
‘द जर्नी ऑफ़ ए जर्नलिस्ट’ कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सिक्ता देव ने कहा जर्नलिज्म सिर्फ पेशा ही नहीं जिम्मेदारी भी है
इंदौर। वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार सिक्ता देव ने कहा कि जर्नलिज्म अब बहुआयामी और चुनौतीपूर्ण हो गया है। जर्नलिज्म में टीवी और न्यूज पेपर के लिए रिपोर्टिंग के साथ-साथ अब सोशल मीडिया, डिजिटल और रील के लिए भी काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जर्नलिज्म में सहायक हो सकता है लेकिन कभी भी विकल्प नहीं बन सकता।
एनडीटीवी की वरिष्ठ एंकर और तीस वर्षों से जर्नलिज्म में सक्रिय सुश्री देव स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के ‘द जर्नी ऑफ़ ए जर्नलिस्ट’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में जर्नलिज्म के लिए पर्याप्त समय मिलता था लेकिन अब हर काम के लिए बेहद कम समय मिलता है। इस दौर में बेहतर जर्नलिस्ट बनने के लिए सतर्कता और सजगता बेहद जरूरी है।
सुश्री देव ने जर्नलिज्म में सफल होने के लिए पांच सबक बताये। उन्होंने कहा कि भारत को समझना है तो भारत के बीच जाना होगा। महानगर के स्टूडियो में बैठ कर बेहतर जर्नलिज्म नहीं किया जा सकता। ग्राउंड लेवल पर जाते हैं तभी मालूम पड़ता है कि हमारा देश कितनी परतों वाला है। ग्राउंड जीरो पर जितना अधिक देखेंगे उतना पूर्वाग्रह कम रख पायेगें। उन्होंने कहा कि सफल जर्नलिस्ट बनने के लिए वीआईपी के इंटरव्यू के बजाय आम जनों की कहानी कवर करना चाहिए। यह सोचना चाहिए कि मेरी स्टोरी से किसी की जिन्दगी पर क्या असर पड़ेगा? अच्छे काम के लिए जिज्ञासू होना जरूरी है। यह विधा एआई के पास नहीं है। जिज्ञासा रखकर ही आप अच्छे प्रश्न खड़े कर सकते हैं।

सुश्री देव ने कहा कि जर्नलिज्म में सबसे पहले की बजाय सबसे सही होने की आवश्यकता है। उनके चैनल एनडीटीवी ने दर्शकों के बीच यह भरोसा कायम किया है। जर्नलिज्म में लम्बी रेस का घोड़ा बनना है तो पाठकों को विश्वास में लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम कितने भी वरिष्ठ हो जाएँ लेकिन संवेदनशीलता नहीं खोना चाहिए। पेशेवर लोग भावनाहीन हो जाते हैं। हम इंसानियत खोए बिना भी कठोर प्रश्न पूछ सकते हैं। दुखद क्षणों में कैसा लग रहा है जैसे प्रश्न नहीं पूछना चाहिए क्योंकि जर्नलिज्म सिर्फ पेशा ही नहीं जिम्मेदारी भी है। जर्नलिज्म सिर्फ टीवी स्क्रीन पर दिखने और मशहूर होने का काम नहीं बल्कि अपने समय का गवाह बनने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जर्नलिस्ट को छोटी या बड़ी स्टोरी पर ध्यान देने की बजाय उस स्टोरी को आप किस तरह से कर रहे हैं इस पर ध्यान देना चाहिए। जिस दिन हमने स्वयं को बड़ा मान लिया उस दिन से हम छोटे होना शुरू हो जायेगे।

कार्यक्रम के पहले सत्र में वरिष्ठ पत्रकार सिक्ता देव ने आजतक और फिर एनडीटीवी के साथ बिताये तीस वर्षों के पत्रकारीय सफ़र की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईपीएस अधिकारी की बेटी होने की वजह से उनपर सिविल सर्विसेस में जाने का दबाव था लेकिन नियति उन्हें जर्नलिज्म के पेशे में ले आयी। वरिष्ठ पत्रकार एसपी सिंह ने उन्हें मौका दिया और तराशा। जर्नलिज्म की डिग्री लिए बगैर ग्राउंड लेवल पर काम करके उन्होंने सफलता पायी। उन्होंने कहा कि यह सच है सिर्फ जर्नलिज्म की डिग्री लेने से कोई जर्नलिस्ट नहीं बन सकता। दूसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार पंकज क्षीरसागर ने समसामयिक मुद्दों पर सिक्ता देव से बात-चीत की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं मीडिया विद्यार्थी उपस्थित थे। सभी प्रतिभागियों को सिक्ता देव ने प्रमाण-पत्र भेंट किए।
स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने बताया कि ‘द जर्नी ऑफ़ ए जर्नलिस्ट’ कार्यक्रम श्रृंखला का यह आठवां आयोजन है। देश के जाने-माने पत्रकारों और फोटोग्राफर्स को इंदौर आमंत्रित करके सीखने-सिखाने का उपक्रम आगे भी जारी रहेगा। अगला आयोजन निमाड़ के पांच जिलों पर केन्द्रित होकर खंडवा में आयोजित होगा। प्रारंभ में अतिथि वक्ता का स्वागत प्रवीण खारीवाल, राजेन्द्र कोपरगांवकर, रचना जौहरी, कमल कस्तूरी, सोनाली यादव, ऋतू साहू, राकेश द्विवेदी, शान ठाकुर एवं राजू पवार ने किया। स्मृति चिन्ह एवं क्लब के प्रकाशन गणेश एस चौधरी, नितिन गुप्ता, अभिषेक सिसोदिया, संजय मेहता, बंसीलाल लालवानी एवं प्रवीण धनोतिया ने भेंट किए। आभार नवनीत शुक्ला ने व्यक्त किया।





