भारत वर्ष की सांस्कृतिक एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने शंकराचार्य ने देश को एक सूत्र में पिरोया!   

सनातन धर्म सभा ने श्री शंकराचार्य जयंती मनाई!

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भारत वर्ष की सांस्कृतिक एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने शंकराचार्य ने देश को एक सूत्र में पिरोया!

Ratlam : आद्यगुरु शंकराचार्य विश्व में दार्शनिक व विचारक जगत के सबसे अधिक देदीप्यमान रत्न है बड़े-बड़े विद्वानों ने उन्हें दार्शनिक सार्वभौम और जगतगुरू कहकर सम्मानित किया है। उन्होंने संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए एवं भारत की सांस्कृतिक एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने के लिए चार धाम की स्थापना की जो कि जीवन में एक बार करना प्रत्येक हिन्दू का आध्यात्मिक लक्ष्य होता है। वास्तव में यह सिर्फ तीर्थाटन ही नहीं है वरनू कश्मीर से कन्याकुमारी तक संपूर्ण भारत को एक करने हेतु व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़ने का कार्य है जिससे भारत की सांस्कृतिक एकता का सूत्रपात होता है।

 

चार धाम में चार मठ और चारों वेदों के एक-एक वाक्य जिसमें मानव के संपूर्ण जीवन का लक्ष्य परिलक्षित होता हैं। अहं ब्रह्मस्मि, तत्वमसि, अयमात्म ब्रह्म तथा प्रज्ञानां ब्रह्म की व्याख्या भी की गई। उक्त उदगार श्री सनातन धर्म सभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति तथा सर्व ब्राह्मण समाज के द्वारा संयुक्त रूप से श्री शंकराचार्य जयंती पर आयोजित महोत्सव के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. खुशबू राठी ने समारोह में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। डा. खुशबू राठी के अनुसार शंकराचार्य विश्व में दार्शनिक व विचारक जगत के सबसे अधिक देदीप्यमान रत्न है बड़े-बड़े विद्वानों ने उन्हें दार्शनिक सार्वभौम और जगतगुरू कहकर सम्मानित किया है।

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स्वागत भाषण मे सनातन धर्म सभा अध्यक्ष अनिल झालानी ने शंकराचार्य के संपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा आचार्य शंकर अद्वैत सिद्धांत के प्रधानाचार्य ही नहीं अपितु एक युगप्रर्वतक थे। जब भारतवर्ष में वैदिक धर्म का सूर्य अस्तांचल की ओर जा रहा था और लोग उपासना और कर्मकांड से विमुख हो रहे थे। तब उन्होंने वैदिक धर्म का पुर्नरुद्धार किया अपनी छोटी सी आयु में जो आलौकिक कार्य किए वे बड़े विस्मयजनक व अद्वितीय हैं। 32 वर्ष के जीवनकाल में उन्होंने जो किया वो एक साधारूण व्यक्ति सोच भी नहीं सकता है। इस अवसर पर स्वामी सुजानंदजी एवं महर्षि संजय दवे ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर श्री सनातन धर्म सभा द्वारा शंकराचार्य की एक छवि चित्र का विमोचन किया गया। जिसका सनातन धर्म तथा महारुद्र यज्ञ समिति में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से वर्षों से सहयोग व समर्पण करते आ रहें हैं हजारों आधार स्तंभों को भेट देने का शुभारंभ किया गया। आदि गुरु शंकराचार्य की जन्म जयंती पर सर्व ब्राह्मण समाज की और से यजमान मुकेश जोशी दंपति द्वारा सम्पन्न अभिषेक पंडित परसाई ने कराया।

इस अवसर पर सर्व श्री नवनीत सोनी, पंडित रामचंद्र शर्मा, रमेश व्यास, लालचंद टाक, तारा देवी सोनी, हंसा व्यास, राखी व्यास, रजनी व्यास, सर्व ब्राह्मण महासभा के पुष्पेंद्र जोशी, नरेंद्र जोशी, प्रवीण उपाध्याय, ओम प्रकाश त्रिवेदी, हरीश सुरोलिया, मोहनलाल भट्ट, शैलेंद्र तिवारी, बसंत पंड्या, सुभाष शर्मा, सुरेश दवे, सतीश पुरोहित, अविनाश व्यास सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत मे आचार्य पंडित दुर्गा शंकर जी ओझा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संचालन नरेंद्र त्रिवेदी ने तथा आभार मनोहर पोरवाल ने माना!