
भागवत की भावना से प्रेरित नायडू फॉर्मूला… मोहन यादव भी हिन्दू आबादी के लिए कर सकते हैं लागू…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
आंध्र प्रदेश में सीएम चंद्रबाबू नायडू ने अब अधिक बच्चे पैदा करने पर कैश इंसेंटिव देने का ऐलान कर दिया है। अब राज्य में जो परिवार तीसरा बच्चा पैदा करेगा, उसे सरकार 30 हजार रुपये देगी और अगर चौथा बच्चा हुआ तो 40 हजार रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने ये ऐलान श्रीकाकुलम के नरसन्नापेटा में एक सभा के दौरान दिया। इससे पहले मार्च, 2025 में नायडू ने विधानसभा में बताया था कि सरकार दूसरा बच्चा पैदा करने वाले जोड़ों को 25 हजार रुपये देने के बारे में सोच रही है। यानी पहले सिर्फ दूसरे बच्चे पर पैसे देने की बात थी, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने फैसला बदला और अब ये सुविधा तीसरे और चौथे बच्चे पर भी दी जाएगी।
मुख्य सवाल इस बात का है कि पहले चंद्रबाबू नायडू दूसरे बच्चे पर इंसेंटिव देने का विचार कर रहे थे। फिर अचानक बात चौथे बच्चे तक कैसे पहुंच गई। एनडीए गठबंधन में बंधे नायडू को कहीं आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के हिन्दू आबादी बढ़ाने वाले विचार ने तो प्रभावित नहीं किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर संगठन विस्तार और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के संकल्प के साथ देशभर में अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में नागपुर में 25 अप्रैल 2026 को आयोजित ‘भारतदुर्गा शक्तिस्थल’ और ‘धर्म सभा’ कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया था। कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे चार बच्चे पैदा करने का संकल्प लें और उनमें से एक को संघ के लिए समर्पित करें। उनके इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने स्वयंसेवकों के सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि आपदा के समय संघ के कार्यकर्ता सबसे पहले राहत और बचाव कार्यों में पहुंचते हैं।संघ प्रमुख ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि भले ही अभी कुछ लोगों को संदेह हो, लेकिन भारत के ‘विश्वगुरु’ बनने का लक्ष्य निश्चित है। भागवत ने राम मंदिर अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय इसके निर्माण को लेकर भी संशय था, लेकिन अंततः सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर का निर्माण संभव हुआ।
वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित एक समारोह में हिंदू समाज से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक बच्चे को संघ को समर्पित करने की अपील की है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं से आबादी बढ़ाने और चार बच्चे पैदा करने की अपील कर चुके हैं। अपने भाषणों में, भागवत अक्सर जनसंख्या विज्ञान का हवाला देते हैं और हिंदू परिवारों को कम से कम तीन या चार बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं। इस तरह के बयानों का उद्देश्य हिंदू समाज को सशक्त और संगठित करना बताया जाता है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना भी होती है। आलोचकों का मानना है कि महंगाई के दौर में इतने बच्चों की परवरिश करना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल है और यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। हाल ही में, इस तरह के विचारों को अन्य धार्मिक नेताओं, जैसे बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का भी समर्थन मिला है, जिन्होंने हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने की अपील की है।
तो वास्तव में आंध्र प्रदेश में अधिक बच्चे पैदा करने का नायडू फॉर्मूला कहीं न कहीं संघ प्रमुख भागवत की भावनाओं से प्रेरित है। आंध्र सरकार के फैसले के पीछे सबसे मुख्य वजह राज्य का गिरता हुआ टोटल फर्टिलिटी रेट बताया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश का टीएफआर इस समय घटकर करीब 1.50 पर पहुंच गया है। आबादी को स्थिर रखने के लिए रिप्लेसमेंट लेवल टीएफआर का 2.1 होना बहुत जरूरी माना जाता है। इसका मतलब है कि राज्य में आबादी अब तेजी से घटने की कगार पर है।
खैर ऐसी वजहों को नायडू फॉर्मूला में सहायक कारणों के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन वास्तव में यह भागवत की हिन्दू आबादी बढ़ाने की सोच पर केंद्रित है। और निकट भविष्य में भाजपा शासित राज्यों में खुले तौर पर हिंदू आबादी बढ़ाने के लिए इस तरह के इंसेंटिव की घोषणा, उन राज्यों के मुख्यमंत्री कर सकते हैं। और हो सकता है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस तरह की घोषणा करने वाले भाजपा शासित राज्य के पहले मुख्यमंत्री बन जाएं। इसका आधार भी यही रहेगा कि मुस्लिम आबादी बहुत तेज गति से बढ़ रही है और इसके चलते मुस्लिमों को आबादी प्रोत्साहन के लिए किसी तरह के इंसेंटिव की जरूरत नहीं है। वहीं, हिंदू घरों में लोग एक या दो बच्चे तक सीमित हैं, जिसे संघ की दृष्टि में भविष्य के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। तो देखते हैं कि आगामी समय में कौन सा राज्य नायडू फार्मूला के आधार पर आबादी बढ़ाने के लिए इंसेंटिव की घोषणा करता है? भाजपा शासित राज्यों में सर्वप्रथम नायडू फार्मूला को अपने राज्य में लागू करने वाला मुख्यमंत्री आरएसएस प्रमुख डॉ. भागवत की व्यक्तिगत पसंद में प्राथमिकता पाने में सफल रहेगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





