
राज-काज:मंत्रिमंडल से हट पाएंगे नॉन परफारमेंस वाले मंत्री….?
* दिनेश निगम ‘त्यागी’
* मंत्रिमंडल से हट पाएंगे नॉन परफारमेंस वाले मंत्री….?

– राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर चर्चा एक बार फिर चल पड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी इस बार इसके संकेत दिए हैं। राजनीतिक हलकों में तीन तरह की अटकलें हैं। पहला, विधानसभा के मानसून सत्र के बाद यह फेरबदल किया जाएगा। दूसरा, नॉन परफारमेंस वाले मंत्रियों को हटाकर उनके स्थान पर नए चेहरों को अवसर दिया जाएगा और तीसरा, विवादों में रहने वाले मंत्रियों की भी छुट्टी की जाएगी। इसके साथ हमेशा की तरह मंत्री बनने वाले दावेदार विधायकों के नाम चल रहे हैं। हटाए जाने वाले मंत्रियों में विजय शाह, प्रतिमा बागरी, दिलीप अहिरवार, राधा सिंह सहित 6 के नाम लिए जा रहे हैं। इनके स्थान पर जिन्हें अवसर मिलना है उनमें कमलेश शाह, गोपाल, भार्गव, भूपेंद्र सिंह, मालिनी गौड़, अर्चना चिटनीस, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह सहित 7 विधायकों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पर पहला और बड़ सवाल है कि क्या मानसून सत्र के पहले यह फेरबदल हो पाएगा? क्या नॉर परफारमेंस और विवादित रहने वाले मंत्री हटाए जाएंगे? सवाल इसलिए है क्योंकि लंबे समय से ऐसी अटकलें चाहे जब चल पड़ती हैं लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ जैसा रहता है। अर्थात ये अटकलें दम तोड़ जाती हैं। फिलहाल, मंत्रिमंडल में 31 सदस्य हैं और 4 पद खाली हैं।
0 संघ और मुस्लिमों पर विजयवर्गीय कर बैठे ये टिप्पणी….

– आमतौर पर प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खरी बात कहने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी बात कड़वी और विवादित हो जाती है। फिर उनके दो ताजे बयान चर्चा में हैं। संघ को लेकर उन्होंने कह दिया कि अब संघ में भी अच्छे लोगों की कमी हो गई है। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संख्या बढ़ गई, हमारी बहुत बड़ी पार्टी बन गई है। सरकार में जो अधिकारी आता है, कहता है मैंने भी पट्टी बांधी है, आरएसएस की चड्डी पहनी है। इस तरह सरकार आने के बाद सब अधिकारी संघ के हो गए। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी ने तो यह तक कहा कि मेरे पिताजी संघ में अध्यक्ष थे। नतीजा यह है कि पहले अच्छे इंसान थे, अब संघ में इनकी कमी होती जा रही है। संगठन बढ़ रहा, विचारधारा भी बढ़ रही हैं लेकिन अच्छे लोग नहीं होंगे तो इस विचारधारा का महत्व क्या? इसके साथ उन्होंने चिंतन-मनन की सलाह दे डाली। पर सवाल है कि क्या अधिकारियों का संघ का कहने के कारण ही अच्छे लोगों की कमी है? दूसरे बयान में उन्होंने कह दिया कि मुस्लिम हमें काफिर कहते हैं। उन्होंने सलाह भी दे डाली कि यदि हम काफिर हैं तो मुस्लिम हमारी बनाई सड़कों पर न चलें। लाड़ली बहना जैसी योजनाओं का लाभ न लें। जवाब आया कि सड़कें और योजना िकसी एक समाज की नहीं सरकार की हैं, इसलिए सलाह बेतुकी है।
*निर्मला मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में कांग्रेस….*

– देश के अंदर दलदबल कानून मजाक बनता जा रहा है। विधानसभाओं में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की तर्ज पर इसे हांका जा रहा है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे काे ही ले लीजिए। वे लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री के सामने सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद से भाजपा में हैं, पार्टी की बैठकों में हिस्सा लेती हैं। कांग्रेस के कार्यक्रमों में नहीं जाती लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद उनकी सदस्यता पर अब तक आंच नहीं आई। सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन दे रखी है कि विधानसभा अध्यक्ष को दलबदल के तहत आई याचिका को तीन माह अर्थात 90 दिन के अंदर निबटना होगा, लेकिन स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने निर्मला के मामले में कोई निर्णय नहीं लिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इसे हाईकोर्ट ले गए, पर वहां भी निर्मला को संजीवनी मिल गई। हाईकोर्ट ने यह कह कर याचिका खारिज कर दी की कि प्रकरण विधानसभा स्पीकर के यहां लंबित है और वह स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता। अब कांग्रेस निर्मला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट खुद द्वारा तय गाइडलाइन के अनुसार सप्रे के खिलाफ फैसला देता है या वे फिर बच निकलती हैं, कोई नहीं जानता। फिलहाल तो दल बदलने के 2 साल बाद भी निर्मला की विधायकी बरकरार है।
खत्म होगा भाजपा के ताकतवर पदाधिकारी का इंतजार….!

– जनवरी में हितानंद शर्मा की सेवाएं आरएसएस में वापस होने के बाद से प्रदेश भाजपा के सबसे ताकतवर पदाधिकारी का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ। संगठन के नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति मार्च तक किए जाने की संभावना थी लेकिन जून भी गुजर गया। अर्थात लगभग 6 माह से प्रदेश भाजपा बिना संगठन महामंत्री के चल रही है। फिलहाल यह दाियत्व क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल निभा रहे हैं। भाजपा और संघ के सूत्रों की माने तो नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति को लेकर कवायद अंतिम चरण में है। उधर दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम घोषित होगी और इधर प्रदेश भाजपा को नया संगठन महामंत्री मिल जाएगा। राजस्थान में नियुक्ति होने के बाद ही मध्य प्रदेश में भी नए संगठन महामंत्री को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, लेकिन कुछ आंतरिक कारणों से इसमें रुकावट आ गई। कवायद में संघ के आधा दर्जन खाटी प्रचारकों के नाम रेस में बताए जा रहे हैं। इसमें दिनकर राव का नाम सबसे आगे हैं। इसके अलावा दीनदयाल शोध संस्थान के अभय महाजन , विद्या भारती के अखिलेश मिश्रा, मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन, मध्य भारत के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता के अलावा निखलेश माहेश्वरी का नाम भी कतार में हैं। लिहाजा, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही प्रदेश भाजपा को नया संगठन महामंत्री मिल जाएगा।
* कांग्रेस में है जेन-जी युवाओं को साथ जोड़ने की क्षमता….!*

– कुछ पड़ोसी देशों में जेन जी के तख्तापलट जैसे कारनामे और अपने देश में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रति प्रारंभ में उमड़े युवाओं के समर्थन से जहां सत्तापक्ष सकते में है, वहीं विपक्ष खास कर कांग्रेस की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। नीट सहित कई प्रमुख परीक्षाएं कराने में सरकार की असफलता ने इसमें आग में घी डालने का काम किया है। देश के विभिन्न हिस्सों से आई छात्रों की आत्महत्याओं की घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। बाद में मैदान में उतरने पर कॉकरोच जनता पार्टी को हालांकि अपेक्षा के अनुरूप समर्थन नहीं मिला लेकिन युवाओं के अंदर असंतोष तो घर कर बैठा है। इसे भुनाने के उद्देश्य से कांग्रेस ने राहुल गांधी की रणनीति पर काम शुरू किया है। युवाओं को साथ जोड़ने के लिए ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत प्रदेश भर में पत्रकार वार्ताएं की गईं। भोपाल में उप्र से सांसद इमरान मसूद आए। कांफ्रेंस के दौरान एक टॉपर छात्र फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने कहा कि सीबीएसई ने मेरा भविष्य बरबाद कर दिया। उसने आरोप लगाया कि उसके 17 नंबर जोड़े ही नहीं गए। बहरहाल, कांग्रेस परीक्षाओं को लेकर केंद्र पर हमलावर है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। योजना जेन जी की तरह युवाओं को सड़क पर उतारने और युवा असंतोष भुना कर कांग्रेस को फिर खड़ा करने की है। पर बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस ऐसा कर पाने में सक्षम है?
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