Silver Screen:ये फ़िल्में जोर-शोर से शुरू तो हुई, पर कभी पूरी नहीं हो सकी!

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Silver Screen:ये फ़िल्में जोर-शोर से शुरू तो हुई, पर कभी पूरी नहीं हो सकी!

संजय लीला भंसाली अपनी नई वेब सीरीज ‘हीरा मंडी’ को लेकर चर्चा में हैं। क्योंकि, ये उनका 14 साल पुराना अधूरा ख्वाब था, जो पूरा हुआ। अब वे अपनी एक और रुकी हुई फिल्म ‘इंशाअल्लाह’ को लेकर ख़बरों में हैं। ये फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद वे सलमान खान को लेकर बनाने वाले थे। पर, फिल्म नहीं बन सकी। अब फिर ‘इंशाअल्लाह’ बनने की ख़बरें सुनाई देने लगी। सिर्फ यही फिल्म नहीं जो घोषणा के बाद बरसों से नहीं बनी। ऐसी सैकड़ों फ़िल्में हैं, जिनकी घोषणा तो शोर-शराबे के साथ होती है, पर वे कभी पूरी नहीं हो पाती। इसके पीछे कई कारण है। वैसे तो फिल्म इंडस्ट्री हमेशा ही दर्शकों की पसंद के मनोरंजन का ख़्याल रखती आई है। निर्माता-निर्देशक हमेशा कोशिश करते हैं कि वे ऐसी फ़िल्में बनाएं जिन्हें लोग याद रखें और जो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनें! हर फिल्म के पीछे राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, टेक्नीशियन, एक्टर्स जैसे तमाम लोगों की मेहनत और काबिलियत लगती है! लेकिन, इन तमाम चीज़ों के बाद भी कभी कुछ फ़िल्में आधी, तो कुछ पूरी बनकर भी परदे पर जगह नहीं बना पाती!

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जितनी फ़िल्में हर साल परदे पर दिखाई देती हैं, उससे करीब दोगुनी फ़िल्में परदे तक पहुंच ही नहीं पाती! कुछ फ़िल्में सिर्फ घोषणा और मुहूर्त तक सीमित हो जाती हैं तो कुछ फ़िल्में पूरी बन भी नहीं पाती। कुछ फ़िल्में बनकर तैयार हो गई, पर उनकी रिलीज में अड़ंगा आ गया। सवाल उठता है कि जब फिल्म की प्लानिंग के बाद उसकी घोषणा की जाती है, तब सारे हालात का अंदाजा क्यों नहीं लगाया जाता! दरअसल, ये सब किया भी जाता है, पर कई बार ऐसी अनपेक्षित स्थितियां निर्मित हो जाती है जिसका सीधा असर फिल्म निर्माण पर पड़ता है। मज़बूरी में निर्माता-निर्देशक को पीछे हटना पड़ता है! जरूरी नहीं कि जो हालात उभरे वो सार्वजनिक किए जाएं! क्योंकि, कुछ हालात सभी को बताने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए होते हैं। सभी डायरेक्टर, प्रोड्यूसर जब कोई फिल्म बनाते हैं, तो उनकी कोशिश होती है कि उनकी फिल्म जल्द से जल्द सिनेमा के परदे तक पहुंचे, इसलिए कि फिल्म के साथ उनकी बहुत सारी उम्मीदें जुड़ी होती है। अब जरा उन फिल्मों के बारे में सोचिए जिन्हें इतनी मेहनत से बनाया जाता है, पर वे फिल्म कई कारणों से सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाती। बहुत सी ऐसी फिल्में हैं, जो बनी, पर लेकिन कभी दर्शकों तक पहुंच नहीं पाई।

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फिल्मों के हमेशा के लिए डिब्बा बंद के ढेर सारे कारणों के साथ एक यह भी है कि जब किसी कलाकार की फ़िल्में लगातार फ्लॉप होने लगती है, तो फिल्मकार उस पर दांव लगाने से बचते हैं! ऐसी स्थिति में पहले से घोषित फिल्मों को किसी न किसी बहाने टाल दिया जाता है। इसका सबसे सटीक उदाहरण तब सामने आया, जब आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ फ्लॉप हुई तो टी-सीरीज के फाउंडर गुलशन कुमार की बायोपिक फिल्म ‘मुग़ल’ टल गई! यही स्थिति अक्षय कुमार के साथ ‘सम्राट पृथ्वीराज’ और ‘रक्षाबंधन’ के फ्लॉप होने के बाद दिखाई दी। ‘गोरखा’ और ‘कठपुतली’ समेत कई फिल्मों को रोक दिया गया। ये हाल की घटनाएं जरूर है, पर इसका एक लम्बा इतिहास है। जब अमिताभ बच्चन का ख़राब समय था, तब उनकी कई फिल्मों को किसी न किसी कारण से रोक दिया या आगे बढ़ा दिया था। इनमें कुछ बनी, तो कुछ हमेशा के लिए भुला दी गई। अमिताभ को लेकर सुभाष घई ‘देवा’ बना रहे थे। फिल्म की एक हफ्ते की शूटिंग भी हो गई थी। लेकिन, सुभाष घई और अमिताभ बच्चन के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई और फिल्म बंद हो गई। अमिताभ के साथ रेखा की पहली फिल्म ‘अपने-पराए’ भी शुरू हुई थी, पर पूरी नहीं हो पाई। फिल्म बनाने वालों ने पैसों की कमी का हवाला देते हुए बंद कर दिया। अमिताभ को लेकर शूजित सरकार ‘शूबाइट’ बनाई। लेकिन यू-टीवी और डिज़्नी में विवाद की वजह से ये फिल्म रिलीज नहीं हो सकी।

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इन सारे स्वाभाविक और अस्वाभाविक कारणों के अलावा एक और बड़ा कारण होता है कलाकारों, निर्देशक या फिल्म की कहानी का कोई विवाद! देखा गया कि सबसे ज्यादा इसे लेकर ही फ़िल्में बनने से रुकी या रुकवा दी गई! संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘इंशा अल्लाह’ का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। यह फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई। इस फिल्म में संजय लीला का मूड सलमान खान और आलिया भट्ट को कास्ट करने का था। लेकिन, सलमान के साथ क्रिएटिव डिफरेंस के कारण फिल्म की शूटिंग भी शुरू नहीं हो सकी। बाद में संजय लीला ने रितिक रोशन को कास्ट करना चाहा, पर उन्होंने भी इंकार कर दिया। आलिया को पहले ही वे पहले ही कास्ट कर चुके थे, इसलिए आलिया को लेकर ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ बनाई गई।

1992 में बनना शुरू हुई शेखर कपूर की फिल्म ‘टाइम मशीन’ में आमिर खान, रवीना टंडन, रेखा और नसीरुद्दीन शाह को लिया गया था। फिल्म लगभग पूरी बन गई थी। लेकिन, अचानक शेखर कपूर के सामने पैसों का संकट आ गया और फिल्म का बनना थम गया। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ जैसी सफल फिल्मों के बाद विधु विनोद चोपड़ा ने मुन्ना भाई सीरीज की तीसरी फिल्म ‘मुन्ना भाई चले अमेरिका’ बनाने की घोषणा की थी। फिल्म की थोड़ी शूटिंग भी हुई, पर संजय दत्त के जेल जाने के बाद फिल्म कहां चली गई पता ही नहीं चला! करण जौहर की दो फिल्म ‘तख्त’ और ‘शुद्धि’ भी अनिश्चितकाल के लिए बंद हुई है। ‘तख्त’ पीरियड फिल्म थी, जिसमें रणवीर सिंह, करीना कपूर, विक्की कौशल, आलिया भट्ट, जाह्नवी कपूर, भूमि पेडनेकर और अनिल कपूर को कास्ट किया गया था। इसकी शूटिंग 2020 में शुरू की गई, पर कोविड के कारण इसे टाल दिया गया।

‘शुद्धि’ को करण जौहर करीना कपूर और रितिक रोशन को लेकर बनना चाहते थे, पर कुछ वजहों से उन्होंने इस फिल्म को वरुण धवन और आलिया भट्ट के साथ बनाने का फैसला किया, पर ये फिल्म भी नहीं बनी। करण जौहर की ही ‘दोस्ताना 2’ का भी यही हश्र हुआ। फिल्म में कार्तिक आर्यन को लिया गया। लेकिन, किन्हीं कारणों से करण जौहर ने कार्तिक को फिल्म से बाहर कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त खिंचाई हुई। इस वजह से करण ने चुपचाप फिल्म को बंद ही कर दिया। एक पुराना उदाहरण दिलीप कुमार का भी है। 1991 में दिलीप कुमार को लेकर सुधाकर बोकाडे ने ‘कलिंगा’ की घोषणा की थी! इसका निर्देशन भी दिलीप कुमार ही करने वाली थे। फिल्म में दिलीप कुमार के साथ सनी देओल, मीनाक्षी शेषाद्री, राज किरण, शिल्पा शिरोडकर भी कलाकार थे। फिल्म तीन साल में 90% तो बन गई, पर उसके बाद डिब्बा बंद हो गई!

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विद्या बालन के साथ अक्षय कुमार को लेकर ‘चांद भाई’ बनाए जाने की घोषणा की गई थी। ये फिल्म ऐसे बेसहारा गरीब लड़के की कहानी थी, जो गैंगस्टर बनना चाहता है। बिना गाने की ये फिल्म रॉबिनहुड जैसे किरदार को ध्यान में रखकर लिखी गई थी। इसका निर्देशन निखिल आडवाणी करने वाले थे। लेकिन, अचानक कुछ ऐसा हुआ कि निखिल आडवाणी ने फिल्म न बनाने का ऐलान कर दिया। आजतक इसका कारण सामने नहीं आया। क्योंकि, अक्षय और विद्या ने इस मुद्दे पर खामोशी ही बरती। अक्षय और विद्या की ही फिल्म ‘राहगीर’ भी मुहूर्त के बाद नहीं बन सकी। इसे प्रीतिश नंदी बनाने वाले थे और निर्देशन था रितुपर्णो घोष का। इसे देवानंद की 1965 की सुपरहिट फिल्म ‘गाइड’ का रीमेक कहा जा रहा था। जब देवानंद को यह बात पता चली, तो वे नाराज हो गए। वे किसी भी क्लासिक फिल्म का रीमेक बनाने के पक्ष में नहीं थे। देव आनंद की आपत्ति के बाद विवाद बढ़ता गया और फिल्म बंद हो गई।

इसी तरह 1983 में बनी ‘चोर मंडली’ राज कपूर के आख़िर दिनों की फिल्म मानी जाती है। इसमें उन्होंने ख़ुद बतौर एक्टर काम किया था। फिल्म में अशोक कुमार भी थे। फिल्म में इन दोनों ने ऐसे चोरों की भूमिका निभाई थी, जो डायमंड चुराने के पीछे पड़े रहते थे। यह फिल्म भी बनकर पूरी हो गई थी, पर कभी सिनेमाघर तक नहीं पहुंची! संजय दत्त और सलमान खान को लेकर मुकुल आनंद ने 1996 में ‘दस’ बनाने की घोषणा की। मुहूर्त के बाद फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन अचानक मुकुल आनंद की मौत ने फिल्म को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते भेज दिया। यही स्थिति दिव्या भारती की मौत के कारण भी हुई। अक्षय कुमार के साथ पार्थो घोष दिव्या को लेकर ‘परिणाम’ बनाने वाले थे। इसमें डैनी और प्राण को भी साइन किया गया था। लेकिन, 1993 में दिव्या भारती की अचानक हुई मौत ने सब कुछ रोक दिया। 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘ब्लू’ में अक्षय कुमार के साथ संजय दत्त, जायद खान, लारा दत्ता थे। फिल्म की रिलीज से पहले इसके सीक्वल की तैयारी थी, जिसका नाम ‘आसमान’ तय किया गया था। लेकिन, ‘ब्लू’ कमाई नहीं कर पाई और मामला अटकता चला गया और फिल्म बंद हो गई।

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अक्षय कुमार की ‘सामना’ उसकी कहानी की उलझन के कारण नहीं बनी। इसे राजकुमार संतोषी बनाने वाले थे। ये धर्म और राजनीति के किसी विषय पर आधारित थी। इसमें अक्षय कुमार के साथ नाना पाटेकर, अजय देवगन, रितेश देशमुख, उर्मिला मातोंडकर और महिमा चौधरी को साइन किया गया था। इसी तरह राजा कृष्णा मेनन दिवंगत बॉक्सर डिंको सिंह की बायोपिक बनाने वाले थे। इसमें वे शाहिद कपूर को लीड में लेना चाहते थे। लेकिन, इस फिल्म को भी टाल दिया गया। अनुराग कश्यप ‘गुलाब जामुन’ अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय को लेकर बनाना चाहते थे। पर, फिल्म की शूटिंग तक शुरू नहीं हो सकी। 1997 में प्रोड्यूसर आशीष बलराम नागपाल ने ‘जिगरबाज’ को डायरेक्ट करने के लिए रॉबिन बनर्जी को चुना था। अक्षय कुमार के साथ जैकी श्रॉफ, मनीषा कोइराला, ममता कुलकर्णी, अमरीश पुरी और बिंदु थे। पर, पूरी बनकर भी फिल्म रिलीज नहीं पाई।

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अक्षय की ही 1997 में ‘पूरब की लैला-पश्चिम का छैला’ घोषित हुई थी। उनके साथ सुनील शेट्टी और नम्रता शिरोडकर थे। अचानक हीरोइन नम्रता ने साउथ के हीरो महेश बाबू से शादी कर ली और फिल्म अटक गई। 12 साल बाद अक्षय ने नए नाम ‘हैलू इंडिया’ के साथ फिल्म पूरी की, पर इसने सिनेमाघर का मुंह नहीं देखा। इसी तरह सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘पानी’ का काफी हल्ला था। शेखर कपूर के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म के लिए सुशांत सिंह ने काफी तैयारी की थी। लेकिन, शेखर कपूर का प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा से किसी बात को लेकर विवाद हुआ और फिल्म बनने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई। दरअसल, ये सिर्फ उन चंद फिल्मों के नाम और घटनाक्रम हैं, जो सामने आए! ऐसी फिल्मों की संख्या रिलीज हुई फिल्मों से बहुत ज्यादा है। ये सब आगे भी चलता रहेगा, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री का नाम ही अनिश्चितताओं से जुड़ा है।

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हेमंत पाल

चार दशक से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हेमंत पाल ने देश के सभी प्रतिष्ठित अख़बारों और पत्रिकाओं में कई विषयों पर अपनी लेखनी चलाई। लेकिन, राजनीति और फिल्म पर लेखन उनके प्रिय विषय हैं। दो दशक से ज्यादा समय तक 'नईदुनिया' में पत्रकारिता की, लम्बे समय तक 'चुनाव डेस्क' के प्रभारी रहे। वे 'जनसत्ता' (मुंबई) में भी रहे और सभी संस्करणों के लिए फिल्म/टीवी पेज के प्रभारी के रूप में काम किया। फ़िलहाल 'सुबह सवेरे' इंदौर संस्करण के स्थानीय संपादक हैं।

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