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मन के यह मोती…जीवन के सुख की ज्योति हैं…

मन के यह मोती…जीवन के सुख की ज्योति हैं…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

सोना खरीदने से बचा जाए, विदेश यात्रा न की जाए, कार पूलिंग को आदत में लाया जाए, पेट्रोल-डीजल बचाया जाए और किसान प्राकृतिक खेती करें। वास्तव में यह सभी बातें मन के वह मोती है जिनको अपनाकर जीवन को सुखी बनाया जा सकता है। हालांकि इन सब सुख के मंत्रों को जीवन में उतारना उतना ही कठिन है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम ‘ मन की बात ‘ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में उत्पन्न युद्ध जैसी स्थिति का उल्लेख करते हुए नागरिकों से संयम और उनकी अपील के असर पर बात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी देशवासियों से आग्रह किया था कि जहां तक संभव हो, कुछ समय के लिए सोना खरीदने से बचें। साथ ही उन्होंने विदेश यात्रा को टालने, कार पूलिंग को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की सलाह दी थी। इसके अलावा उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के बजाय प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त खेती को अपनाने तथा जैविक खाद के अधिक उपयोग का आग्रह भी किया था। मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि देशवासियों ने उनकी अपील को न केवल सुना, बल्कि उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है। उन्होंने बताया कि कई परिवारों ने निर्णय लिया है कि वे अपने पारिवारिक आयोजनों में इस बार नया सोना नहीं खरीदेंगे और आवश्यकता होने पर पुराने सोने को रीसायकल करके उपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई नागरिकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया है कि उन्होंने इस बार विदेश यात्राओं को टाल दिया है। इसके साथ ही कार पूलिंग को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है और अब कई लोग एक ही दिशा में जाने के लिए साझा वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि यातायात और प्रदूषण में भी कमी देखने को मिल रही है।

लोग अब बसों और मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि देश के कई हिस्सों में प्राकृतिक खेती और जैविक खाद की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है।

 

पीएम मोदी ने कहा, “मुझे इस बात की खुशी है कि इस ग्लोबल क्राइसिस का हम भारतीय मिलकर मुकाबला कर रहे हैं। मुझे विश्वास है जन भागीदारी की यही शक्ति हमें मजबूती देगी, हमें सफल बनाएगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में असम के दुर्लभ हरगिला पक्षी का जिक्र करते हुए उसके संरक्षण की प्रेरक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि जिसे कभी अशुभ माना जाता था, वही आज कई गांवों की पहचान बन चुका है। जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों से लोगों की सोच बदली और हरगिला संरक्षण एक जनआंदोलन बन गया। यह पक्षी पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यानि कि सोच बदल जाये तो व्यक्ति

उस सच के करीब पहुंच जाता है जिससे

जीवन की सम्पूर्ण दिशा बदली जा सकती है। हरगिला पक्षी के प्रति असम में लोगों की सोच का बदलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। और यदि हम सब भी अपनी सोच को बदलें और अपव्यय से छुटकारा पा जाएं तो अपना जीवन सुखी बनाने के साथ-साथ समाज और जन-जन को भी खुशहाल बना सकते हैं। तो आइए हम सब मिलकर संकल्प लें और मन के ऐसे मोतियों को अंगीकार कर लें। निश्चित तौर से मन की यह मोती हमारे जीवन में सुख की ज्योति बनकर उजाला कर देंगे…।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।