Vallabh Bhawan Corridors To Central Vista: मोदी मंत्रिमंडल विस्तार: MP से कौन हो सकते हैं भाग्यशाली

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Vallabh Bhawan Corridors To Central Vista: मोदी मंत्रिमंडल विस्तार: MP से कौन हो सकते हैं भाग्यशाली

बजट सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल होना लगभग तय है। संभवतः ये मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम फेरबदल होगा। इस बहाने भाजपा कई समीकरण बैठाने के साथ कई लोगों को संतुष्ट भी करना चाहती है। यदि बात मध्यप्रदेश की हो तो इस फेरबदल में 2 या 3 लोगों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। लेकिन, ये भाग्यशाली कौन होंगे, इसे लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं।

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जहां तक संभावनाओं की बात है तो जबलपुर से राकेश सिंह का नंबर लगभग तय माना जा रहा है। जो भी संभावित लिस्ट सामने आ रही है उसमें कॉमन नाम राकेश सिंह का ही है। इसके अलावा सीधी की सांसद रीति पाठक भी मंत्रिमंडल में जगह पाने वालों में से है। महिला होने के नाते उन्हें लिए जाने को सही भी माना जा रहा है।

याद रखा जाएगा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का यह फैसला ...

तीसरा नाम वीडी शर्मा का है, लेकिन उनके नाम के साथ पेंच है, कि उन्हें तभी लिया जाएगा जब उन्हें दोबारा प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया जाता। चौथा नाम राज्यसभा में पहुंचे आदिवासी नेता सुमेरसिंह सोलंकी का है। लेकिन, उन्हें जगह तभी मिलेगी जब फग्गनसिंह कुलस्ते को कोई और जिम्मेदारी दी जाए और उनकी जगह खाली हो! ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्य प्रदेश से केंद्रीय मंत्रिमंडल में किन नेताओं का भाग्योदय होगा।

सिंधिया खेमा अभी तक दिल नहीं जीत सका!

ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में आए लंबा समय हो गया। उनके साथ आए 22 लोग भी इतने समय में भाजपा के रंग में रंग गए। लेकिन, लगता है अभी भी भाजपा के लोगों से उनके दिल नहीं मिले। अगले विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें लेकर काफी कुछ बातें सुनने में आ रही है। इससे लगता है कि मूल भाजपा के लोग उन्हें अभी तक आत्मसात नहीं कर पाए। विधानसभा चुनाव से पहले धीरे धीरे ये साफ भी होने लगी है।

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सिंधिया के साथ 22 कांग्रेसी विधायक भाजपा में आए थे। लेकिन, उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर इनमें से 7 हार गए। अगले चुनाव में इनमें से किसी को तो टिकट मिलने से रहा। बाकी जो 15 चुनाव जीते उनमें से वर्तमान में शिवराज मंत्रिमंडल में तुलसीराम सिलावट जैसे किसी मंत्री को अपवाद स्वरूप छोड़ दिया जाए, तो बाकी के सिंधिया समर्थक मंत्रियों को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। कहीं न कहीं ये सभी मंत्री खतरे में तो हैं। गोविंद राजपूत, राजवर्धन दत्तीगांव, महेंद्रसिंह सिसोदिया और प्रधुम्न सिंह तोमर को तो टिकट न देने का माहौल भी बनाया जा चुका है। इसलिए कि इन सभी पर कुछ मामलों में उंगली उठ चुकी है।

जो स्थिति बनी है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि चुनाव को लेकर भाजपा में सब कुछ उतना सामान्य नहीं है, जितना दिखाने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि, अब भाजपा हाईकमान के सामने भी वो मजबूरी नहीं है कि उन सभी नेताओं को फिर टिकट दिए जाएं जो सिंधिया खेमे के हैं। सर्वें के नतीजे और राजनीतिक खामियां निकालकर कई को चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिएl

खतरे में है भाजपा के इन विधायकों की उम्मीदवारी!

प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा में भारी सुगबुगाहट है। इसलिए कि गुजरात चुनाव के नतीजों ने पार्टी को ऐसा फार्मूला दे दिया जिसने प्रदेश के भाजपा विधायकों में असुरक्षा भर दी। उन्हें लगने लगा है कि कहीं जमीनी फीडबैक उनकी जमीन ही न खिसका दे। क्योंकि, गुजरात में करीब 40 प्रतिशत विधायकों के टिकट काटने पर भी पार्टी ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और अब तक की सबसे ज्यादा सीटें जीती! इसलिए पार्टी को लग रहा है कि यही प्रयोग मध्यप्रदेश में भी आजमाया जा सकता है।

BJP's New Ticket Formula

गुजरात में भाजपा ने तीन बार से ज्यादा विधायक बने नेताओं का विकल्प ढूंढ लिया और शायद वही सब मध्यप्रदेश में भी हो। इसके अलावा बड़े नेताओं को भी टिकट से वंचित किया जा सकता है। भाजपा के लिए इस बार स्थिति इतनी भी आरामदायक नहीं है, कि किसी को भी टिकट दे दिया जाए और वो जीत जाए! लेकिन, हालात इतने बुरे भी नहीं कि उन्हें संभाला न जा सके।

दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी मध्यप्रदेश को लेकर जो विचार-विमर्श हुआ, उसके बाद ये तय समझा जा रहा है कि मध्यप्रदेश को एक बार फिर भाजपा की प्रयोगशाला बनाया जाएगा। गुजरात में भाजपा की जीत के शिल्पकार और वहां के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने प्रदेश के मंथन में अपना प्रजेंटेशन देकर ये हौंसला भी दिया कि इस प्रयोग को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा 60 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को घर भेजने का फैसला तो पार्टी पहले ही कर चुकी है। इन स्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि चुनाव से पहले भाजपा में बहुत कुछ ऐसा होगा, जो अब तक नहीं हुआ!

कहां गुम हैं यह पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता

धार जिले की गंधवानी सीट के कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमंग सिंघार की पिछले दो महीने से कोई खबर नहीं है। वे कहां हैं, उनकी गतिविधियां क्या हैं और उनका अगला राजनीतिक कदम क्या है ये पता नहीं चल रहा। दरअसल, वे जिस संकट में फंस गए थे, लगता है उससे अभी तक उबरे नहीं हैं। उनके लिए बीते बरस का नवंबर महीना ठीक नहीं रहा। उनके खिलाफ दो मामले दर्ज हुए थे। उसके बाद से ही वे नदारद हैं।

AICC के सचिव उमंग सिंघार

विधायक उमंग सिंघार के खिलाफ उनकी पत्नी ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर उमंग के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब ये नहीं बताया जा सकता कि कोई पत्नी अपने पति पर दुष्कर्म का मामला कैसे दर्ज करवा सकती है, पर ये हुआ है। उनकी जिस पत्नी उन पर ये इल्जाम लगाया वे भी कांग्रेस नेता हैं।

इसके अलावा पुलिस ने उनके घर में काम करने वाली एक महिला की शिकायत पर भी एक मामला दर्ज किया। इस महिला ने भी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना आरोप लगाया। महिला ने दुष्‍कर्म के साथ अप्राकृतिक कृत्य का भी आरोप लगाया था। इन दो मामलों के बाद से वे कहां हैं, ये कोई नहीं समझ पा रहा। शायद कांग्रेस हाईकमान को पता हो कि वे कहां हैं, क्योकि अगले टिकट का फैसला तो उन्हें ही करना है।

26 जनवरी के बाद IPS अधिकारियों की बड़ी तबादला सूची

मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह के बाद आईपीएस अधिकारियों की एक बड़ी तबादला सूची आ सकती है। इस सूची में एडीजी से लेकर SP तक प्रभावित होंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोई एक दर्जन जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। इसी प्रकार आधा दर्जन डीआईजी की पदस्थापना होगी। इसमें उन रिक्त स्थानों को भरा जाएगा जहां अभी किसी डीआईजी की पदस्थापना नहीं है।

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साथ ही ऐसे स्थानों को भी शामिल किया जाएगा जहां किसी अन्य डीआईजी के पास अतिरिक्त प्रभार है। बताया गया है कि हाल ही में प्रमोट हुए डीआईजी इसके लिए प्रयास भी कर रहे हैं। इसी प्रकार जिलों में एसपी बनने के लिए हाल ही में प्रमोट हुए आईपीएस भी जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं। इसी बीच पता चला है कि आईएएस अधिकारियों के छुटपुट ट्रांसफर 26 जनवरी के बाद होते रहेंगे।

24 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की घोषणा

नयी दिल्ली के सत्ता के गलियारों में इन दिनों गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों के चर्चे है। गणतंत्र दिवस समारोह 23 से 30 जनवरी तक चलेंगे। पद्म पुरस्कारों की घोषणा भी 24 जनवरी को होने की संभावना है। बताया जाता है सौ से अधिक विभूतियों को पद्म सम्मान दिया जा सकता है। गणतंत्र दिवस पर सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस को उत्कृष्ट सेवा के लिए वीरता और पुलिस पदकों से सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष भी इन पदकों की घोषणा सोमवार अथवा मंगलवार से शुरू हो जायेगी।

 MGMUT काडर:IPS के बाद शीघ्र ही IAS अधिकारियों की तबादला सूची

संयुक्त काडर प्राधिकरण की बैठक के दो सप्ताह के बाद एजीएमयूटी काडर के एक दर्जन से अधिक आईपीएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी हो गये। अभी आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी होनी।

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यह प्राधिकरण इस काडर के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले पर मुहर लगाता है। गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले इस प्राधिकरण के अध्यक्ष गृह सचिव होते हैं।

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Suresh Tiwari
सुरेश तिवारी

MEDIAWALA न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक सुरेश तिवारी मीडिया के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है। वे मध्यप्रदेश् शासन के पूर्व जनसंपर्क संचालक और मध्यप्रदेश माध्यम के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहने के साथ ही एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी और प्रखर मीडिया पर्सन हैं। जनसंपर्क विभाग के कार्यकाल के दौरान श्री तिवारी ने जहां समकालीन पत्रकारों से प्रगाढ़ आत्मीय रिश्ते बनाकर सकारात्मक पत्रकारिता के क्षेत्र में महती भूमिका निभाई, वहीं नए पत्रकारों को तैयार कर उन्हें तराशने का काम भी किया। mediawala.in वैसे तो प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खबरों को तेज गति से प्रस्तुत करती है लेकिन मुख्य फोकस पॉलिटिक्स और ब्यूरोक्रेसी की खबरों पर होता है। मीडियावाला पोर्टल पिछले सालों में सोशल मीडिया के क्षेत्र में न सिर्फ मध्यप्रदेश वरन देश में अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब रहा है।