अम्बेडकर जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मस्थली महू पहुँचकर अर्पित की श्रद्धांजलि, अनुयायियों संग किया सहभोज,दिया समरसता का संदेश

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अम्बेडकर जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मस्थली महू पहुँचकर अर्पित की श्रद्धांजलि, अनुयायियों संग किया सहभोज,दिया समरसता का संदेश

महू (इंदौर): भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले के डॉ. आंबेडकर नगर स्थित बाबा साहब की जन्मस्थली पर बने भव्य स्मारक पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। बाद में मुख्यमंत्री ने अनुयायियों संग सहभोज कर समरसता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया तथा उनके योगदान का स्मरण किया। इस दौरान उन्होंने स्मारक परिसर का अवलोकन भी किया।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मारक में प्रदर्शित डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित चित्रों को देखा और उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक न्याय के लिए किए गए कार्यों तथा संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को याद किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी बाबा साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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इस मौके पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक सुश्री उषा ठाकुर, श्री आलोक कुमार, भंते धम्मदीप महाथेरो, श्री श्रवण चावड़ा, श्री राजेश वानखेड़े आदि मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री ने अनुयायियों संग किया सहभोज, दिया समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाद में स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए अनुयायियों के साथ सहभोज कर सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के साथ पंक्तिबद्ध बैठकर भोजन ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर का जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। इस प्रकार का सहभोज समाज में भेदभाव मिटाने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। हमें बाबा साहब अम्बेड़कर के सामाजिक समरसता के संदेश को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।