
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिना अधिकार विधायक बेटे ने खंगाले रिकॉर्ड, कुर्सी पर बैठ दिए निर्देश
यूपी के रामपुर में विधायक के बेटे ने स्वास्थ केंद्र का न केवल निरीक्षण किया बल्कि अधीक्षक की कुर्सी पर बैठ कर स्टाफ को तलब किया। सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं जबकि अधीक्षक डॉ राजीव दीक्षित का कहना है कि स्वार के अपना दल एस विधायक शफीक अहमद अंसारी के आने की सूचना थी। उनकी जगह विधायक के बेटे उमेर अंसारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और स्वास्थ केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने चेयर पर बैठने को नहीं कहा था, विधायक पुत्र खुद बैठ गए थे। अपना दल एस के पदाधिकारियों का कहना है कि बेटे विधायक प्रतिनिधि हैं और इस नाते उन्होंने निरीक्षण किया।

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के स्वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां स्वार-टांडा से अपना दल (एस) के विधायक शफीक अहमद अंसारी के पुत्र द्वारा औचक निरीक्षण किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

बिना किसी आधिकारिक अधिकार के खंगाला रिकॉर्ड
वीडियो में विधायक पुत्र मरीजों का हाल-चाल लेते हुए, रजिस्टर चेक करते हुए और यहां तक कि सीएचसी अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर डॉक्टरों व स्टाफ को निर्देश देते नजर आ रहे हैं. हालांकि, इस पूरे मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार किसी जनप्रतिनिधि के परिजन को इस तरह निरीक्षण करने का अधिकार नहीं है.
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विधायक का पुत्र बिना किसी आधिकारिक अधिकार के अस्पताल के विभिन्न रिकॉर्ड खंगाल रहा है और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश देता नजर आ रहा है. इतना ही नहीं, वह सीएचसी अधीक्षक की कुर्सी पर बैठा भी दिखाई दे रहा है, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विधायक स्वयं निरीक्षण कर सकते हैं, लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को ऐसी अनुमति नहीं है.
मामले पर सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की टीम गठित
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं. उनके अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एडिशनल सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की टीम गठित की जा रही है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
फिलहाल यह मामला ‘सत्ता की हनक’ बनाम ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ की बहस में बदलता नजर आ रहा है. अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि इस पूरे घटनाक्रम में कौन जिम्मेदार है और क्या कार्रवाई होती है.





