव मुंगावली से लड़े थे, लेकिन हार गए थे। इसके बाद उन्हें लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए। अब फिर से यादव को मुंगावली सीट से लड़वाया जा सकता है। हालांकि इस सीट पर अभी भाजपा के ही बृजेंद्र सिंह यादव हैं, जो मंत्री भी हैं। वहीं जीएस डामौर को जोबट, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह को बांधवगढ़, टीकमगढ़ सांसद वीरेंद्र खटीक को चंदला, इंदौर सांसद शंकर ललवानी इंदौर 5, खरगौन सांसद गजेंद्र पटेल को सेंधवा और राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी को भी विधानसभा के चुनाव में उतारा जा सकता है।