कविता: परिवार जीवन का सबसे गहरा आधार

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परिवार जीवन का सबसे गहरा आधार

विम्मी मनोज

नन्हीं-सी उमंगों पर
निश्चल-सी उड़ानें भरती,
तोतली भाषा की बातें
मन ही मन सबको हरती।

नटखट हुड़दंग, दौड़ लगाते,
अब तोला, अब माशा,
ऊँचे-ऊँचे टीले समेट
ले आते हँसते-हँसते।

जोश से भरे अल्हड़ कदम,
नव सृजन, नव स्वप्न,
चेतन-रस की मधुर मिठास
जीवन में घोलते प्रतिक्षण।

घूँघट में सहमी-सी आहट,
पायजेब की मधुर गूँज,
चूड़ियों की कोमल खनक
घर-आँगन में राग सुनाए।

ममता का विस्तृत आँचल,
श्रम और अनुशासन,
गृहस्थी के चाक को
निरंतर गति देते जाते।

झुर्रीदार चेहरे तौलते
गीली मुस्कानों की भाषा,
आँखें मींचे लाठी के सहारे
आँगन का हर कोना नापते।

सब साथ रहें या समंदर पार,
देहरी पर एकछत्र राज,
परिवार की धड़कन
हर पल थाप बजाती रहती।

स्नेह, करुणा, सम्मान समेटे,
सुख-दुख की परिपाटी निभाते,
वटवृक्ष-सी जड़ों से जुड़े
पीढ़ी-दर-पीढ़ी फलते-फूलते।

परिवार केवल संबंध नहीं,
जीवन का सबसे गहरा आधार;
जहाँ हर उम्र को मिलता आश्रय,
हर हृदय को मिलता प्यार।।

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