
NEET परीक्षा देकर लौटी ही नहीं छात्रा: नर्मदा में मिला शव, परिजनों ने जताई अपहरण कर हत्या की आशंका; उच्च स्तरीय जांच की मांग
खरगोन : इंदौर की 20 वर्षीय नीट अभ्यर्थी निक्की यादव का शव खरगोन जिले में नर्मदा नदी से मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को छात्रा के परिजनों ने उसे आत्महत्या नहीं बल्कि अपहरण कर हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
खरगोन पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने बताया कि लसूड़िया क्षेत्र निवासी निक्की यादव रविवार को महू स्थित परीक्षा केंद्र पर नीट परीक्षा देने गई थी। रात में उसने किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल फोन से अपनी मां को कॉल कर बताया था कि उसका मोबाइल डिस्चार्ज हो गया है और वह घर लौट रही है। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। जांच में उसकी अंतिम लोकेशन खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में मिली।
एसपी ने बताया कि सोमवार दोपहर करही थाना क्षेत्र के पितामली गांव के समीप नर्मदा नदी में एक युवती का शव मिलने की सूचना स्थानीय नाविकों और ग्राम चौकीदार ने पुलिस को दी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया और मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पहचान नहीं होने पर शव के फोटो सोशल मीडिया और आसपास के जिलों के थानों में प्रसारित किए गए। प्रारंभिक जांच में यह प्रतीत हुआ कि शव नदी में बहकर कुछ दूरी से यहां पहुंचा था।
सोमवार देर रात इंदौर के भंवरकुआं थाने की मदद से मृतका की पहचान निक्की यादव के रूप में हुई। मंगलवार को उसके परिजन खरगोन पहुंचे और शव की शिनाख्त की।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर किसी प्रकार की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं तथा प्रारंभिक रूप से मृत्यु डूबने से होना प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि संभवतः परीक्षा परिणाम को लेकर निराशा के कारण छात्रा ने आत्मघाती कदम उठाया हो, लेकिन जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हालांकि निक्की के पिता रामचरण यादव ने इस संभावना को सिरे से खारिज किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी रामचरण यादव पिछले 25 वर्षों से इंदौर में अकाउंटेंसी का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने फोन पर परीक्षा खराब होने जैसी कोई बात नहीं कही थी। परीक्षा को लेकर उनकी कोई चर्चा ही नहीं हुई थी।
उन्होंने बताया कि निक्की पढ़ाई में बेहद मेधावी थी। वह मेधावी छात्र योजना की टॉपर रही थी और दो बार नीट परीक्षा दे चुकी थी। इसके अलावा उसने वैकल्पिक रूप से एम्स की परीक्षा के लिए भी आवेदन किया था।
रामचरण यादव ने कहा कि निक्की ने केवल इतना बताया था कि वह घर लौट रही है। बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। रात करीब साढ़े आठ बजे फोन दोबारा चालू हुआ, लेकिन उसने किसी कॉल का जवाब नहीं दिया।
उन्होंने कहा, “मेरी बेटी आसपास की दुकानों तक अकेले नहीं जाती थी। वह अचानक बड़वाह कैसे पहुंच सकती है? वह आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती। मुझे लगता है कि उसका अपहरण कर यहां लाया गया और उसकी हत्या की गई है।” उन्होंने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की।
निक्की की बड़ी बहन रूबी यादव ने भी पुलिस की आत्महत्या संबंधी आशंका पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि निक्की स्कूल और मेधावी छात्र योजना दोनों में टॉपर रही थी तथा पिछले दो वर्षों से घर पर रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से नीट की तैयारी कर रही थी।
रूबी ने बताया कि शाम 7:27 बजे भंवरकुआं क्षेत्र से उसकी निक्की से बात हुई थी। उन्होंने कहा, “रात 10 बजे से 12 बजे के बीच उसका फोन चालू था। सवाल यह है कि उस दौरान फोन किसने चालू रखा था?”
उन्होंने आरोप लगाया कि निक्की का अपहरण कर उसके साथ कुछ गलत किया गया और बाद में उसे नदी में फेंक दिया गया।
परिजनों ने इंदौर पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। रूबी के अनुसार, जब निक्की घर नहीं पहुंची तो परिवार ने भंवरकुआं से लेकर एमवाय अस्पताल तक उसकी तलाश की। वे लसूड़िया थाने भी पहुंचे, लेकिन तत्काल गुमशुदगी दर्ज नहीं की गई और न ही सीसीटीवी फुटेज या कॉल डिटेल रिकॉर्ड संबंधी कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई।
रामचरण यादव ने बताया कि पूरी रात तलाश करने के बाद वह सुबह करीब 3 बजे घर लौटे और फिर सुबह 5:15 बजे भंवरकुआं थाने पहुंचे, जहां अंततः गुमशुदगी दर्ज की गई।
पोस्टमार्टम पैनल की सदस्य डॉ. वंदना कुंभकार ने बताया कि डॉ. अरविंद कुशवाहा और डॉ. अर्पिता जोशी के साथ किए गए पोस्टमार्टम में शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं मिले हैं और मृत्यु डूबने से होना प्रतीत होती है।
उन्होंने बताया कि बायोकेमिकल परीक्षण के लिए शरीर के अंग सुरक्षित रखे गए हैं तथा फॉरेंसिक जांच के लिए वेजाइनल स्लाइड भी तैयार कर भेजी गई हैं। अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक और प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
एसपी रवींद्र वर्मा ने कहा कि मामले की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाकर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।





