Congress: 8 महीने बाद भी कार्यकारिणी नहीं बना पाने वाले जिला अध्यक्षों को मिली हिदायत, जल्द बनाओ कार्यकारिणी

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Congress: 8 महीने बाद भी कार्यकारिणी नहीं बना पाने वाले जिला अध्यक्षों को मिली हिदायत, जल्द बनाओ कार्यकारिणी

3 महीने का हिसाब-किताब ले रहे प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी

भोपाल. मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में चल रही समीक्षा कई जिला अध्यक्षों पर भारी पड़ सकती है। उज्जैन और भोपाल संभाग के जिला अध्यक्षों के कामकाज की हाई-लेवल समीक्षा बुधवार को भोपाल के कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में हुई। जिन जिलों में कार्यकारिणी नहीं बनी है। वहां के अध्यक्षों को प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हिदायत दी गई है कि जल्द कार्यकारिणी बनाएं। समीक्षा के लिए सभी जिला अध्यक्षों से उनकी कार्यकारिणी की स्थिति की अपडेट बुलाई गई है। बनाए गए पदाधिकारियों में कौन कितना काम कर रहा है, कार्यकारिणी नहीं बनी तो क्यों नहीं बन सकी। सभी जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा की गई। इसलिए यह माना जा रहा है कि यह समीक्षा महज औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि काम काज नहीं करने वाले जिला अध्यक्षों की संगठनात्मक सर्जरी के रूप में देखी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले 8 महीनों में जिन जिला अध्यक्षों ने बिना उचित कारण के अपनी कार्यकारिणी का गठन नहीं किया, उनकी कुर्सी पर ज्यादा खतरा है। समीक्षा के पहले दिन उज्जैन और भोपाल संभाग के जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा में हरीश चौधरी ने साफ संकेत दिए कि अब सिर्फ पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं, बल्कि जमीनी सक्रियता, बूथ प्रबंधन और चुनावी तैयारियों में ठोस परिणाम दिखाने होंगे। इतने अरसे बाद भी कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाना जिलाध्यक्ष की उदासीनता के रूप में उन्होंने माना है।

बताया जा रहा है कि समीक्षा के दौरान पार्टी के कार्यक्रम, संगठन विस्तार, स्थानीय मुद्दों पर पार्टी की पकड़ जैसे बिंदुओं पर भी बातचीत की गई। खास बात यह है कि इस बार रिपोर्ट सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि फील्ड इनपुट और फीडबैक के आधार सीधे एआईसीसी ने ही तैयार की है। यह रिपोर्ट लेकर हरीश चौधरी भोपाल आए हुए हैं। संभागवार जिला अध्यक्षों के काम काज की समीक्षा शनिवार तक चलेगी।

विधानसभा प्रभारियों का ट्रैनिंग प्रोग्राम

भोपाल और उज्जैन संभाग के जिला अध्यक्षों के काम काम की समीक्षा से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विधानसभा प्रभारियों का ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हुआ, जो संगठन के भविष्य की कार्ययोजना पर आधारित था। इस प्रशिक्षण में प्रभारियों को उनके अधिकार, दायरे और जिम्मेदारियों का स्पष्ट खाका दिया गया है। उन्हें साफ तौर पर कहा गया है कि वे ब्लॉक से लेकर बूथ तक संगठन को मजबूती देने का काम करना है। उन्हें ब्लॉक से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यदि कोई पदाधिकारी पार्टी लाइन से हटकर काम करता है या अपेक्षित प्रदर्शन नहीं देता, तो उसे हटाने की सिफारिश सीधे प्रभारी करेंगे।