
जंगल की नन्ही जिंदगी के लिए पन्ना में संवेदनशील पहल,सूक्ष्म जल स्रोतों से तितलियों एवं मधुमक्खियों को राहत
भोपाल। दक्षिण पन्ना वनमण्डल अंतर्गत जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बड़े जलस्रोतों के साथ साथ छोटे जीवों की जल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सूक्ष्म पेयजल बिंदुओं का विकास किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत वन क्षेत्रों में तितलियों एवं मधुमक्खियों के लिए अनुकूल जल स्रोत विकसित किए जा रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी के दौरान जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
तितलियों के लिए छायादार स्थानों पर नम मिट्टी वाले छोटे पडलिंग-पैच तैयार किए जा रहे हैं। मधुमक्खियों के लिए उथले जल स्रोत एवं लकड़ी अथवा टहनियों युक्त सुरक्षित पेयजल व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे वे बिना डूबे पानी ग्रहण कर सकें।
कल्दा वन परिक्षेत्र में वनरक्षक वीरेंद्र पटेल द्वारा तितलियों एवं मधुमक्खियों के लिए सूक्ष्म जल स्रोत विकसित किए गए, वहीं मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र में वनरक्षक अरविन्द कुमार विश्वकर्मा द्वारा कुंडा झिरिया की सफाई कराई गई तथा मधुमक्खियों के लिए विशेष जल स्रोत की व्यवस्था की गई।
वन विभाग द्वारा बताया गया कि इस प्रकार के छोटे जल स्रोत परागण करने वाले जीवों एवं अन्य सूक्ष्म वन्यजीवों के संरक्षण के साथ स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





