पृथ्वी दिवस विशेष – तीन कविताएँ

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पृथ्वी दिवस विशेष – तीन कविताएँ

पृथ्वी दिवस

धरती माँ की गोद निराली
जीवन का आधार है,
हरियाली की चादर ओढ़े,
सुंदर यह संसार है।

नदियों का कल-कल संगीत,
पवन सुगंधित करती गान।
इसके आँचल में ही मिलता,
प्राणी को जीवन वरदान।

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फल फूल अन्न और औषधि
मिट्टी में संवर्धित पदार्थ।
उपयोगी संसाधन कितने!
देती वसुधा बिना स्वार्थ।

पर मानव ने लोभ में आकर,
घाव दिए हैं गहरे आज,
कटते वन, सूखें जलस्रोत,
बढ़ता जाता प्रदूषण-राज।

रोती है यह ममतामयी माता
सुन लो इसकी मौन पुकार,
संभल जाओ अब भी मानव,
नहीं तो होगा अंधकार।

आओ मिलकर व्रत ये लें हम,
रक्षा वसुधा की धर्म बने।
हरित धरा का स्वप्न सजाएँ,
जीवन फिर से कर्म बने।

एक-एक पौधा रोपें हम,
जल का भी सम्मान करें,
माँ के इस उपकार तले हम,
उसका सदा गुणगान करें।

धरती ही तो स्वर्ग हमारी,
इसका मान बढ़ाएँ हम,
प्रेम, दया और शुद्ध भाव से,
इसको सदा सजाएँ हम।

पृथ्वी दिवस का यह संदेश,
हर दिल में उजियारा हो,
सुरक्षित, सुंदर, स्वच्छ धरा का,
फिर से सृजन हमारा हो।

डॉ. प्रतीक्षा शर्मा
इंदौर (मध्यप्रदेश)

2.धरा का जन्मदिवस

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वंदिता श्रीवास्तव की कलाकृति

धरा का जन्मदिवस है आज,
बुलाया उसने सौर परिवार ।
सूर्य को दिया निमंत्रण आज,
आ गया वह किरणों के साथ।
चंद्र को दिया निमंत्रण आज,
लाया वह अपनी कलाएं साथ,
तारों को दिया निमंत्रण आज।
आ गए वह परिवार के साथ,
देवों को दिया निमंत्रण आज।
आ गए वह लेकर परिवार,
गगन को दिया निमंत्रण आज।
आ गया वह लेकर उपहार,
क्षितिज पर अंबर आया आज।
धरा पहुंची है मिलने आज,
धरा ने पहनाई जय माल।
गूंज गया जय जय ,
जय का गान का गान ।
धरा का जन्म दिवस है आज,
बुलाया उसने सौर परिवार ।।

निर्मला मूंदडा

3.धरा दिवस

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मनावे सभी धरा दिवस
सभी ने की तैयारी है
सौगात ले आए सभी
तभी तो ये हरियाली है

परिधान नव पल्लव के
पेड़ों ने पहने और
पक्षियों को पनाह दी
नव नीड़ निर्माण को

सूरज ने किरणों से अपनी
पंडाल प्रज्ज्वलित कर डाला
चम्पा चमेली की खुशबू को
हवाओं ने सर्वत्र फैलाया

मानव मन भी है अब जागृत
करे प्रयास धरा की रक्षा की
इसलिए खुश है धरा भी
फैलाए खुशहाली सब ओर

अपर्णा खरे

Earth Day Special- 22 अप्रैल 2026: हमारी शक्ति-हमारी पृथ्वी