अंडमान की तर्ज पर मध्यप्रदेश में शहीद स्मृति में नए तीर्थ का उदय

मध्यप्रदेश सरकार ने दिया नेताजी सुभाष चंद्र बोस को विशेष सम्मान

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 जनवरी 2021 को जबलपुर में केंद्रीय कारावास में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में संग्रहालय के विकास और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बैरक को आमजन के लिए दर्शनार्थ प्रारंभ करने की घोषणा की थी जिस पर जेल विभाग ने अमल किया है।

रविवार, 23 जनवरी 2022 को सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर इसकी शुरुआत हो रही है। इसके लिए जबलपुर में आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। सप्ताह में दो दिवस आमजन सुभाष चंद्र बोस जी के उस कक्ष को देख सकेंगे जहां उन्हें बंदी बनाया गया था।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर्ष 2007 में जबलपुर जेल का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर किया था। इसके साथ ही यहां स्मारक के निर्माण और विकास की पहल भी प्रारंभ हुई थी।

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अंडमान निकोबार स्थित सेल्युलर जेल को जिस तरह वीर सावरकर मेमोरियल के रूप में विकसित किया गया है, उसी तरह जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस कारावास को एक प्रेरक स्थल के रूप में विकसित करने की ठोस पहल हुई।

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा लिए गए निर्णय के क्रियान्वयन में अनेक कार्य हुए है, जिसमें प्रमुख रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की उपयोग की गई वस्तुओं जैसे उनके वस्त्र, उन्हें पहनाई गई बेड़ियां, उनके हस्तलिखित पत्र और उनकी जेल यात्रा से संबंधित अभिलेख को संकलित कर एक संग्रहालय का स्वरूप दिया गया है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की बैरक तक पहुंचने के लिए एक पैसेज का निर्माण किया गया है। कारावास में मुख्य द्वार के अलावा अन्य नया मार्ग बनाकर इस कक्ष तक पहुंचने की सुविधा विकसित की गई है। इस पैसेज में दोनों ओर रंग बिरंगी फूलों के पौधे लगाए गए हैं।

नई दिल्ली में वर्ष 2019 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की स्मृति में एक संग्रहालय स्थापित किया गया था। इस सिलसिले में मध्यप्रदेश सरकार की पहल से यह प्रदेश का प्रथम और देश का द्वितीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय होगा। संग्रहालय और नेताजी के कारावास वाले कक्ष के दर्शन के लिए नागरिकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जबलपुर प्रवास के दौरान राष्ट्रभक्त बलिदानी सुभाष चंद्र बोस के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करते हुए घोषणा की थी कि जबलपुर स्थित कारावास जहां वर्ष 1933 और 1934 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बंदी बनाकर रखा गया था, उस बैरेक को अब नागरिक देख सकें और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लें।

भोपाल में नवनिर्मित सुभाष नगर रेलवे ओवर ब्रिज के निकट नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना की गई है। इसके साथ ही भोपाल में संस्कृति विभाग के सहयोग से आय एम सुभाष नाटक का मंचन भी शहीद भवन में हो रहा है।

मध्यप्रदेश के लिए यह पहल इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना की घोषणा की है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को सम्मान देते हुए आजादी के अमृत महोत्सव में अनेक कदम उठाए गए हैं। इस श्रंखला में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र द्वारा प्रतिमाओं की स्थापना और जबलपुर जेल में सुभाष वार्ड के विकास का कार्य ऐतिहासिक सिद्ध होगा।