
व्यंग : NEET Exam Paper Leak- छेद किसी भी सिस्टम को चलाने के लिये बेहद जरूरी चीज हैं
मुकेश नेमा
नीट परीक्षा पेपर लीकेज को लेकर इतना भी रोना पीटना ठीक नहीं। लीकेज इस बात की तस्दीक है कि एक्जाम लेने वाला सिस्टम कायदे से ,इसी दुनिया के हिसाब से ही चल रहा है ! लीकेज ना मिलते इसमें तो वह ज्यादा परेशानी की बात होती। लीकेज हमेशा से हैं ,हमेशा रहेंगे, इनका होना बुरा मानने जैसा नही है ,इनके होने की खबर सरेआम हो जाना बुरा है।
लीकेज हैं ,यानी छेद हैं।छेद किसी भी सिस्टम को चलाने के लिये बेहद जरूरी चीज हैं।छेद ही वो प्रेरक तत्व है जिनकी वजह से इसे चलाने वाले लोग इसकी जिम्मेदारी अपने सर पर लेते हैं।इन छेदो से लीक होता है अमृत।इसी अमृतपान की इच्छा से इसे चलाने वाले अपना कीमती वक्त देते है इसे। इसमें छेद ना हों ,छेद ना करने दिये जाएं ,तो ये कार सेवा करेगा कौन ? हमारा सिस्टम अनाथ हो जायेगा और आप और हम मारे मारे फिरेंगे।
भगवान की दया से अब तक ऐसा कोई भी सिस्टम ईजाद नही किया जा सका है जो लीक प्रूफ हो।ये छेद ही हैं जिनकी वजह से सिस्टम साँस लेता है। सिस्टम इन्हीं के भरोसे जीता है।छेद होते तो हैं सिस्टम में ,पर इसे चलाने वाले इन्हें दिखाये जाने से परहेज करते हैं।सात परदों से ढक कर रखा जाता है छेदों को ,पर कभी कभी कुछ उत्साही ,अधीर जन कुछ बडे ही छेद कर बैठते है इसमें।बडा छेद यानी बडा लीकेज।जब भी होता है ऐसा पब्लिक थोडी बहुत देर के लिये बुरा मान जाती है।सिस्टम छेद तो चाहता है पर छलनी मे बदल जाना उसे नागवार गुजरता है।ऐसे मे छेदो की इज्जत बचाने के लिये ऐसे छेदीलाल निकाल बाहर किये जाते हैं या उन्हें दूर देश की रवानगी डालने के लिये वक्त और रास्ता दे दिया जाता है।

लीकेज क़तई बुरे भी नही होते।बच्चा पैदा होने के फ़ौरन बाद लीक करने लगता है।लीक होते बच्चे को देखकर मम्मियाँ निहाल हो जाती हैं।थोडी सी बारिश मे गरीब का छप्पर लीक कर जाता है तो वह खुश होकर अपने सर पर छप्पर होने के लिये भगवान का शुक्रिया अदा करता है। लीकेजों को लेकर रोना पीटना बेकार है।लीकेज कहाँ नही हैं ? हमारे घर तक पानी पहुँचाने वाले पाइप लाईन मे बरसो से लीकेज है।लाखों लीटर पानी बह चुका अब तक। करोड़ों और बहेगा। आसपास रहने वाले इससे बने तालाब मे छप छप करते है और घर की टंकी का पानी बचा कर खुश होते हैं।
सर पर आसमान है। आसमान ही फटा पड़ा है।आपकी जान बचाने वाली ओजोन लेयर मे ही छेद है।इस छेद को भरने के लिये लाखो करोडो की योजनाएं है। इन योजनाओं मे भी छेद है।छेद हैं तो लीकेज हैं।और लीकेज है तो सिस्टम जिंदा है और सिस्टम जिंदा है तो हम सभी अब तक जिंदा हैं।

लीकेज फायदेमंद न होते तो होते ही क्यों ? लीकेज होने की गुंजाइश उम्मीद जगाने जैसी है। लीकेज हैं इससे हर आदमी को लगता है कि वो भी कुछ बन सकता है। लीकेज ढूँढना और उसमें घुस पड़ना आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है। यदि ये लीकेज कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती । गोपनीयता भंग न होती इसकी तो अच्छा होता। कुछेक सैकड़ा समर्थ बच्चे एडवांस मे पेपर पा जाते। दूसरों की जगह डॉक्टर बन जाते। ये बनते तो झोला छाप नीम हकीमों से थोड़े से बेहतर ही होते ,उनसे कम मरीज मारते। लीकेज की खबर लीक न होती तो कुछ काबिल मेहनती बच्चे भी डॉक्टर बन सकते थे। लीकेज की इस खबर से शातिर और होनहार सभी तरह के बच्चों का साल बिगड़ा है। डॉक्टरों का भीषण टोटा है हमारे यहाँ। ऐसे में लीकेज की इस खबर के सार्वजनिक होने से देश का नुकसान ही हुआ है । हम कुछ काबिल और थोड़े से नालायक डॉक्टरों से वंचित रह गए है।
कहने का सार यह कि कुल मिलाकर छेद और छेदो मे से होने वाले लीकेज बुरे नही है। उनके होने की खबर जगज़ाहिर होना बुरा है। और जिसने भी इनके होने की खबर लीक की है उसे अवाम को कभी भी दिल से माफ नही करना चाहिए।
मुकेश नेमा





