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Kissa-A-IPS: IPS Anu Beniwal: कानून की नजर में रसूख या रुतबा कोई मायने नहीं रखता- चाहे तुम्हारे चाचा राष्ट्रपति ही क्यों ना हो, चालान तो कटेगा! 

जानिए वायरल वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक सुर्खियों में आने वाली इस युवा IPS अधिकारी की कहानी जो बिना किसी डर या पक्षपात के नियमों के सख्त पालन का प्रतीक बनी   

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Kissa-A-IPS: IPS Anu Beniwal: कानून की नजर में रसूख या रुतबा कोई मायने नहीं रखता- चाहे तुम्हारे चाचा राष्ट्रपति ही क्यों ना हो, चालान तो कटेगा! 

सुरेश तिवारी 

भारतीय पुलिस सेवा में 2022 बैच की IPS अधिकारी अनु बेनीवाल का एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ जिसमें वे एक गाड़ी के चालक को कह रही है ‘चाहे तुम्हारे चाचा राष्ट्रपति ही क्यों ना हो चालान तो कटेगा’। अनु इन दिनों ग्वालियर में एडिशनल एसपी के पद पर पदस्थ हैं। ट्रैफिक चेकिंग के दौरान उनकी टीम ने एक ऐसी गाड़ी को रोका जिस पर नंबर प्लेट नहीं थी और शीशों में काली फिल्म चढ़ी थी। जब उन्होंने इस गाड़ी का चालान बनाने की बात कही तो चालक ने रसूख और राजनीतिक संपर्कों की धौंस देखकर चालान से बचने की कोशिश की। लेकिन अनू बेनीवाल ने साफ-साफ दो टूक कहा कानून का शासन हर नागरिक पर समान रूप से लागू होता है, चाहे उसकी सत्ता या पद कुछ भी हो। चाहे तुम्हारे चाचा राष्ट्रपति ही क्यों ना हो चालान तो कटेगा। इस वीडियो ने ऑनलाइन खूब सुर्खियां बटोरीं और कई लोगों ने उनके सख्त रवैये और उल्लंघनकर्ताओं से निपटने के तरीके की सराहना की, जिसमें उन्होंने बिना किसी समझौते के कानून लागू किया।

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बता दें कि अनू बेनीवाल बेहद साधारण और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार से आने वाली युवा आईपीएस अधिकारी हैं। उनके पिता बटन बनाने का छोटा सा काम करते थे और मां सिलाई करके घर चलाती थी। लगातार असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और चौथी बार में यूपीएससी में 270 वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनी और उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला। वे ग्वालियर में एडिशनल एसपी से पहले धार जिले में मनावर में एसडीओपी पदस्थ थी। वहां पर उनके द्वारा कानून और व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को न्याय दिलाने से जुड़े कामों को लोग आज भी याद करते हैं।

उनकी यात्रा दृढ़ता और अटूट संकल्प का जीता-जागता उदाहरण है। यह दर्शाती है कि चाहे कितनी भी बाधाएँ क्यों न आएँ, निरंतर प्रयास और एकाग्रता से लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।Kissa-A-IPS: IPS Anu Beniwal: कानून की नजर में रसूख या रुतबा कोई मायने नहीं रखता- चाहे तुम्हारे चाचा राष्ट्रपति ही क्यों ना हो, चालान तो कटेगा! 

26 अप्रैल, 1992 को दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में जन्मीं अनु बेनीवाल एक साधारण परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता संजय कुमार कभी बटन बनाने की एक छोटी सी फैक्ट्री चलाते थे, लेकिन उनकी गंभीर बीमारी के बाद उसे बंद करना पड़ा। आर्थिक तंगी के कारण वे अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि उनके बच्चों को इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अनु की मां ने परिवार के भरण-पोषण में अहम भूमिका निभाई। घर के खर्चों को पूरा करने और उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे घर पर ही सूट सिलती थीं। अनु के यूपीएससी की तैयारी के दौरान, उनके माता-पिता दोनों गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके पिता हृदय रोग और सुनने की क्षमता में कमी से पीड़ित हैं, जबकि उनकी मां तंत्रिका संबंधी रोग से ग्रसित हैं और उनकी दो सर्जरी हुई हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, अनु की शिक्षा में कभी कोई बाधा नहीं आई।


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यह परिवार आज भी सादा जीवन व्यतीत करता है। अनु के भाई ने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, जो बच्चों की शिक्षा के प्रति माता-पिता के अटूट समर्पण को दर्शाता है।

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अनु एक विलक्षण छात्रा रही हैं। उन्होंने दिल्ली में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने बीएससी और फिर एमएससी की डिग्री हासिल की और बाद में कुछ वर्षों तक नैनो साइंस अनुसंधान के क्षेत्र में काम किया। अपनी शैक्षणिक और शोध कार्य पूरा करने के बाद, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया और भूगोल को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।

यह बदलाव आसान नहीं था। यूपीएससी की उनकी यात्रा में बार-बार कई झटके लगे, जिन्होंने उनके दृढ़ संकल्प की परीक्षा ली।

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अनु ने पहली बार 2018 में सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन प्रारंभिक चरण में असफल रहीं। दूसरे प्रयास में वे मुख्य परीक्षा तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आया। उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में अखिल भारतीय रैंक 638 हासिल की – यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, हालांकि इससे उन्हें वह सेवा नहीं मिली जिसकी उन्हें आकांक्षा थी।

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हार न मानते हुए, उन्होंने 2022 में चौथा प्रयास किया और अखिल भारतीय रैंक 217 हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ। उन्हें मध्य प्रदेश कैडर आवंटित किया गया, जो वर्षों के परिश्रम और त्याग की परिणति का प्रतीक था।

आईपीएस अनु बेनीवाल वर्तमान में ग्वालियर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। नियमित जांच अभियान के दौरान रिकॉर्ड किए गए हाल ही में वायरल हुए वीडियो ने उनके काम को सार्वजनिक सुर्खियों में ला दिया है, जो बिना किसी डर या पक्षपात के नियमों के सख्त प्रवर्तन का प्रतीक है।

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अनु बेनीवाल का विवाह आईपीएस अधिकारी डॉ. आयुष जाखर से हुआ है, जो 2022 बैच के हैं और मध्य प्रदेश कैडर में कार्यरत हैं। डॉ. जाखर पूर्व पीएमटी राज्य टॉपर और एम्स जोधपुर से एमबीबीएस स्नातक हैं। वे सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी दिलीप जाखर के पुत्र हैं।