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5 साल में MP की 4 लोकसभा सीटों पर बदला सियासी समीकरण, जो कभी मैदान में विरोधी थे आज समर्थन में खड़े हैं!

5 साल में MP की 4 लोकसभा सीटों पर बदला सियासी समीकरण, जो कभी मैदान में विरोधी थे आज समर्थन में खड़े हैं!

भोपाल। राजनीति में कभी कुछ भी स्थायी नहीं होता है। जो कभी प्रतिद्वंद्धी बनकर चुनाव मैदान में सामने होते है, वहीं कभी सारथी बनकर मैदान में समर्थन देने के लिए तैयार रहते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदेश की चार लोकसभा सीट ऐसी थी, जहां भाजपा और कांग्रेंस के उम्मीदवार आमने -सामने थे। इसके बावजूद भी इन चार सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गुना, इंदौर, राजगढ़ और रीवा लोकसभा सीटों के उम्मीदवार भाजपा में शामिल हो गए। इन लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नेता अब भाजपा संगठन के लिए काम करने लगे हैं।

गुना सीट

ग्वालियर चंबल क्षेत्र की गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के केपी यादव चुनावी मैदान में आमने- सामने थे। भाजपा उम्मीदवार केपी यादव चुनाव जीतने में सफल रहे। वर्ष 2020 में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए। अब इस सीट से सिंधिया भाजपा से उम्मीदवार है।

विंध्य की रीवा सीट

विंध्य क्षेत्र की रीवा सीट की कहानी भी ऐसी ही है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के जनार्दन मिश्रा के सामने कांग्रेस के सिद्धार्थ तिवारी चुनाव मैदान में थे। जर्नादन मिश्रा ने कांग्रेस के उम्मीदवार सिद्धार्थ तिवारी को 312807 मतों से चुनाव हराया था। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव संपन्न होने से ठीक पहले सिद्धार्थ तिवारी भाजपा में शामिल हो गए। बीजेपी ने उन्हें त्योथर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया। सिद्धार्थ तिवारी विधानसभा का चुनाव जीतने में सफल रहे। चुनाव के दौरान वह जर्नादन मिश्रा के लिए समर्थन मांगते रहे।

इंदौर सीट

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी शंकर लालवानी थे। उनके सामने कांग्रेस के पंकज संघवी ने चुनाव लड़ा था। शंकर लालवानी ने कांग्रेस के उम्मीदवार पंकज संघवी को 547754 मतो से चुनाव हराया था। मौजूदा समय में संघवी भाजपा में शामिल होकर लालवानी के समर्थन में प्रचार कर रहे है।

राजगढ़ सीट

भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर के सामने कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी ने चुनाव लड़ा था। वह रोडमल नागर से 431019 मतों से चुनाव हार गई थीं। मोना सुस्तानी ने बाद में भाजपा ज्वाइन कर ली। अब वे रोडमल नागर को जीताने में जुटी हुई हैं।