मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव… अब कांग्रेस के लिए संकट बनकर आते हैं…

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मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव… अब कांग्रेस के लिए संकट बनकर आते हैं…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, भाजपा मध्य प्रदेश के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल एवं भाजपा नेता महेश केवट को मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में निर्विरोध निर्वाचित किया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने 11 जून 2026 को भाजपा के इन तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसके साथ ही भाजपा के खेमे में जीत के उत्साह का संचार हो गया। निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिकता भर शेष बची थी क्योंकि 8 जून 2026 को ही कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त हो गया था। और तब भाजपा की निगाहें बस घड़ी की सुइयों पर टिकी थीं कि नामांकन वापसी का समय खत्म होगा और भाजपा उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचन का प्रमाण पत्र सौंप दिया जाएगा।

देखा जाए तो मध्य प्रदेश में रिक्त सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव अब कांग्रेस के लिए संकट बनकर ही आते हैं। जब कांग्रेस को दो राज्यसभा सीटें जीतने की उम्मीद रहती है तब भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है और जब कांग्रेस के खाते में एक राज्यसभा सीट आनी हो तब वह भी नहीं मिल पाती। और कांग्रेस के खेमे में गुटबाजी की सड़ांध पैदा कर राज्यसभा चुनाव खिलखिलाते हुए गुजर जाते हैं। वर्ष 2020 की तरह वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश में रिक्त होने वाली तीन राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनावों ने भी कांग्रेस को हताश ही किया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना शायद उसी विडम्बना की ओर संकेत करता है कि कांग्रेस के लिए राज्यसभा चुनाव संकट लेकर आते हैं। भोपाल से दिल्ली तक कांग्रेस मीनाक्षी नटराजन को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस को निराश किया है तो अब औपचारिकता बची है कि सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को राहत मिलेगी। हालांकि इसकी संभावनाएं भी नगण्य ही हैं। एकतरफ कांग्रेस मध्य प्रदेश में राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में अपनी एकजुटता का महासंदेश देने में जुटी थी तो दूसरी तरफ विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने के लिए कांग्रेस का विमान राजा भोज हवाई अड्डे के रनवे पर दौड़ भी नहीं पाया था, और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का समाचार भोपाल से दिल्ली तक कोहराम मचाने लगा था। इसके साथ ही कांग्रेस की अंतर्कलह की तरफ सबकी निगाहें उठ गई थीं। मुख्य रूप से मीनाक्षी के खिलाफ तेलंगाना से सबूत उपलब्ध कराने के आरोप कांग्रेस के दिग्गजों को कटघरे में खड़ा करने लगे थे। हालांकि कांग्रेस नेताओं द्वारा घोषित रूप से किसी का नाम नहीं लिया जा रहा था लेकिन भाजपा नेताओं ने यह कहकर कांग्रेस की अंतर्कलह को सामने लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि मीनाक्षी के खिलाफ पूरा मसाला उन्हें कांग्रेस की फैक्ट्री से ही सप्लाई हुआ है। कमलनाथ पूरे चुनाव में कहीं नजर नहीं आए तो दिग्विजय सिंह की तरफ कांग्रेस के अंदर सभी संशय भरी नजर टिकाए हुए हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में जीतू पटवारी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। इन सभी को अपने-अपने गुटों का मालिक माना जाता है तो वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और जीतू पटवारी के बीच भी पारस्परिक प्रेम के अभाव का प्रभाव कांग्रेस में पसरा नजर आता है। यह सारी स्थितियाँ कांग्रेस के प्रतिकूल समय में भी अपना पूरा असर दिखा रही हैं और मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी का दौर जारी है, यह बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

इससे पहले 2020 में भी मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव की यादें कांग्रेस में गुटबाजी की अमरता पर मुहर लगाती रहेंगी। उस समय मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। मार्च का महीना था। उस चुनाव में कांग्रेस को दो सीटों पर जीत की उम्मीद नजर आ रही थी और पहले प्रत्याशी के रूप में दिग्विजय सिंह का नाम सामने आया था। तो ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी के तौर पर दूसरे नंबर पर उनका नाम रखना नागवार गुजरा था। इसके बाद सिंधिया 22 विधायकों के साथ भाजपा के खेमे में पहुंचे थे और कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। शिवराज के नेतृत्व में बनी भाजपा की सरकार में तब राज्यसभा में कांग्रेस से सिर्फ दिग्विजय सिंह जीत सके थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा भेजा था। बाद में लोकसभा चुनाव जीतकर सिंधिया ने राज्यसभा सीट खाली कर दी थी। तो 2020 का वह राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए महासंकट बनकर सामने आया था। इस बात को कांग्रेस कभी नहीं भुला पाएगी। तब भी विभीषणों की बात सामने आई थी तो 2026 में भी यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर कांग्रेस में विभीषण कौन है। और किसने भाजपा को मीनाक्षी के खिलाफ तेलंगाना में कोर्ट के नोटिस संबंधी कागजात मुहैया कराए हैं। मुख्य रूप से इस आधार पर ही आपराधिक मामला छिपाने के आरोप में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया गया है।

तो कभी कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेदों को आंतरिक लोकतंत्र का जामा पहनाकर तर्कसंगत ठहराने की पूरी कोशिश करती थी। लेकिन अब कांग्रेस की गुटबाजी उसे स्थायी नुकसान पहुंचाने का जरिया बन गई है। मीनाक्षी नटराजन बस एक माध्यम है। अगर मीनाक्षी के मामले में स्थितियाँ कांग्रेस के अनुकूल भी बनती हैं, जिसकी संभावना बिल्कुल भी नहीं है। तब भी यह राज्यसभा चुनाव कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी के संकट को सामने रखकर जा रहा है। अगर मीनाक्षी का नामांकन निरस्त नहीं होता तब भी हॉर्स ट्रेडिंग से बचने के लिए कांग्रेस को भारी मशक्कत करनी पड़ रही थी। उसके बाद भी यह डर बना हुआ था कि बहुत सारे विधायक निष्ठा तोड़ने पर उतारू हैं। आखिरकार यही साबित हो रहा है कि राज्यसभा चुनाव मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए संकट लेकर आने वाले बन गए हैं… कांग्रेस को ऐसे संकटों से उबरने के लिए आत्ममंथन की खास जरूरत है…।

 

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।