WHO के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले पहले भारतीय बने डॉ हर्षवर्धन

WHO के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले पहले भारतीय बने डॉ हर्षवर्धन

मीडियावाला.इन।

नई दिल्ली टीम डिजिटल। शुक्रवार को डॉ हर्षवर्धन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष बनकर इतिहास रच दिया। इस कुर्सी तक पहुंचने वाले वो पहले हिंदुस्तानी बन गए हैं। पूरी दुनिया में कोरोना से लड़ने में सबसे आगे बने हुए भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष की गद्दी संभाली। एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष डॉ हर्षवर्धन से पहले जापान के डॉक्टर हिरोकी नाकातानी ये पद देख रहे थे। अब डॉ हर्षवर्धन 34 सदस्यीय एक्जीक्यूटिव बोर्ड को हेड करेंगे।

ANI@ANI

Delhi: Union Health Minister Dr Harsh Vardhan takes charge as the chairman of the World Health Organisation (WHO) Executive Board

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194 देशों ने हिंदुस्तान के फेवर में किए हस्ताक्षर
डॉ हर्षवर्धन के चुने जाने के प्रस्ताव पर विश्व स्वास्थ्य एसेंबली के 194 देशों ने हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि पिछले साल ही एशिया ग्रुप के देशों ने ये फैसला लिया था कि इस साल बोर्ड का चेयरमैन भारत से होगा। डॉ हर्षवर्धन अगले तीन सालों तक ये पद संभालेंगे। हालांकि इस फैसले से भारत में डॉ हर्षवर्धन की जिम्मेदारियों में कोई अंतर नहीं आएगा।

साल में दो बार बैठकों की अध्यक्षता करने जाएंगे विश्व स्वास्थ्य संगठन
एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष का पद पूर्णकालिक पद नहीं होगा और उन्हें सिर्फ बैठकों में हिस्सा लेने के लिए वहां मौजूद होना होगा। लिहाजा बाकी वक्त वो देश के स्वास्थ्य संबंधी मामलों को देख पाएंगे। बोर्ड की बैठक हर साल सिर्फ दो बार होती है जो अमूमन जनवरी और मई में होती है। यहां पर केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य एसेंबली के फैसले लेने और पॉलिसी बनाने का जिम्मा संभालेंगे।

WHO की इमेज बचाना होगी मुख्य चुनौती
चीन की लैब में पैदा होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की गलत नीतियों के कारण पूरी दुनिया में कोरोना जानलेवा रोग बन चुका है। ऐसे में WHO की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। लिहाजा इस कुर्सी को संभालने के साथ ही डॉ हर्षवर्धन पर काफी जिम्मेदारी भी आ गई है। जिसमें संगठन की साख को बचाना भी शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही संगठन की एड रोकने का ऐलान कर चुके हैं। लिहाजा दुनिया का विश्वास दोबारा WHO में बहाल करवा पाना भी उनकी बड़ी चुनौती रहने वाली है।

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