
बंगाल में भाजपा की विजय पताका पर लिखी 2029 लोक सभा की इबारत
आलोक मेहता
बंगाल विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय केवल 75 वर्ष का सपना साकार नहीं है | यह उत्तर पश्चिम से पूर्वी भारत में अश्व मेघ के घोड़ों से जुड़े रथ पर लगी विजय पताका में 2029 के लोक सभा चुनाव में दुगुनी सफलताओं के लक्ष्य के गुप्त प्रतीक अंक लिखे हैं | उड़ीसा , बिहार , बंगाल और असम के विधान सभा चुनाव परिणामों ने केवल विरोधी दलों को ही नहीं राजनीतिक विश्लेषकों को भी चकित कर हिला दिया है |प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके निकटस्थ सेनापति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सरकार में रहकर जनता से किए गए वायदे पूरे करने के साथ विश्व की नवीनतम कल्याणकारी योजनाएं लागू करने के प्रयास निरंतर करते हैं | वहीँ किसी भी जीत हार की लड़ाई और उसके बाद तुरंत अगले चुनावों की तैयारी करने लगते हैं |
इस दृष्टि से 2029 की लोकसभा राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2024 में अपने दम पर बहुमत से नीचे रह गई भारतीय जनता पार्टी 2029 में फिर से 272 के जादुई आंकड़े से बहुत आगे बढ़ सकती है ? 2024 में भाजपा को देशभर में 240 सीटें मिलीं। सरकार बनी, लेकिन सहयोगी दलों के सहारे मजबूत बनी हुई है | अगर 2029 की राजनीति में किसी एक राज्य को सबसे निर्णायक माना जाए, तो वह पश्चिम बंगाल है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहाँ 42 में 12 सीटें मिली थीं। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। विधानसभा में भाजपा की बड़ी सफलता ने पहली बार यह संकेत दिया कि बंगाल अब केवल प्रतीकात्मक विस्तार का क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सत्ता समीकरण बदलने वाला राज्य बन सकता है। 2026 के विधानसभा रुझान यह बताते हैं कि भाजपा ने राज्य के ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में संगठनात्मक गहराई बढ़ाई है। यदि यह रुझान कायम रहता है, तो 2029 में बंगाल में भाजपा 12 सीटों से बढ़कर 24 से 30 सीटों तक पहुँच सकती है।यह अनुमान केवल अंकगणित नहीं है। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ सीटों की संख्या 42 है। किसी एक राज्य से 10–15 अतिरिक्त सीटें मिलना राष्ट्रीय बहुमत की दिशा बदल सकता है। यही कारण है कि 2029 के संदर्भ में बंगाल को भाजपा का सबसे बड़ा विस्तार-क्षेत्र माना जा रहा है।
2029 की दिशा का सबसे महत्वपूर्ण पहलु यह है कि भाजपा अब केवल अपने पारंपरिक गढ़ों के सहारे नहीं चल रही। उसकी रणनीति का नया केंद्र पूर्वी भारत बनता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में उभार, ओडिशा में मजबूती और असम में स्थिर पकड़ इस व्यापक बदलाव का संकेत हैं।राष्ट्रीय राजनीति में यह परिवर्तन साधारण नहीं है। लंबे समय तक भाजपा की शक्ति-पट्टी मुख्यतः हिंदी पट्टी और पश्चिम भारत रही। यदि बंगाल में उसे निर्णायक बढ़त मिलती है, तो भारतीय राजनीति का भौगोलिक संतुलन बदल सकता है।2029 की लड़ाई सिर्फ सत्ता बचाने की नहीं होगी। वह इस सवाल की लड़ाई होगी कि भाजपा फिर से भारतीय राजनीति में अकेले बहुमत की पार्टी बन सकती है।
लोकसभा में कुल 543 निर्वाचित सीटें हैं और साधारण बहुमत के लिए 272 सीटें चाहिए। 2024 का परिणाम भाजपा के लिए एक मिश्रित संदेश था। एक तरफ पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ वाले राज्यों मध्य प्रदेश , गुजरात , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ और दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, सबसे बड़ा झटका उसे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में लगा था । उस समय पश्चिम बंगाल में वह उम्मीद से कम सीटों पर सिमटी रही। यही तीन राज्य—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल—2029 के राष्ट्रीय समीकरण के केंद्र में हैं।लोक सभा में बंगाल की 42 सीट हैं | विधान सभा में उसने 294 में से 207 सीट जीती हैं | यह लगभग 70 प्रतिशत से अधिक हैं और लिक सभा की 30 सीट के बराबर है |जबकि पिछले चुनाव में उसे केवल 12 सीट मिली थी | अब मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी को मोदी शाह के वरद हस्त और केंद्र सरकार से पर्याप्त सहयोग मिलने पर वर्तमान राजनीतिक ताकत से अधिक शक्ति मिल जाएगी | तब तो वह और अधिक सीट दिलवाने की हालत में होंगे | इसी तरह बिहार में भाजपा को 40 में से केवल 12 जनता दल यु को 12 सीट मिली थी | बिहार विधान सभा के चुनाव में भाजपा की स्थिति न केवल मजबूत हुई है , उसके पास अपना कद्दावर मुख्यमंत्रीं सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन है | ऐसी स्थिति में अगले लोक सभा चुनाव में वह दस सीट भी बढ़ा ले और नीतीश कुमार के जनता दल यु भी साथ है | तब वह अपनी 30 सीट तक ला सकते है | यही नहीं चिराग पासवान , मांझी , कुशवाह आदि की छोटी पार्टियों का थोड़ा लाभ हो सकता है | संभव है अमित शाह की मेज पर इसकी तैय्यारी का नक्शा बना हुआ रखा हो | असम में भी भाजपा ने रिकॉर्ड जीत हासिल की है और मुख्य मंत्री हिमंत बिसवा सरमा जिस राजनीतिक उग्रता , प्रशासनिक क्षमता और सफलताओं के साथ मोदी के नेतृत्व में काम करते हैं , भाजपा 14 में से 9 सीट के बराबर विधान सभा सीट जीत चुकी | इसके अलावा उसके सहयोगी दल हैं | मजेदार बात यह है कि बिहार , बंगाल , असम में कांग्रेस बुरी हालत में है | उसके साथी लालू तेजस्वी का राष्ट्रीय जनता दल और कम्युनिस्ट पार्टियां भी अंतिम साँसें गिन रही हैं |
उत्तर प्रदेश के बिना किसी भी राष्ट्रीय चुनाव का गणित अधूरा है। 80 लोकसभा सीटों वाला यह राज्य आज भी दिल्ली की सत्ता की सबसे बड़ी चाबी है। 2024 में भाजपा यहाँ 33 सीटों पर आ गई थी। यह गिरावट निर्णायक थी।2029 के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार भाजपा ने अपनी गलती सुधारने के लिए कितनी तैयारी की है ? यों अगले साल विधान सभा में इसका पता चल जाएगा | बताया जाता है कि भाजपा नेतृत्व यानी मोदी शाह की सर्वोच्च प्राथमिकता के कारण साल भर पहले से हर निर्वाचन क्षेत्रों और संभावित उम्मीदवारों के नाम विभिन्न स्तरों से बनवाए गए हैं | लक्ष्य 80 सीट का रखा जा रहा है | योगी आदित्य नाथ का भविष्य भी इस विधान सभा चुनाव पर निर्भर होगा | स्मृति ईरानी , केशव मौर्य अथवा ब्रजेश पाठक जैसे नेताओं और बड़ी संख्या में उनके समर्थकों की नाराजगी योगी महाराज को समय रहते दूर करनी होगी |
महाराष्ट्र भाजपा के लिए 2024 में सबसे बड़ा झटका साबित हुआ था । 48 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा सिर्फ 9 सीटों तक सिमट गई। यह गिरावट सिर्फ सीटों की नहीं थी, बल्कि मनोवैज्ञानिक भी थी। महाराष्ट्र लंबे समय तक भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति का प्रमुख स्तंभ रहा है। 2029 तक यहाँ तीन कारक निर्णायक होंगे—शहरी वोट, गठबंधन की स्थिरता और विपक्षी एकता। यदि भाजपा अपने सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखती है और विपक्ष बिखरा रहता है, तो महाराष्ट्र में उल्लेखनीय वापसी संभव है। राजनीतिक रूप से यथार्थवादी अनुमान यह है कि 2029 में महाराष्ट्र में भाजपा 20 सीटों तक पहुँच सकती है। वैसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सक्षम और सफल मुख्यमंत्रीं हैं और राष्ट्रीय राजनीति में उनका भविष्य दिख रहा है | इसलिए वे तो 25 सीट पाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे | उन्हें भी प्रधान मंत्रीं नरेंद्र मोदी का प्रिय सहयोगी समझा जाता है | यदि यह संख्या ऊपरी सीमा की ओर जाती है, तो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।
भाजपा के पास गुजरात में 26 में से 25 , मध्य प्रदेश में सभी 29 सीट , छत्तीसगढ़ में 11 में से 10 , उड़ीसा में 21 में से 20 , दिल्ली में सभी 7 सीट हैं | अब इन्हें बनाए रखने का हर संभव प्रयास मोदी शाह के निर्देशों से होगा | राजस्थान , हरियाणा , कर्नाटक में पार्टी को पहले से दुगुनी सीट लाने की कोशिश रहेगी | झारखण्ड , हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , तेलंगाना , आंध्र प्रदेश , केरल , कर्नाटक , गोवा , त्रिपुरा , केरल , पंजाब , जम्मू कश्मीर , मणिपुर , अरुणाचल , मिजोरम जैसे राज्यों में पहले से मिली सीटें बढ़ाने के लिए काम चल रहा है | मतलब 2024 की तरह दावा भले ही न किया जाए , लेकिन 2029 में सही अर्थों में 400 पार का संकल्प भाजपा के हर नेता कार्यकर्त्ता से बंद कमरों में करवाने के तेवर बंगाल विजय से बनते दिख रहे हैं |





