भारती मामले पर महाभारत होना तो तय ही था…

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भारती मामले पर महाभारत होना तो तय ही था…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

दिल्ली की विशेष अदालत द्वारा दतिया विधायक रहे राजेन्द्र भारती को तीन साल की सजा सुनाने पर मध्य प्रदेश विधान सभा में आनन-फानन में सीट रिक्त किए जाने की प्रक्रिया पर

महाभारत होना तय ही था। हो सकता है कि ऐसा फैसला अगर किसी भाजपा विधायक के खिलाफ आता तो शायद विधिवत कोर्ट का आदेश मिलने जैसी औपचारिकता की आड़ में सीट रिक्त करने की प्रक्रिया को थोड़ा खींचा जा सकता था, लेकिन अंततः तब भी सीट नियमानुसार रिक्त करवानी ही पड़ती। पर त्वरित कार्रवाई पर विपक्ष को ऐसा प्रतीत हुआ कि राजेन्द्र भारती के मामले में मध्य प्रदेश विधान सभा नियमों का पालन करने पर ही नजर टिकाए हुए थी और फैसला आते ही रात में ही सीट रिक्त कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूरा कर लिया गया। इसे मध्य प्रदेश विधानसभा की बेहतर कार्यशैली माना जा सकता है। पर सभी मामलों में विधान सभा एक जैसा मापदंड रखकर विपक्ष का भरोसा जीतने में कामयाब हो, शायद तब ही विपक्ष इस कार्यशैली को स्वीकार कर पाएगा। और तब भारती जैसे गंभीर मामलों पर विधानसभा की त्वरित कार्यवाही पर सवालिया निशान का सवाल ही नहीं रह पाएगा। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष नरेन सिंह तोमर के कार्यकाल में विधानसभा में दलगत भावना से ऊपर उठकर कार्य होने की पुष्टि होती रही है लेकिन भारती के मामले में विपक्ष द्वारा विधानसभा की कार्रवाई पर उंगली उठाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को स्थिति को स्पष्ट करने सामने आना ही पड़ा।

मूल बात यह है कि मध्य प्रदेश की सोलहवीं विधान सभा के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 22-दतिया से निर्वाचित सदस्य राजेन्द्र भारती के विरुद्ध राउज एवेन्यू जिला न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा अपराध सिद्ध होने के फलस्वरूप दिनांक 2 अप्रैल, 2026 को तीन वर्ष के कारावास एवं 1 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने की सजा सुनाई गई। और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 10 जुलाई, 2013 के पालन में राजेन्द्र भारती 02 अप्रैल, 2026 से विधान सभा की सदस्यता से निरर्हित कर दिए गए। इससे मध्यप्रदेश विधान सभा में एक स्थान रिक्त हो गया। मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा रिक्तता संबंधी आदेश जारी किया गया। और 2 अप्रैल 2026 को ही मध्य प्रदेश राजपत्र में सूचना प्रकाशित कर दी गई। ऐसे में विपक्ष के नाते कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक ही था। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मामले पर सफाई देते हुए भरोसा दिलाया कि राजेन्द्र भारती के मामले में विधि सम्मत कार्रवाई की गई है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) का प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति का दोषसिद्ध होने पर दो वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सजा दी जाती है, तो वह दोषसिद्धि की तिथि से ही अयोग्य हो जाता है। राजेंद्र भारती के मामले में 3 वर्ष की सजा होने से यह प्रावधान पूरी तरह लागू होता है तथा विधायक की सीट स्वतः रिक्त हो जाती है। अत: यह कार्रवाई विधि सम्मत हुई है। तोमर ने विधानसभा की कार्यवाही के समर्थन में उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व में भी आशा रानी सिंह की सदस्यता उन्हें 10 वर्ष की सजा होने पर इसी आधार समाप्त की गई थी। 2019 में प्रह्लाद लोधी की भी सदस्यता इसी प्रकार 2 वर्ष की सजा होने पर समाप्त की गई थी फिर वह हाई कोर्ट से स्थगन ले आये थे तो उनकी सदस्यता बहाल की गई थी। तोमर ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सदैव दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर कार्य किया है। तोमर ने कहा कि अदालत के आदेश का पालन किया गया है। आगे भी न्यायालय जैसा निर्णय देगा हम वैसा पालन करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म होने पर कहा कि यह मामला पूरी तरह न्यायालय से संबंधित है और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को न्याय के लिए 60 दिनों का समय दिया था, लेकिन इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा आधी रात को विधानसभा सचिवालय खुलवाकर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई। उन्होंने इसे सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाई बताते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज का मामला लंबित है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो सरकार के दोहरे मापदंड को उजागर करता है। पटवारी ने कहा कि “नरेंद्र मोदी के नए भारत में लोकतंत्र आखिरी सांसें ले रहा है। भाजपा ने लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रियाओं को समाप्त कर दिया है, जिसे कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे आधी रात में भाजपा के काले कारनामे निरूपित किया। उन्होंने सवाल किया कि जब मामला न्यायालय में है और अपील के लिए समय दिया गया है, तो फिर इतनी जल्दबाजी क्यों? यह साफ है कि राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है कि विपक्ष के विधायकों को किसी भी तरह प्रक्रिया से बाहर किया जाए, चाहे वह दबाव हो, पुराने मामलों को हवा देना हो या फिर इस तरह की जल्दबाजी में कार्यवाही। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही की ओर बढ़ता कदम है।

तो राजेंद्र भारती मामले में फिलहाल तीन दिन का इंतजार बाकी है। इसके बाद हाईकोर्ट क्या राहत देता है, यह सामने आ जाएगा। और तब विधानसभा को हो सकता है एक बार फिर त्वरित कार्रवाई करने के लिए आगे आना पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की तरफ तब सबकी निगाहें रहेंगी। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अपील के बाद भी भारती को राहत मिले। हालांकि, यह तो सभी को मालूम ही था कि भारती के मामले में देर रात की गई त्वरित कार्रवाई पर भाजपा-कांग्रेस के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के नाते महाभारत होना तो तय ही था।

 

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।