
Navya Mallik MDMA Drugs Case: जांच के लिए SIT गठित, 5 अफसरों की टीम करेगी हाईप्रोफाइल पार्टियों से लेकर मनी ट्रेल तक की पड़ताल
रायपुर Navya Mallik MDMA Drugs Case की जांच के लिए SIT गठित की गई है। इस SIT में 5 अफसरों की टीम हाईप्रोफाइल पार्टियों से लेकर मनी ट्रेल तक की पड़ताल करेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चर्चित Navya Mallik MDMA Drugs Case की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी गई है। इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच के लिए एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), क्राइम ब्रांच प्रभारी, गंज थाना प्रभारी सहित पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।
SIT अब ड्रग सिंडिकेट, सप्लाई नेटवर्क और पूरे आपराधिक तंत्र से जुड़े हर पहलुओं की गहन जांच करेगी।
यह पूरा मामला 23 अगस्त 2025 को सामने आया था, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक कार को रोककर कार्रवाई की थी। कार में सवार तीन आरोपियों हर्ष आहूजा (23 वर्ष) निवासी रायपुर, मोनू विश्नोई (29 वर्ष) निवासी हिसार (हरियाणा) और दीप धनोरिया (41 वर्ष) निवासी रायपुर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने इनके कब्जे से 27.58 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, सोनेट कार (सीजी 04 क्यूजे 5466), 85,300 रुपये नगद और 5 मोबाइल फोन बरामद किए थे। जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई थी। इसी आधार पर गंज थाने में धारा 21(सी), 29 नारकोटिक एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
इनसे पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने मुंबई से नव्या मलिक को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप लगा था कि नव्या रायपुर की हाईप्रोफाइल पार्टियों, निजी आयोजनों और नाइट क्लबों में एमडीएमए की सप्लाई करती थी और कई आयोजनों में स्वयं मौजूद रहकर ड्रग उपलब्ध कराती थी।
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, ड्रग्स तस्करी का पूरा नेटवर्क मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी मोनू बिश्नोई के जरिए कई लोगों तक MDMA पहुंचाई गई थी।
चार्जशीट में विधि अग्रवाल समेत अन्य लोगों को ड्रग्स सप्लाई किए जाने का उल्लेख है। वहीं मोहित ईशरानी द्वारा ड्रग्स की सप्लाई के एवज में भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी।
SIT की जांच के मुख्य बिंदु
एमडीएमए का मूल स्रोत- ड्रग कहां से लाई गई और इसका मुख्य सप्लायर कौन था।
पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच- रायपुर, मुंबई और अन्य राज्यों से जुड़े सप्लायर, कुरियर और रिसीवर की पहचान।
नव्या मलिक और अन्य आरोपियों की भूमिका- ड्रग की खरीद, बिक्री, भंडारण और वितरण में किसकी क्या भूमिका थी।
मनी ट्रेल की पड़ताल- बैंक खाते, यूपीआइ, नकद लेन-देन और ड्रग कारोबार से हुई कमाई की जांच।
डिजिटल फारेंसिक जांच- मोबाइल फोन, लैपटाप, काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर), वाट्सएप चैट, इंटरनेट मीडिया और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का विश्लेषण।हाइप्रोफाइल पार्टियों का कनेक्शन – निजी पार्टियों, क्लबों, पब और कथित टेक्नो पार्टियों में ड्रग की सप्लाई की जांच।
ड्रग खरीदने वालों की पहचान- चार्जशीट में दर्ज नामों सहित अन्य उपभोक्ताओं और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच।
पुराने मामलों और अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच- क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या पुराने एनडीपीएस मामलों से जुड़े हैं।
संरक्षण और मिलीभगत- क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति, कारोबारी या अन्य लोगों ने नेटवर्क को संरक्षण या आर्थिक सहायता दी।इसके अलावा इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कथित अवैध कमाई और मनी ट्रेल की अलग से जांच कर रहा है। ऐसे में अब यह मामला केवल ड्रग्स बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठित अपराध और आर्थिक अपराध के पहलुओं की भी गहन जांच की जाएगी।





