
MP बनाएगा कोयला गैसीकरण नीति, ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होंगे,बढ़ेगा निवेश, मिलेंगे रोजगार
भोपाल: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईधन बचत, आयात पर निर्भरता कम करने की अपील पर काम करते हुए मध्यप्रदेश सरकार राज्य में उपलब्ध कोल भंडार का उपयोग करते हुए नई कोयला गैसीकरण नीति तैयार करेगी। इस गैस के जरिए तैयार गैस का घरेलु और व्याववसायिक गैस की जरुरतों को पूरा किया जा सकेगा। महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश इस संबध में अपनी नीति तैयार कर टेंडर जारी कर चुके है।
मध्यप्रदेश सरकार इन दोनो राज्यों की नीति का अध्ययन कराएगी।।इसके बाद अपनी नीति तैयार करेगी। नीति लागू करने के लिए इसे कैबिनेट में स्वीकृति के लिए लाया जाएगा।
केन्द्र सरकार ने कोयला गैसीकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने भी कोल गैसीफिकेशन मिशन बनाया हुआ है। जिसके जरिए गैस और ईंधन के उपयोग में राज्यों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार भी इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रदेश के लिए अलग कोयला गैसीकरण नीति तैयार करने की कवायद शुरु हो गई है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को नोडल विभाग बनाकर इस दिशा में काम किया जा रहा है। कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी उर्जा सुरक्षा, विद्युत उत्पादन और रासायनिक उद्योगों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक सौ मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने 37 हजार 500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना को भी मजूरी प्रदान की है।
मध्य य्रदेश देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां प्रचुर मात्रा में कोयले के भंडार, विकसित खनन संरचना, उर्जा उत्पादन इकाईयां और औद्योगिक आधार मौजूद है। ऐसे में मध्यप्रदेश की नई कोयला गैसीकरण परियोजना का लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा। नई नीति से कोयले से प्राप्त सिंथेटिक गैस के आधार पर मैथेनाल, अमोनिया, यूरिया और अन्य रसायनों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा ओर इनकी आयात निर्भरता कम होगी। प्रदेश मे नये औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे।
केन्द्र सरकार के आंकलन के अनुसार देशभर में प्रस्तावित पच्चीस कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से पचास हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।साथ ही 75 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण से प्रतिवर्ष 63 सौ करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
मध्यप्रदेश में मौजूद कोयले पर आक्सीजन प्रेशर से डालकर कोयले से गैस निकाली जा सकती है। इस गैस का उपयोग ईंधन के रुप में किया जा सकेगा। इससे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा और भू अर्जन, खुदाई, प्रदूषण और राखोड़ी जैसी कवायद करने से भी बचा जा सकेगा।
मध्यप्रदेश सरकार अपने अधिकारियों के दल को उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में भेजेगी और वहां की कोल गैसीकरण नीति का अध्ययन कराएगी। उसके बाद मध्यप्रदेश में उपलब्ध कोल भंडारों और यहां के पर्यावरण और संसाधनों के हिसाब से मध्यप्रदेश में कोल गैसीकरण की नीति तैयार की जाएगी। यह नीति कैबिनेट में लाने के बाद लागू की जाएगी।





