Monday, July 22, 2019
बालाकोट टर्निग पाईंट था तो नतीजे तय करेंगे देश की दिशा

बालाकोट टर्निग पाईंट था तो नतीजे तय करेंगे देश की दिशा

एक सप्ताह बाद सारी ईवीएम  मशीनें स्ट्रागरूम में कैद होते ही सभी उम्मीदवारों के भाग्य मशीनों की गिरफ्त में होंगे । 19 मई से 23 मई की पूर्व रात्रि तक मतदान बाद के सर्वेक्षण धड़कने बढ़ाते घटाते रहेंगे । उम्मीदवारों  की धमनियों में रक्त संचार नींद उड़ाएगा । ज्योतिषियों और सटोरियों के अनुमान कहीं खुशी, कहीं गम लेकर आएंगे। नरेन्द्र मोदी छठे चरण के मतदान के समय और राहुल गांधी अपना वोट डालने के बाद जीत का दावा कर रहे हैं  मगर दोनों की बाडी लेंग्वेज पढ़ना  जरूरी है। राहुल गांधी खुद अपने उठाए मुद्दों पर कह बैठे ये मेरे नहीं,  कांग्रेस  के नहीं,  जनता के सवाल  हैं और जो भी जनता फैसला  करेगी , वह हमें स्वीकार होगा। मोदी, लहर का दावा करते हुए चुनाव जीतने की बात ठोंक  कर कह रहे हैं । उनकी बाडी लेंग्वेज उनके कथन से कदमताल करती दिखती है। राहुल  गांधी के बयान बाडी लेंग्वेज का साथ नहीं दे रहे।

याने कांग्रेस  चाहकर भी अकेले  सत्ता प्राप्ति का दावा नहीं कर रही, उसका आंकलन यह है कि भाजपा विरोधी दल इतनी सीटें ले आएंगे कि उनके समर्थन से कांग्रेस सत्ता तक पहुंच जाएगी। सत्ता की चाबी उसके पास होगी या सत्ता का रिमोट, यह उसके थींक टैंक के  सामने लाख टके का सवाल है । वहीं मोदी- शाह की जोड़ी पूरी तरह आश्वस्त है कि वे पर्याप्त बहुमत के साथ  सत्ता  में  लौट रहे हैं । भाजपा अकेले 272 के आकड़े को पार कर जाएगी, मगर पार्टी  के एक समूह को लगता है कि भाजपा  इस आकड़े को नहीं छू पाएगी और मोदी को परे कर नितिन गडकरी या कोई और नेता जो बहुमत आकडा जुटा सके सरकार  बनाएगा। राजनीतिक पंडितों ने भी इसी लाईन पर अपने अनुमानों  को मोड़ दिया है । मीडिया का एक बड़ा वर्ग इन अनुमानों को खारिज कर रहा है। उसका मानना है यह अनुमान बाराकोट आपरेशन  के बाद स्वयं ही ध्वस्त  हो गया। खुद मोदी विरोधियों ने ही सबूत मांगकर चुनाव की धारा बदल दी। राजनीति में एक गलती सत्ता से वंचित कर देती है और एक सही फैसला हारी बाजी को जीत में  तब्दील  कर देता है। 

2014 के मुकांबले राहुल गांधी आक्रामक हुए हैं पर अपनी बात से जनता को सहमत कराने की कला नहीं  सीख पाए हैं । उनके मुकाबले प्रियंका  गांधी  ज्यादा परिपक्व  हैं मगर बिखरे संगठन और लचर मुद्दों की वजह से वे उतनी आक्रामकता से जनता के बीच उपस्थिति दर्ज नहीं  करा सकी।  सवा चार सौ उम्मीदवारों को मैदान में जितने जोश से उतारने का काम कांग्रेस  ने किया उतने जोशोखरोश  से चुनाव  नहीं  लड़ पाए। यह कांग्रेस आज नहीं मानेगी,  23 मई को जरूर मान लेगी । चार सौ में से कांग्रेस एक तिहाई  जीत ले बहुत बड़ी  बात होगी। भाजपा तो कांग्रेस को आधा सैकड़ा भी नहीं देना चाहती। उत्तरप्रदेश में  भाजपा का दावा सही निकला और मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में उसने जमीन पा ली तो नरेन्द्र मोदी ही शपथ लेंगे। सपा-बसपा गठबंधन  नहीं चला तो दक्षिण  के क्षेत्रीय दल मोदी-शाह के सामने नतमस्तक  होंगे, वहीं भाजपा अपने अटल-आडवाणी  युग को बहुत पीछे छोड़ देगी।सपा-बसपा ने चमत्कार कर दिया तो फिर भले भाजपा सत्ता  में लौट आए पर भाजपा के भीतर एक ऐसा सत्ता  संघर्ष छिड़ेगा जिससे उसको अपने आपको  बचा पाना कठिन  होगा। 23 मई राजनीतिक दलों का भाग्य  लिखेगा, उससे ज्यादा देश किस विचार धारा पर आगे बढ़ेगा यह भी तय होगा।

0 comments      

Add Comment


सतीश जोशी

पिछले चालीस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे, राजनीतिक विश्लेषक, टिप्पणीकार, नईदुनिया, भास्कर, चौथा संसार सहित प्रदेश के कई समाचार पत्रों के लिए लेखन। 


आदिवासी जनजीवन पर एक पुस्तक, राजनीतिक विश्लेषण पर पांच पुस्तकें, राज रंग, राज रस, राज द्रोह, राज सत्ता, राज पाट।  


रक्षा संवावदाता, रिपोर्टिंग के क्षेत्र में खोजी पत्रकारिता में महारथ हांसिल। प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में सांध्य दैनिक 6pm के समूह सम्पादक, इंदौर में कार्यरत।


संपर्क : 9425062606