डिजिटल फिल्म हिट रही, फिजिकल ट्रेलर हिट नहीं रहा…

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डिजिटल फिल्म हिट रही, फिजिकल ट्रेलर हिट नहीं रहा…

कौशल किशोर चतुर्वेदी
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हाल ही में जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी ने धमाल मचाया था, फिजिकल प्लेटफॉर्म पर 6 जून 2026 को वैसा कमाल देखने को नहीं मिला। अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी को डिजिटल किंग बनाने के बाद पहली बार अमेरिका से भारत लौटे तो जेन-जी जैसा क्रेजी माहौल देखने को नहीं मिल सका। इससे यह भी साबित हुआ कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच मुहिम को सपोर्ट करने वाले युवाओं में भारत के बाहर के युवाओं की सहभागिता प्रमुख थी। वहीं, भारत में अपेक्षाकृत मुट्ठी भर युवाओं ने ही कॉकरोच मुहिम को अपना समर्थन दिया था। वरना यदि दो करोड़ से अधिक युवाओं का समर्थन इंस्टाग्राम पर पाने वाले अभिजीत दीपके के स्वागत में एक प्रतिशत यानि दो लाख से ज्यादा युवा भी दिल्ली की सड़कों पर उतर जाता, तो कोहराम मच जाता। वैसे नेपाल या दूसरे देशों की तरह भारत में इस तरह के विरोध की गुंजाइश भी ज्यादा नहीं है। सिस्टम विरोधी तंत्र यहाँ मनमानी करते हुए सत्ता पलट जैसे प्रयासों में सफलता कभी नहीं पा सकता है। ऐसे में अभिजीत दीपके को सत्ता और व्यवस्था विरोधी दीपक जलाने में लंबे समय तक संघर्ष का दीपक जलाकर रखना पड़ेगा और लोकतांत्रिक तरीके से ही राजनैतिक संसार में
जगह बनानी पड़ेगी। और यह अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है। देखा जाए तो भारतीय युवा इतनी आसानी से सड़कों पर उतरकर विरोध करने में भरोसा नहीं रखता। हालांकि युवाओं के मुद्दे पर मंथन का दौर शुरू हो चुका है और समय के साथ, यह युवा हितैषी मुद्दा निष्कर्ष की तरफ अवश्य बढ़ेगा। हालांकि, भारत में युवाओं के मुद्दों को आधार बनाकर पर राजनैतिक महत्वाकांक्षा का दीपक जलाना, अभिजीत की जीत पर संदेह पैदा कर रहा है।
यह बात सही है कि भारतीय युवा नीट एग्जाम का पेपर लीक होने के बाद आक्रोशित है। और उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि ’21 जून के री-नीट एग्जाम पर भरोसा कैसे करें?’, पेपर लीक से व्यथित छात्रों ने कॉकरोच पार्टी के मंच से यह दर्द भी बयां किया। फिर भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का यह पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नजर नहीं आया। प्रदर्शन में नीट- यूजी पेपर लीक, सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने नाराजगी जताई। इन सभी मुद्दों पर कॉकरोच जनता पार्टी को जनता का वैचारिक समर्थन मिल सकता है, लेकिन युवाओं के मुद्दों को आधार बनाकर राजनैतिक राजतिलक की उम्मीद कतई नहीं की जा सकती। इस प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से की गई, जो अभिजीत ने आने के पहले ही घोषणा कर दी थी। लेकिन यह मुश्किल नहीं बल्कि असंभव है कि मोदी सरकार के मंत्री से इस्तीफा लेकर कॉकरोच जनता पार्टी अपनी राजनैतिक उम्मीदों का महल खड़ा कर पाएगी।
जंतर मंतर पर जय भीम के नारे के साथ पहुंचे दीपके के हाथ में बाबासाहेब अंबेडकर की किताब थी। जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी भाषण दिया। दिल्ली पुलिस का रवैया भी नरम था। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक शख्स कॉकरोच मारने वाला ‘हिट’ लेकर पहुंचा तो सीजेपी समर्थकों और पुलिस ने मिलकर उसे बाहर निकाल दिया। कुल मिलाकर प्रदर्शनकारियों के साथ शालीनता और सहानुभूतिपूर्वक पेश आया गया। स्टेज, स्पीकर, बैनर और फ्लेक्स में कोई रोकटोक नहीं हुई। यानि दीपके और उनकी टीम को पहले प्रदर्शन में कोई बड़ी अड़चन नहीं आई। दीपके ने चेतावनी दी कि अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक और सीबीएसई-ओएसएम गड़बड़ी पर इस्तीफा नहीं दिया, तो पूरे देश में आंदोलन होगा।
राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं कांग्रेस और उसके छात्र संगठन एनएसयूआई ने कॉकरोच जनता पार्टी से दूरी बनाए रखी। साथ ही कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि जब एनएसयूआई को पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में रोका गया, तो सीजेपी के प्रदर्शन में इतनी सहूलियत क्यों मिली? दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने खुलकर सीजेपी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं के गुस्से और निराशा की आवाज है। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार युवाओं को देशविरोधी कहने की बजाय उनकी समस्याएं सुनें और प्रधानमंत्री मोदी शिक्षा मंत्री को तुरंत हटाएं। शिवसेना (यूबीटी) ने भी सीजेपी के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था।
खैर यही कहा जा सकता है कि कॉकरोच जनता पार्टी युवाओं के मुद्दों को उठाकर युवाओं का समर्थन तो हासिल कर सकती है, लेकिन सत्ता में आने के अपने राजनीतिक मंसूबों में आसानी से रंग नहीं भर सकती। पहला प्रदर्शन इस मायने में सफल माना जा सकता है कि पूरे देश में आंदोलन करने की घोषणा कर कॉकरोच जनता पार्टी ने उम्मीदों को बरकरार रखा है। पर समग्र रूप से यही माना जा सकता है कि कॉकरोच जनता पार्टी की डिजिटल फिल्म जितनी ज्यादा हिट रही थी, उसके मुताबिक फिजिकल ट्रेलर हिट नहीं हो सका… अब आंदोलन रूपी फिल्म क्या गुल खिलाती है यह वक्त के साथ सामने आने वाला है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।