शब्द, कला और भाव ही रचनाकार को पूर्णता देते हैं: प्रो. चौहान

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शब्द, कला और भाव ही रचनाकार को पूर्णता देते हैं: प्रो. चौहान

जनवादी लेखक संघ का आयोजन!

रतलाम : शब्दों का सौंदर्य, कला का वैभव और भावों की गहराई किसी रचनाकार को महत्वपूर्ण बनाते हैं। हर व्यक्ति अपने यौवनकाल में कवि होता है लेकिन निरंतर अध्ययन उसे संपूर्ण रचनाकार बनाता है । अध्ययन का एक रचनाकार के जीवन में बहुत महत्व होता है । समृद्ध रचनाकार सदैव अध्ययनशील रहे हैं।

उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित ‘एक रचनाकार का रचना संसार’ श्रृंखला के अंतर्गत दिवंगत रचनाकार ललिताशंकर सुरोलिया की कविताओं पर बातचीत के दौरान वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि सुरोलियाजी ने अपने जीवन संघर्षों और अपने श्रम को रचनाओं में अभिव्यक्ति प्रदान की। यह उनके ईमानदार रचनाकार होने का सबूत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े रचनाकारों के जीवन दर्शन को देखा जाए तो वे सब निरंतर अध्ययनशील रहते हुए हुए एक सफल रचनाकार बने। यह प्रवृत्ति हर रचनाकार में होना चाहिए।

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लेकिन अधिक अध्ययनशील होना किसी सांचे में ढलने के सामान भी होता है , इसलिए रचनाकार को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उस पर किसी रचनाकार का प्रभाव परिलक्षित न हो।

इस अवसर पर दुर्गेश सुरोलिया ने अपने पिता के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि पिता अपने रचनाकर्म के प्रति बहुत ईमानदार रहते थे। उन्होंने जैसा देखा, वैसा लिखा और अपनी रचना प्रक्रिया के माध्यम से सदैव समाज के दुःख दर्द को प्रतिबिंबित किया। कार्यक्रम में श्रीमती कल्पना सुरोलिया एवं सीमा सुरोलिया ने भी अपने संस्मरण साझा किए। इस अवसर पर सुरोलिया की रचनाओं का पाठ शहर के रचना प्रेमियों ने किया।

इन्होंने पढ़ीं रचनाएं!

आयोजन में प्रो.रतन चौहान, डॉ कैप्टन एनके. शाह, कल्पना सुरोलिया, सिद्दीक रतलामी, सीमा सुरोलिया, पूजा चोपड़ा, डॉ. स्वर्णलता ठन्ना, आईएल. पुरोहित, नरेंद्र सिंह डोडिया, कीर्ति शर्मा, हीरालाल खराड़ी, दुर्गेश सुरोलिया, श्याम सुंदर भाटी, नानूराम, विनोद झालानी, लक्ष्मण पाठक, पद्माकर पागे, प्रकाश हेमावत, अनीस खान, दिलीप जोशी, मुकेश सोनी, लक्ष्मी राव, गीता राठौर, मांगीलाल नगावत, जवेरीलाल गोयल, एस.के. मिश्रा ने रचनाएं पढ़ी। संचालन आशीष दशोत्तर ने तथा आभार रणजीत सिंह राठौर ने माना।

अगला आयोजन डॉ. ओमप्रकाश ऐरन पर!

जनवादी लेखक संघ की श्रृंखला ‘एक रचनाकार का रचनाकार’ के तहत माह जून के दूसरे रविवार को दिवंगत रचनाकार डॉ. ओमप्रकाश ऐरन की रचनाओं का पाठ शहर के रचनाप्रेमी करेंगे। इसके पश्चात उन पर बातचीत होगी। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ जावेदी ने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया हैं!