प्रवासी राजस्थानियों और मारवाड़ियों को साधने राजस्थान के नेता चले अब अन्य प्रदेशों की ओर …..

राजस्थान में हुए कम मतदान से जीत हार का आंकलन जारी 

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प्रवासी राजस्थानियों और मारवाड़ियों को साधने राजस्थान के नेता चले अब अन्य प्रदेशों की ओर …..

गोपेंद्र नाथ भट्ट की विशेष रिपोर्ट 

18 वीं लोकसभा के लिए आगामी एक जून तक चलने वाले सात चरणों के आम चुनाव के लिए मतदान के अभी पांच चरण बाकी है। पहले दो चरणों के बाद राजस्थान सहित 14 प्रदेशों में चुनाव कार्य पूर्ण हो चुका है और अब इन राज्यों की जनता को चार जून को आने वाले चुनाव परिणामों का इंतजार है।

राजस्थान में भी लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव खत्म होने के साथ ही प्रदेश में सभी 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव का कार्य संपन्न हो गया हैं।

प्रदेश में चुनाव संपन्न होते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता अपनी-अपनी पार्टियों के प्रचार अभियान को गति देने और सघन प्रचार अभियान से वोटरों को अपने पक्ष में प्रभावित करने के मंतव्य से अन्य प्रदेशों की ओर कूच कर रहे है।

राजस्थान के नेताओं के अन्य प्रदेशों में प्रचार अभियान के लिए जाने का एक प्रमुख कारण पूरे देश में फैले प्रवासी राजस्थानियों और मारवाड़ियों के वोटों को साधना है। ये प्रवासी इन प्रदेशों के वोटर्स है और इन राज्यों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक और व्यावसायिक आदि विभिन्न क्षेत्रों में वे गहरी पैठ और प्रभाव रखते है। इसलिए हर दल चाहता है कि प्रवासी राजस्थानियों और मारवाड़ियों के वोटों को सही ढंग से साधा जाए ताकि उसका फायदा उनकी पार्टी को मिल सके। प्रवासी राजस्थानी देश के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक फैले हुए है। विशेष कर उत्तर पूर्वी प्रदेशों,पश्चिम बंगाल,महाराष्ट्र, गुजरात,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़,उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड,कर्नाटक,आंध्र प्रदेश, तैलांगना, उड़ीसा, तमिलनाडू और केरल तक भारी तादाद में उनके वोट है।

राजस्थान में चुनाव कार्य पूरा होने के बाद अब राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अन्य प्रदेशों में भाजपा के प्रचार कार्य के लिए कूच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शर्मा इस कड़ी में 29 अप्रैल से 1 मई तक पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के चुनावी दौरों पर रहेंगे। वे दोनों प्रदेशों में मारवाड़ी वोटरों से मुलाकात कर उनको भाजपा के पक्ष में साधेंगे ।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री शर्मा 29 अप्रैल को सुबह 7:15 बजे जयपुर से कोलकाता के लिए रवाना होंगे । शर्मा सुबह 10 बजे श्रीरामपुर में भाजपा लोकसभा प्रत्याशी के समर्थन में पीयरी मोहन कॉलेज, उत्तरपाड़ा से चांपदानी, पल्टाघाट तक एक रोड शो करेंगे और बाद में कलेक्ट्रेट हुगली में भाजपा प्रत्याक्षी के नामांकन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे । मुख्यमंत्री शाम 4 बजे रिशरा श्रीरामपुर लोकसभा में मारवाड़ी समाज एवं मारवाड़ी उद्योगपतियों के सम्मेलन में भी शिरकत करेंगे। वे कोलकाता न्यू टॉउन में द वेस्टिन राजारहाट होटल में रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री शर्मा अगले दिन 30 अप्रैल को सुबह 9.10 बजे कोलकाता एयरपोर्ट से झारखंड के लिए रवाना होंगे तथा सुबह 11बजे लोकसभा सीट धनबाद में भाजपा उम्मीदवार के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शर्मा सुबह

11.50 बजे गोल्फ ग्राउंड में लोकसभा प्रत्याशी ढुलू महतो के समर्थन में एक जनसभा भी करेंगे । वे दोपहर 2.30 बजे कासा सोसायटी, लोकसभा धनबाद में प्रबुद्धजन सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम एवं प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन में भी भाग लेंगे। मुख्यमंत्री सायं 06.45 बजे हरमू (रांची) में मारवाड़ी धर्मशाला में प्रबुद्धजन सम्मेलन में शिरकत करने के उपरांत सायं 7.45 बजे हरमू (रांची) में लोकसभा प्रत्याशी संजय सेठ के समर्थन में मारवाड़ी धर्मशाला में प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन में शरीक होंगे।

मुख्यमंत्री शर्मा 1 मई 2024 को दोपहर 12.40 बजे रांची से हजारीबाग के लिए रवाना होंगे। वे दोपहर 1.20 बजे टार्जन मैदान, हज़ारीबाग़ में लोकसभा प्रत्याशी मनीष जायसवाल के समर्थन में जनसभा एवं नामांकन कार्यक्रम में भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री शर्मा का एक मई को दोपहर 3.50 बजे रांची से जयपुर के लिए रवाना होने का कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

*राजस्थान में कम मतदान से जीत हार का आंकलन जारी*

इधर राजस्थान में 2019 के पिछले आम चुनाव के मुकाबले कम मतदान होने से राजनीतिक दलों और चुनाव विश्लेषकों द्वारा अब जीत हार का आंकलन किया जा रहा है। पहले चरण की 12 लोकसभा सीतोंकी तरह दूसरे चरण में 13 सीटों पर हुए मतदान प्रतिशत को लेकर भाजपा और कांग्रेस द्वारा घाटे और फायदे को लेकर तरह तरह से कई कयास लगाए जा रहे हैं। प्रदेश में कम या ज्यादा वोटिंग को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के अपने अपने तर्क हैं. प्रदेश में दूसरे चरण की 13 लोकसभाओं में 104 विधानसभाएं शामिल हैं, जिनमें

इनमें विधानसभावार देखा जाए तो कांग्रेस की तुलना में भाजपा विधायक की संख्या अधिक है, लेकिन इस बार भाजपा के 35 विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में 5 प्रतिशत से अधिक मतदान प्रतिशत घटा है। इनमें किस विधायक की अपने लोकसभा प्रत्याशी को वोट दिलाने में प्रदर्शन कैसा रहा इसका पता चार जून को चुनाव परिणाम आने के बाद ही चल पाएगा। हालांकि प्रदेश की जनता ने अपना फैसला सुना दिया कि उन्हें लोकसभा में किसको चुन कर भेजना है।

प्रदेश में दूसरे चरण की 13 लोकसभा सीटों में शामिल 104 विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति में 72 पर भाजपा और 23 पर कांग्रेस के विधायक हैं। शेष आठ सीटों पर अन्य विधायक शामिल हैं। हालांकि दूसरे चरण की 13 सीटों में से तीन लोकसभाओं में वोट प्रतिशत 2019 के मुकाबले बढ़ा है।माना जा रहा है कि वोट प्रतिशत बढ़ने घटने से कांग्रेस को कम नुकसान और भाजपा के वोट बैंक पर अधिक असर देखने को मिलेगा। लेकिन यह तय माना जा रहा है कि भाजपा जिन सीटों पर इस बार भी जीत रही है, वहां उनकी जीत का मार्जिन घटना तय माना जा रहा है,वहीं, दूसरी ओर प्रदेश की जिन 3 लोकसभाओं बाड़मेर जैसलमेर,कोटा और बांसवाड़ा डूंगरपुर में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है, इनमें भाजपा के 13 विधायक है। इन सीटों पर कांग्रेस के सात और दो निर्दलीय विधायक भी है। ये दोनों ही निर्दलीय विधायक बाड़मेर से हैं।तीन लोकसभा सीटों पर पिछली बाद की तुलना में मतदान प्रतिशत बढ़ा है. बाड़मेर में वर्ष 2019 में 73.3% मतदान की तुलना में इस बार 76.5%, बांसवाड़ा में 72.9% के मुकाबले अबकी बार 74.41% तथा कोटा में 70.22% की तुलना में इस बार 71.86% प्रतिशत मतदान बढ़ा हैं।

प्रदेश में पहले चरण की 12 लोकसभाओं में 96 विधानसभा सीटें शामिल थी। इनमें से 94 विधानसभाएं ऐसी थी जहां पर वोट प्रतिशत एक से 14 प्रतिशत तक घटा था। ये हालात लगभग भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों पर काबिज विधायकों की सीटों पर रहे थे। भाजपा और कांग्रेस करीब 90 सीटों पर थी और दोनों ही दलों के पास बराबर सी सीटें थी। हालांकि चूरू की तारानगर और भरतपुर की कामां विधानसभा सीट पर वोट प्रतिशत बढ़ा था। उधर कांग्रेस की पिलानी और सूरजगढ़ विधानसभा में 14 प्रतिशत वोट प्रतिशत घटा था। उधर 10 या इससे अधिक वोट प्रतिशत घटने वाली सीटों में आमेर, चौमूं, हनुमानगढ़, बहरोड़, श्रीमाधोपुर, नदबई, खेतड़ी, मंडावा भी शामिल थी। कुल मिलाकर 10 प्रतिशत या इससे अधिक की श्रेणी वाली सीटों में कांग्रेस की 5 सीटें शामिल थी, जबकि भाजपा की चार सीटें रही. एक पर अन्य विधायक है।

इधर, वोट प्रतिशत कम होने पर भाजपा का मार्जिन कम होना माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस को सीधे सीधे फायदे का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि वोटिंग प्रतिशत कम होने पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के अपने अपने तर्क और गणित है. विधानसभावार देखा जाए तो भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 115 सीटों पर कांग्रेस से ज्यादा वोट लिए थे, वहीं कांग्रेस ने भी 79 सीटों पर भाजपा से बढ़त बनाई थी. विधायकों की जिम्मेदारी तय की गई थी कि वो अपने अपने क्षेत्र में पार्टी के लिए खुद को मिले वोटों से कितने ज्यादा वोट का इजाफा कर सकते हैं. वोटिंग कम होने पर भाजपा नेताओं का कहना है कि भले ही पिछले चुनाव में उन्हें मिली जीत का मार्जिन कम हो जाए, लेकिन सभी सीटें जीतेंगे. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वोट प्रतिशत इंगित करता है कि इस बार कांग्रेस को बम्पर सीटें मिलेगी।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान में मत प्रतिशत के कम होने का फायदा भाजपा और कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन

में से किस दल को मिलता है?

 

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