
कचरे में सड़ते मिले लाखों के गणवेश, सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग
बलरामपुर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल परिसर में जब बच्चों के अधिकार कूड़े के ढेर में पड़े मिले, तो यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
एक ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से आया है। यहां चांदो स्थित एक शासकीय स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में स्कूल गणवेश कचरे के ढेर में फेंके हुए मिले हैं—वो भी ऐसे नहीं, बल्कि बंडलों में, मानो बच्चों तक पहुंचने से पहले ही इनका ‘अंतिम संस्कार’ कर दिया गया हो।
जानकारी के अनुसार ये गणवेश सत्र 2024-25 में छात्रों को वितरण के लिए मंगाए गए थे, लेकिन अफसरों और जिम्मेदार कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते ये ड्रेस कभी बच्चों तक नहीं पहुंच सके। नतीजतन, जहां जरूरतमंद बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल जाते रहे होंगे, वहीं उनका हक कचरे में सड़ता रहा।यह पहला मामला नहीं है जब बलरामपुर का शिक्षा विभाग ऐसी शर्मनाक स्थिति में घिरा हो। इससे पहले भी गणवेश वितरण में गड़बड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं, यहां तक कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई और निलंबन तक की नौबत आ चुकी है। बावजूद इसके, हालात जस के तस बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? संकुल प्रभारियों को सौंपे गए गणवेश आखिर कूड़े तक कैसे पहुंच गए? क्या वितरण की मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों में ही होती रही?





