
पुरुषोत्तम मास का प्रथम दिन माँ सरस्वती को समर्पित करते हुए बावीसा ब्राह्मण प्रतिभा मंच ने साहित्यिक गोष्ठी आयोजित की
इंदौर : हिन्दू धर्म केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि ग्रह, ऋतु और प्रकृति का गहरा ज्ञाता भी है। इस प्रकार, पुरुषोत्तम मास का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से है, बल्कि यह हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी प्रभावित करता है। मान्यता है कि इस मास में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। कल 17 मई 2026 पुरुषोत्तम मास का प्रथम दिन माँ सरस्वती को समर्पित करते हुए बावीसा ब्राह्मण प्रतिभा मंच द्वारा माँ सरस्वती का पूजन और वंदन करते हुए मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया ,इस बार यह श्रीमती सपना प्रदीप उपाध्याय जी के सौजन्य से एवं रजनीकांत जी जोशी एवं जोशी परिवार के आतिथ्य में सम्पन्न हुआ । मासिक काव्य गोष्ठी की कल्पना प्रतिभा मंच के मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर रमेशचन्द्र शर्मा ने की रही ।
इस आयोजन की मुख्य अतिथि मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. स्वाति तिवारी , कार्यक्रम में विशेष अतिथि पूर्व संचालक जनसम्पर्क विभाग म.प्र. श्री सुरेश तिवारी एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रचनाकार श्री रजनीकांत जोशी ने की ।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ वाग्देवी के पूजन और माल्यार्पण के साथ डॉ.स्वाति तिवारी एवं अतिथियों और सहभागियों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया .माँ सरस्वती की श्रीमती पीयूषा द्वारा लिखित वंदना नवोदित गायिका प्रियांशी शुक्ला ने बहुत ही सुमधुर स्वर में प्रस्तुत की .
अतिथियों का भारतीय सनातन परम्परा अनुसार सपना उपाध्याय ने स्वागत किया. साहित्यिक गोष्ठी की शुरुआत डॉ. प्राची पांडे ने की।डॉ आरती दुबे ने माँ वाग्देवी की स्तुति को मधुर स्वरदेते हुए भोज शाळा को समर्पित की । मुख्य अतिथि डॉ स्वाति तिवारी का परिचय उनकी ही कहानियों के अंश सुनाते हुए सूत्रधार श्री प्रणव शुक्ला ने दिया ,डॉ तिवारी ने कोविड काल की स्थितिएवं डॉक्टरों की उससमय की मनस्थिति पर आधारित अपनी मार्मिक कहानी “एक और जंग” का वाचन करुण स्वर में किया ।
समाज के वरिष्ठ पत्रकार श्री शैलेंद्र जोशी जी ने स्वरचित रचना संस्कृत भाषा में प्रस्तुत की । श्रीमती रंजना शर्मा ने अपनी प्रसिद्ध रचना पन्ने उलट पलट कर देखो के माध्यम से किताब वाचन का महत्व स्पष्ट किया । श्री ओ. पी. जोशी ने पंखे बेचने वाले बच्चों की स्थिति का मार्मिक वर्णन अपनी रचना के माध्यम से किया. ।श्रीमती रश्मि विपिन जोशी ने अपनी रचना के माध्यम से बचपन के सुंदर पलों को मधुरता से सजाया। श्रीमती वंदना दुबे ने अपनी प्रखर रचना के माध्यम से हिन्दू मुस्लिम एकता पर अपने भावों को प्रकट किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री रजनीकांत जोशी ने अपनी भाव रचनाओं का वाचन किया साथ ही उनकी जीवन संगिनी पर रचित भावों ने सबका मन मोह लिया ।
श्री राघवेन्द्र दुबे ने”लेखनी का सामर्थ्य”विषय पर बात करते हुए कहा अभी तक करोड़ों शब्द लिखे गए तथा करोड़ों वार्ताएं रची गई किंतु इस अथाह भंडार में से कुछ रचनाएं ही समय सीमा को तोड़ती हुई सदैव बनी रहती हैं।आखिर ऐसी क्या बात है जो कतिपय रचनाओं को अमरत्व प्रदान करती है. “अंकल टाम्स केबिन” ग्रन्थ का जिक्र करते हुए सलाह दी की अवसर मिले तो इसे अवश्य पढना चाहिए.

डॉक्टर रमेशचन्द्र शर्मा ने रचना ‘हाशिए पर खड़ा आदमी हूं’ कविता से गंभीर भावों को प्रस्तुत किया । सपना जी उपाध्याय ने कोरोना कॉल की स्थितियों पर अपने भाव प्रस्तुत किए। शास्त्रीय भजन गायिका कुमारी प्रियांशी शुक्ला ने श्रीमती*पीयूषा शुक्ला* द्वारा रचित सरस्वती वंदना का गान कर श्रोताओं का मन मोह लिया।प्रतिभा मंच की सचिव श्रीमती पीयूषा शुक्ला ने स्वरचित श्याम जी का ‘हम मिलके भजन गाएं’ ,गाकर वातावरण को आध्यात्मिक वातावरण में सभा पुरुषोत्तम मास को समर्पित की । इस अवसर पर विशेष अतिथि श्री सुरेश तिवारी जी ने कहा यह पारिवारिक वातावरण में आयोजित एक एसा साहित्यिक अनुष्ठान है जिसमें समाज की चार पीढियां एक साथ सहभागिता कर रही हैं. साहित्य के प्रति नयी पीढ़ियों को पठन -पाठन और लेखन के प्रति आकर्षित करने का यह सर्वोत्तम उपाय भी है .यह प्रतिभा मंच सभी ललित कलाओं को समर्पित हैं यह जानकार और देख कर अत्यंत प्रसन्नता हुई .सामाजिक प्रतिभा (Social Intelligence या Social Genius) का अर्थ है अन्य लोगों के साथ सफलतापूर्वक जुड़ने , बातचीत करने और विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों को गहराई से देखने की असाधारण क्षमता। यह सिर्फ मिलनसार होने से कहीं आगे की कला है जो हमारी नयी पीढ़ी में भी जाना चाहिए . उन्होंने सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी .
कार्यक्रम का संचालन श्री प्रणव शुक्ला जी ने बहुत ही अनूठे और रोचक अंदाज में साहित्यिक माहोल बनाते हुए किया एवं सभी श्रोता गण से अनुरोध किया कि मासिक काव्य गोष्ठी में एक नए सदस्य का पदार्पण हो ।
रजनीकांत जोशी जी की सुपुत्री शैफाली जी ने विनम्र स्वरों में सभी को धन्यवाद दे कर आभार प्रदर्शन किया ।
प्रतिभा मंच का यह गौरवपूर्ण साहित्यिक आयोजन सफलता से संपन्न हुआ





