Monday, September 23, 2019
अयोध्या मामला सुनवाई का 21वां दिन, सुन्नी वक्फ़ बोर्ड का यू टर्न, कहा- निर्मोही अखाड़ा का दावा नहीं बनता !

अयोध्या मामला सुनवाई का 21वां दिन, सुन्नी वक्फ़ बोर्ड का यू टर्न, कहा- निर्मोही अखाड़ा का दावा नहीं बनता !

मीडियावाला.इन।

अयोध्या मामले में आज सुनवाई के 21वें दिन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका के दावे का विरोध करते हुए कहा कि विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़े का दावा नहीं बनता क्योंकि विवादित ज़मीन पर नियंत्रण को लेकर दायर उनका मुकदमा, सिविल सूट दायर करने की समयसीमा ( लॉ ऑफ लिमिटेशन ) के बाद दायर किया गया था। सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलील दी कि 22-23 दिसंबर 1949 को विवादित जमीन पर रामलला की रात मूर्ति रखे जाने के करीब दस साल बाद 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने सिविल सूट दायर किया था जबकि सिविल सूट दायर करने की समयसीमा छः साल थी। गौरतलब है कि निर्मोही अखाड़ा ने दलील दी थी कि उनके सिविल सूट के मामले में लॉ ऑफ लिमिटेशन का उल्लंघन नहीं हुआ है क्योंकि 1949 में तत्कालीन मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 145 के तहत विवादित जमीन को अटैच ( प्रशासनिक कब्जे में ) कर दिया था। और उसके बाद मजिस्ट्रेट ने उस विवादित जमीन को लेकर कोई आदेश पारित नहीं किया। निर्मोही अखाड़ा ने दलील दी थी कि जबतक मजिस्ट्रेट ने आखरी आदेश पारित नहीं किया लॉ ऑफ लिमिटेशन वाली छः साल की सीमा लागू नहीं होती! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ़ बोर्ड दोनों की याचिका को इसी लॉ ऑफ लिमिटेशन के आधार पर ख़ारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 'कॉज ऑफ एक्शन' यानि मजिस्ट्रेट ने विवादित जमीन को अटैच करने का आदेश 1949 का था इसलिए छः साल बाद दायर दोनों सूट 'टाइम बार्ड' यानी समयसीमा के बाद दायर किये गए हैं। निर्मोही अखाड़ा ने 1959 में और सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने 1961 में सूट दायर किया था।

'लॉ ऑफ लिमिटेशन' के जिस नियम का हवाला देकर राजीव धवन निर्मोही अखाड़ा के दावे का विरोध कर रहे हैं वही नियम सुन्नी वक्फ़ बोर्ड पर भी लागू होता है! क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के साथ सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की याचिका को भी 'टाइम बार्ड' मानते हुए ख़ारिज कर दिया था। ऐसे में एक सवाल हिंदू पक्षकारों के मन मे जरूर उठ रहा होगा कि सुन्नी वक्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़े के साथ जिस डाल पर ( लॉ ऑफ लिमिटेशन ) पर बैठा है सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन उसी डाल को क्यों काट रहे हैं! राजीव धवन की दलील शुक्रवार को भी जारी रहेगी।

गौरतलब है कि सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने अपने दलील की शुरुआत में निर्मोही अखाड़ा का समर्थन करते हुए कहा था कि 'अखाड़ा को विवादित जमीन के बाहरी हिस्से यानी राम चबूतरा पर पूजा करने का अधिकार है और इसे लेकर वक्फ़ बोर्ड को कोई ऐतराज नहीं है। अयोध्या मामले में आज सुनवाई के 21 वें दिन मात्र डेढ़ घण्टे की सुनवाई हुई क्योंकि सुनवाई करने वाली संविधानपीठ दोपहर 2 बजे के बाद बैठी थी।              Source -News24

0 comments      

Add Comment