
पुस्तक चर्चा : सृजन संवाद साहित्य संस्था द्वारा सुषमा व्यास ‘राजनिधि’ केकहानी संग्रह “तीसरे कदम की आहट” पर चर्चा
इंदौर.सृजन संवाद साहित्य संस्था द्वारा चर्चित लेखिका सुषमा व्यास ‘राजनिधि’ के कहानी संग्रह तीसरे कदम की आहट पर चर्चा की गई । कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ शशि निगम ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।सृजन संवाद की अध्यक्ष डॉ दीपा मनीष व्यास ने स्वागत भाषण दिया । सुषमा व्यास राजनीधि ने लेखकीय उद्बोधन दिया व अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताया ।इंदौर के साहित्यकार हरेराम वाजपेयी जी ने कहानी संग्रह पर सारगर्भित चर्चा की । उन्होंने कहा कि सुषमा व्यास राजनिधि की कहानियां वर्तमान के युवाओं और महिलाओं में नवजागरण की शक्ति प्रदान करती है।
तीसरे कदम की आहट11 कहानियों का संग्रह है ।साहित्यकार हरेराम बाजपेई ने कहानियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हर कहानी की विषय वस्तु अलग है। हर कहानी पाठक को उसपर कुछ सोचने के लिए विवश करती है। सुषमा जितनी सरल सहज स्वभाव की है उनकी कहानियों का कथानक उतना ही सशक्त है और शैली प्रवाहमय है ।

पाठक जब एक कहानी को पढ़ाना शुरू करता है अंत तक बिना पढ़े नहीं रह सकता। इन कहानियों में बनारस की डोम रानी ऐसी कहानी है जो मार्मिक होते हुए समाज की व्यवस्थाओं पर प्रहार करती है।कथानक इतना रोचक है कि उस पर फिल्म बनाई जा सकती है। तीसरे कदम की आहट शीर्षक कहानी समाज में तीसरे जेंडर के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है जो अनुकरणीय है।

सुषमा व्यास के लेखन पर बात करते हुए सुप्रसिद्ध कहानीकार डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा कि लेखिका की भाषा या शैली प्रवाह के लिए है, कहानियों में देशज शब्दों का प्रयोग किया गया है, हर रचनाकार को अपनी आंचलिकता को भी अपने साहित्य में लेना चाहिए .कहानियाँ कि विवधता सुषमा की विशेषता है.
कार्यक्रम में , ब्रजेश नागर,अर्पण जैन , मुकेश तिवारी, देवेंद्र सिसोदिया, पूर्णिमा भारद्वाज, विजय सिंह चौहान, रश्मि चौधरी , रंजना शर्मा , शैलेन्द्र जोशी , ओ पी जोशी,ज्योति जैन,पद्मा राजेंद्र के साथ ही सृजन संवाद के सदस्य, मनोहर दुबे , दीपक शिरालकर , मनोज सेवलकर, अरुण ठाकरे, डॉ श्वेता चौधरी, पल्लवी अत्रे , उपस्थित रहे ।आभार माधुरी व्यास ने व्यक्त किया ।संचालन अर्चना मंडलोई ने किया ।





