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Uproar Due to Forest Department’s Action : निजी जमीन पर वन विभाग की कार्रवाई से हंगामा, रेंजर ने मारपीट की, महिला के गंभीर आरोप!

धार के घोड़ाबाब गांव में ट्रैक्टर जब्ती पर विवाद, ग्रामीण बोले हमारी निजी जमीन पर कार्रवाई क्यों!

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Uproar Due to Forest Department’s Action : निजी जमीन पर वन विभाग की कार्रवाई से हंगामा, रेंजर ने मारपीट की, महिला के गंभीर आरोप!

Indore : धार जिले के तिरला क्षेत्र के घोड़ाबाब गांव में वन विभाग की कार्रवाई विवादों में घिर गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी निजी जमीन पर ट्रैक्टर से जुताई कर रहे थे, तभी रेंजर महेश अहिरवार मौके पर पहुंचे और बिना दस्तावेज देखे मारपीट करने लगे। परिजनों का दावा है कि रेंजर ने ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की और बंदूक निकालकर जान से मारने की धमकी दी। ग्रामीणों ने रेंजर के नशे में होने का भी आरोप लगाया।

बंदूक लोड करते वक्त एक कारतूस जमीन पर गिरा, जिससे परिवार के लोग दहशत में आ गए और वहां से भाग गए। ग्रामीणों ने बताया कि हमनें कहा कि दस्तावेज देख लो, लेकिन बगैर दस्तावेज देखें ट्रैक्टर को जब्त कर धार वन विभाग कार्यालय ले जाया गया। इसके विरोध में 70 से अधिक ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रेंजर पर शराब के नशे में होने, गाली-गलौज, मारपीट और रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिलाओं ने भी अभद्रता करने की बात कही।

वन विभाग का कहना है कि ट्रैक्टर सरकारी भूमि (कक्ष क्रमांक 130) पर चल रहा था और कार्रवाई विधिसम्मत थी। रेंजर अहिरवार ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया। वहीं डीएफओ अशोक सोलंकी ने कहा कि घटना की पूरी जांच करवाई जाएगी। ट्रैक्टर की जब्ती और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी। उधर, ग्रामीण विवाद के बीच ट्रैक्टर वापस ले गए। बताया जा रहा है कि रेंजर अहिरवार पहले भी कई विवादों में रह चुके हैं और पूर्व में निलंबन का सामना कर चुके हैं।

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वन विभाग वाले रिश्वत मांगते हैं और मुर्गा-बकरा मांगते हैं
ग्रामीण महिला सीला वास्कल का कहना है कि हमारे पास पट्टा और पावती सारे दस्तावेज हैं। हम खेत में खाद डाल रहे थे, तभी रेंजर अहिरवार आए और बिना कुछ सुने ट्रैक्टर ले गए। हमने कागज दिखाने का बोला, फिर भी उन्होंने परिजनों को धक्का दिया, लकड़ी से मारा और धमकी दी कि ज्यादा बोले तो गोली मार देंगे। हम सब डर के मारे भाग गए और फिर धार वन विभाग पहुंचे।

महिला ने आरोप लगाया कि वन विभाग वाले 10-20 हजार की रिश्वत लेते हैं और बोलते हैं कि तुम जंगल से लकड़ी काटो और जमीन घेरों में पट्टा बनाकर दूंगा। धर्मेंद्र जो पहले नाकेदार था, अब डिप्टी बन गया है, वह भी पैसे मांगता है। रतन दुबलिया का पट्टा भी उसने 50 हजार में बनाया। वह मुर्गे-बकरे खाने की बात करता था, तो हमने उसको मुर्गे-बकरे भी खिलाए और टिफिन भी दिया।